Air Crash Special:बर्फीले तूफान में फंसा विमान, ‘सफेद दैत्य’ ने निगल ली उड़ान: ईरान के सबसे भयावह एयर हादसे में 78 यात्रियों की मौत
आज से ठीक 15 वर्ष पहले, 9 जनवरी 2011 को ईरान की एविएशन हिस्ट्री का सबसे खौफनाक अध्याय लिखा गया। तेहरान से उर्मिया जा रही ईरान एयर की फ्लाइट 277 लैंडिंग से कुछ ही मिनट पहले ऐसे बर्फीले मौत के जाल में फंस गई, जहां से लौट पाना नामुमकिन हो गया। तेज बर्फबारी, शून्य के करीब दृश्यता और आसमान में मौजूद जानलेवा सीवियर आइसिंग जोन ने इस यात्री विमान को कुछ ही पलों में मौत की उड़ान में बदल दिया।
उर्मिया एयरपोर्ट से लगभग 15 किलोमीटर दूर तरमानी गांव के पास विमान धरती से टकराया और देखते ही देखते आग के गोले में बदल गया। इस हादसे में 78 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें पूरा फ्लाइट क्रू भी शामिल था।
खराब मौसम और मौत की ओर बढ़ता विलंब
रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मौसम पहले से ही बेहद खराब था। इसी कारण फ्लाइट अपने निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से शाम 6:15 बजे उड़ान भर सकी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह देरी यात्रियों को मंज़िल तक पहुंचाने के बजाय मौत के बेहद करीब ले जा रही है।
यह उड़ान एक करीब 35 साल पुराने तीन-इंजन वाले बोइंग 727 विमान से संचालित की जा रही थी, जिसे वर्ष 1974 में ईरान एयर के बेड़े में शामिल किया गया था।
कभी जब्त, कभी कबाड़ – रहस्यमयी इतिहास वाला विमान
इस विमान का अतीत भी कम दिलचस्प नहीं था। 1984 से 1990 के बीच यह विमान इराक के बगदाद में जब्त रहा। इसके बाद 1991 से 2002 तक यह किसी कबाड़ की तरह स्टोरेज में पड़ा रहा। वर्षों बाद ओवरहॉलिंग कर इसे फिर से सेवा में लाया गया, लेकिन 2011 की यह उड़ान उसके जीवन की आखिरी उड़ान साबित हुई।
हादसे के दिन विमान की कमान 50 वर्षीय कप्तान फेरेदून दादरस के हाथों में थी, जिनके पास लगभग 8000 घंटे का उड़ान अनुभव था। को-पायलट मोहम्मद रजा कारेहतापेह और फ्लाइट इंजीनियर मोर्तजा रस्तेगार भी अनुभवी थे।
रनवे दिखा नहीं, तो मौत आसमान से उतर आई
शाम लगभग 7 बजे विमान उर्मिया एयरपोर्ट के नजदीक पहुंचा, लेकिन हालात बेहद खराब थे। 1500 फीट ऊंचाई पर बादल, दृश्यता केवल 800 मीटर तक सीमित और भारी बर्फबारी के कारण रनवे दिखाई नहीं दे रहा था। कई बार प्रयास के बावजूद पायलट लैंडिंग नहीं कर सके और अंततः गो-अराउंड का निर्णय लिया गया।
विमान को दोबारा 8800 फीट की ऊंचाई की ओर मोड़ा गया – और यहीं से तबाही की शुरुआत हुई।
आइसिंग ज़ोन में घुसते ही जवाब दे गए इंजन
जैसे ही विमान ऊंचाई की ओर बढ़ा, वह खतरनाक सीवियर आइसिंग जोन में प्रवेश कर गया। पंखों और इंजनों पर बर्फ जमने लगी, हवा का बहाव बिगड़ गया और विमान 41 डिग्री तक झुक गया। कॉकपिट में स्टिक शेकर्स चेतावनी देने लगे कि विमान स्टॉल के बेहद करीब है।
कुछ ही पलों में इंजन नंबर 1 और 3 की शक्ति तेजी से गिरने लगी, और जल्द ही दोनों इंजन पूरी तरह फेल हो गए। इंजनों को री-स्टार्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन जम चुकी बर्फ और मौसम ने किसी भी प्रयास को बेकार कर दिया।
आसमान से आग का गोला गिरा, धरती कांप उठी
विमान तेजी से नीचे गिरता गया। ऊंचाई 4400 फीट से घटकर महज़ 100 फीट रह गई। गति 112 नॉट्स से घटकर 69 नॉट्स पर पहुंच गई — और फिर सब कुछ खत्म हो गया।
बोइंग 727 ज़मीन से टकराया और तेज धमाके के साथ कई हिस्सों में बिखर गया। चारों तरफ जलता हुआ मलबा और दिल दहला देने वाली चीख-पुकार गूंज उठी।
78 मौतें, 27 ज़िंदगियां और बर्फ से लड़ती रेस्क्यू टीमें
विमान में कुल 105 लोग सवार थे। राहत-बचाव के लिए 36 एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमें भेजी गईं, लेकिन 70 सेंटीमीटर मोटी बर्फ, अंधेरा और भयंकर ठंड ने उनके काम को बेहद कठिन बना दिया।
इस दुर्घटना में 78 लोगों की जान चली गई, जबकि 27 यात्री गंभीर चोटों के बावजूद बचा लिए गए। अधिकांश को गर्दन और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं।
अगले दिन कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर बरामद कर जांच के लिए तेहरान भेजे गए।
2017 में आई अंतिम जांच रिपोर्ट में हादसे का कारण आइसिंग कंडीशन और क्रू द्वारा इंजन पावर के गलत प्रबंधन को बताया गया।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



