Border 2: फिल्म ‘बॉर्डर 2’ भारत-पाकिस्तान के बीच हुए ऐतिहासिक 1971 के युद्ध की वीरता और भावनाओं को खूबसूरती से पेश करती है..
30 साल का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ! साल 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉर्डर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। जेपी दत्ता की कालजयी फिल्म ‘बॉर्डर’ ने जो देशभक्ति का जज्बा पैदा किया था, निर्देशक अनुराग सिंह ने उसे इस सीक्वल में पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाया है।
कहानी और किरदार: नया जोश और पुराना जज्बा
फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
फर्स्ट हाफ (भावनात्मक जुड़ाव): फिल्म का पहला हिस्सा हीरों के परिचय और उनके निजी जीवन पर केंद्रित है। वरुण धवन (होशियार सिंह दहिया), दिलजीत दोसांझ (निर्मलजीत सिंह सेखों) और अहान शेट्टी (एम.एस. रावत) की तिकड़ी ने अपनी दोस्ती और मस्ती से दिल जीत लिया है।
ट्रेनिंग ऑफिसर फतेह सिंह कलेर: सनी देओल एक बार फिर अपने ‘ढाई किलो के हाथ’ और कड़क आवाज के साथ परदे पर छा गए हैं। वे इन तीनों यंग एक्टर्स के ट्रेनिंग ऑफिसर के रूप में फिल्म की रीढ़ की हड्डी हैं।
इमोशन्स की जीत: कहानी युद्ध की नहीं, योद्धाओं की है
‘बॉर्डर 2’ की सबसे बड़ी ताकत इसका इमोशनल ड्रामा है। फिल्म दिखाती है कि एक फौजी जब सरहद पर खड़ा होता है, तो वह किन भावनाओं और रिश्तों की दौलत को दांव पर लगाता है। फिल्म के गाने और शादी वाले सीन दर्शकों को किरदारों से गहराई से जोड़ते हैं, जिससे युद्ध के दौरान उनकी जान का जोखिम और भी ज्यादा महसूस होता है।
सेकंड हाफ: युद्ध के मैदान से वीरता की गाथा
इंटरवल के बाद फिल्म ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ के साथ युद्ध के असली मैदान में उतरती है।
स्मार्ट निर्देशन: निर्देशक अनुराग सिंह ने 1971 की चार प्रमुख लड़ाइयों को कहानी में पिरोया है।
एक्शन और VFX: हालांकि फिल्म के ग्राफिक्स और VFX थोड़े कमजोर लग सकते हैं, लेकिन इसकी भरपाई टाइट फ्रेम एक्शन और जबरदस्त एक्टिंग से हो जाती है। वरुण धवन और सनी देओल के एक्शन सीन्स रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।
संगीत: फिल्म का क्लाइमेक्स और गाना ‘मिट्टी के बेटे’ आपकी आंखों को नम कर देगा।
क्या यह ‘बॉर्डर’ का सही सीक्वल है?
जी हाँ, ‘बॉर्डर 2’ पूरी तरह से अपने नाम के साथ न्याय करती है। यह सिर्फ एक युद्ध फिल्म नहीं है, बल्कि यह उन फौजियों की कहानी है जिनकी जिंदगी जंग के मैदान में हमेशा के लिए बदल जाती है। सनी देओल का जोश आज भी बरकरार है और यंग ब्रिगेड ने भी अपना शत-प्रतिशत दिया है।
(त्रिपाठी पारिजात)



