Wednesday, February 4, 2026
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Bangladesh: क्या शेख हसीना की सत्ता में वापसी होगी ? – यूनुस सरकार पर अमेरिका-यूरोप-रूस का दबाव

Bangladesh: शेख हसीना की अपने देश में वापसी कब मुमकिन होगी - क्या वो सत्ता में वापसी कर पायेंगी - यूनुस सरकार पर है वैश्विक दबाव..

Bangladesh: शेख हसीना की अपने देश में वापसी कब मुमकिन होगी – क्या वो सत्ता में वापसी कर पायेंगी – यूनुस सरकार पर है वैश्विक दबाव..

बांग्लादेश एक निर्णायक मोड़ पर: चुनाव से पहले लोकतंत्र, स्थिरता और वैश्विक छवि पर संकट

फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश आज अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। देश में सत्ता की अस्थायी व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख और अंतरराष्ट्रीय विश्वास—तीनों ही गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस अब केवल घरेलू आलोचना ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के लगातार बढ़ते दबाव के घेरे में आ चुके हैं।

इन घटनाक्रमों के बीच एक सवाल तेजी से उभर कर सामने आया है—क्या बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना की वापसी की ज़मीन तैयार हो रही है?

यूनुस सरकार पर क्यों मंडरा रहा है अंतरराष्ट्रीय संकट?

जुलाई में सत्ता परिवर्तन के बाद गठित अंतरिम सरकार का नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को सौंपा गया था। प्रारंभ में यह प्रशासन लोकतांत्रिक सुधारों और निष्पक्ष चुनावों की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन कुछ ही महीनों में सरकार के फैसलों ने व्यापक असंतोष और अंतरराष्ट्रीय आलोचना को जन्म दे दिया।

सबसे बड़ा विवाद उस समय खड़ा हुआ जब अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और उससे संबद्ध छात्र संगठन बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया। सरकार ने इन संगठनों को जुलाई की हिंसक घटनाओं से जोड़ते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि किसी संपूर्ण राजनीतिक दल को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है।

अमेरिका की खुली चेतावनी: बैन हटाइए, वरना चुनाव की वैधता पर सवाल

अमेरिकी संसद के वरिष्ठ सांसदों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के प्रमुख सदस्य ग्रेगरी मीक्स, बिल हुईजेंगा और सिडनी कैमलागर-डोव ने मुहम्मद यूनुस को एक औपचारिक पत्र भेजा।

इस पत्र में कहा गया कि—

यदि किसी प्रमुख राजनीतिक दल को चुनाव से बाहर रखा गया

तो चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं माने जाएंगे

और इससे करोड़ों नागरिकों का मताधिकार छीना जाएगा

अमेरिकी सांसदों ने स्पष्ट किया कि “सामूहिक दोष” की नीति मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के विपरीत है। इसे अमेरिका की ओर से अब तक की सबसे कठोर राजनयिक चेतावनी माना जा रहा है।

राजनीतिक स्वतंत्रता पर पहरा और विवादित ICT की वापसी

अमेरिका ने केवल अवामी लीग पर प्रतिबंध का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि दो अन्य गंभीर चिंताओं को भी उजागर किया –

राजनीतिक गतिविधियों पर बढ़ती बंदिशें

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) को उसके पुराने विवादास्पद स्वरूप में दोबारा शुरू करना

अमेरिकी सांसदों का कहना है कि यदि न्यायिक संस्थाओं का उपयोग राजनीतिक बदले के लिए हुआ, तो पूरी चुनावी प्रक्रिया की साख नष्ट हो जाएगी।

यूनुस का बचाव: “देश पूरी तरह चुनाव के लिए तैयार है”

अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से बातचीत में मुहम्मद यूनुस ने आश्वासन दिया कि –

12 फरवरी को चुनाव कराए जाएंगे

मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण होगी

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अपदस्थ शासन के समर्थक विदेशों से धन और हिंसा के जरिए चुनावी माहौल को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

शेख हसीना का सख्त संदेश: “अवामी लीग के बिना चुनाव लोकतंत्र नहीं”

22 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तीखा बयान जारी करते हुए कहा –

“अवामी लीग को बाहर रखकर होने वाला चुनाव लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता का दिखावटी अभिषेक होगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि –

करोड़ों मतदाता मतदान से वंचित हो जाएंगे

नई सरकार को नैतिक वैधता प्राप्त नहीं होगी

हसीना ने हालिया हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

प्रेस पर हमले और भीड़ न्याय: लोकतंत्र की जड़ें हिलती हुई

हाल के हफ्तों में ढाका में बढ़ती Mob Justice की घटनाओं ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। प्रतिष्ठित अखबार ‘द डेली स्टार’ के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया, जहां 28 पत्रकार लगभग चार घंटे तक धुएं और लपटों के बीच फंसे रहे। इसे प्रेस स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना गया।

फ्रांस-जर्मनी का कड़ा संकेत और रूस की रणनीतिक चेतावनी

फ्रांस और जर्मनी के शीर्ष राजनयिकों ने खुद घटनास्थल का दौरा कर यह स्पष्ट किया कि यूरोप बांग्लादेश में हो रहे लोकतांत्रिक क्षरण पर करीबी नजर रखे हुए है।

वहीं रूस ने ढाका को सलाह दी कि वह भारत के साथ संबंधों में तनाव कम करे। रूसी राजदूत ने साफ संकेत दिया कि मॉस्को बांग्लादेश को “एंटी-इंडिया ज़ोन” के रूप में उभरते नहीं देखना चाहता।

चारों ओर से घिरी अंतरिम सरकार

आज यूनुस सरकार पर –

पश्चिम से लोकतंत्र और मानवाधिकारों का दबाव

रूस से भारत विरोधी राजनीति से दूरी की चेतावनी

देश के भीतर अवामी लीग समर्थकों का असंतोष

तीनों ही मोर्चों से दबाव बढ़ता जा रहा है।

बड़ा सवाल: क्या शेख हसीना की वापसी अब तय है?

घटनाक्रमों को जोड़कर देखें तो संकेत स्पष्ट हैं –

अवामी लीग के बिना चुनाव को अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिलेगी

शेख हसीना अब राजनीतिक समाधान के केंद्र में लौटती दिख रही हैं

अमेरिका, यूरोप और रूस—तीनों का रुख एक ही दिशा की ओर इशारा कर रहा है

बांग्लादेश आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है, जहां एक रास्ता लोकतंत्र और वैश्विक स्वीकार्यता की ओर जाता है, तो दूसरा रास्ता अलगाव और अस्थिरता की ओर।

अब निर्णय यूनुस सरकार के हाथ में है- और उसी निर्णय पर निर्भर करेगा यह सवाल:

क्या शेख हसीना की बांग्लादेश की सत्ता में वापसी होगी?

(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)

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