Bharateeya Shiksha: आज की इन्डियन एजूकेशन भारतीय शिक्षा नहीं है, मैकाले शिक्षा प्रणालि के आज के दौर में भारतीय पारंपरिक शिक्षा को पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है..
दिनांक 09 जनवरी 2026 को मगध विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग, वैश्विक संस्कृत मंच, नई दिल्ली एवं भारतीय शिक्षण मंडल, दक्षिण बिहार प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक परिप्रेक्ष्य” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र कुमार अनायत, अखिल भारतीय प्रमुख (भारतीय ज्ञान परंपरा), भारतीय शिक्षण मंडल ने अपने उद्बोधन में विश्व शांति के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।
प्रो. मुरली मनोहर पाठक, कुलपति, श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्राचीन ऋषि-परंपरा से लेकर वेद, आरण्यक आदि में निहित ज्ञान पर आधारित अनुसंधान पर प्रकाश डाला।
स्वामी विवेकानंद गिरि, महंत, श्री बोधगया मठ एवं सदस्य, बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने वेद एवं कठोपनिषद् के माध्यम से जीवन के विविध आयामों की व्याख्या की। इस अवसर पर स्मारिका डॉ. एकता वर्मा की पुस्तक “योगदर्शन की भास्वती टीका” का विमोचन भी किया गया।

डॉ. राणा पुरुषोत्तम सिंह (सह-प्रमुख, भारतीय शिक्षण मंडल एवं आचार्य, नव नालंदा विहार), डॉ. राजेश कुमार मिश्र (महासचिव, वैश्विक संस्कृत मंच), डॉ. मृत्युंजय झा (अध्यक्ष, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड) ने भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका को एकीकृत भारत के निर्माण के संदर्भ में प्रस्तुत किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. बी. आर. के. सिन्हा, प्रति-कुलपति, मगध विश्वविद्यालय ने नालंदा, तक्षशिला एवं विक्रमशिला की ज्ञान-परंपरा पर प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में बिहार की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया।
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पी. शाही के संरक्षण में संस्कृत विभाग द्वारा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एकता वर्मा (आयोजन सचिव) एवं डॉ. ममता मेहरा (आयोजन सचिव),सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. मुनेश्वर, डॉ. जावेद अंजुम, डॉ. प्रियंवदा (पूर्व प्राध्यापक), डॉ. मीनाक्षी, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. कविता, डॉ. दीपशिखा पांडे, डॉ. ज़ियाउल्लाह अनवर, डॉ. राहुल कुमार सहित अन्य शिक्षक, छात्र-छात्राएँ एवं शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर डॉ. विनय कुमार तिवारी, सह-आयोजन सचिव ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम पर मीडिया के साथ समस्त जानकारी विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा जी ने साझा की.



