Budget 2026 -27: देशवासियों को हंस की तरह मोती चुगना सीखना होगा – राष्ट्र को ध्यान में रख कर बजट की दिशा समझनी होगी- और तब बजट से किसी को कोई शिकायत न होगी..
आज देश के बजट के विवेचन के समय भारत के राष्ट्रवादी नागरिकों की अपनेआप से अपेक्षा यही होनी चाहिये कि हम सब सकारात्मक सोच के साथ देश और देश के विषयों का अवलोकन करेंगे -आज भी और आज के बाद भी. आज का सबसे अहम विषय है देश का बजट अर्थात इस वर्ष का भारतीय बजट. यही बजट देश की विकास यात्रा में ईंधन का कार्य करेगा और देश को दुनिया के तथाकथित अगड़े राष्ट्रों के साथ खड़ा करेगा.
पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-विदेश में रह कर बहुत कुछ सीखने को मिला है और मेरी सीखने की यह यात्रा निरंतर गतिमान है. पत्रकारिता करते हुए भारत में राजनीति से राष्ट्रनीति की दिशा में बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ है. भारत के भीतर पिछले डेढ़ दशकों से एक पत्रकार में मनसा वाचा कर्मणा मेरे चिन्तन व लेखन कार्यों की भूमिका में राष्ट्र सदैव अस्तित्वमान रहा है. आज मैं पत्रकारिता के एक प्रतिनिधि के रूप में नहीं अपितु आपकी तरह इस देश के बौद्धिक रूप से प्रखर नागरिकों का एक प्रतिनिधि बन कर बजट की बात रखने आपके सामने हूं.
वित्तमंत्री माननीया निर्मला सीतारमन द्वारा प्रस्तुत इस वर्ष का बजट वास्तव में ऐतिहासिक है. पिछले बारह वर्षों से हमारी राष्ट्रवादी सरकार प्रतिवर्ष बजट के माध्यम से समाज की हित-चिन्तना कर रही है और समाज के हर वर्ग, हर पक्ष, हर इकाई को ध्यान में रख कर वित्त-प्रबन्धन का कार्य करती आ रही है. इस अनुभव ने हमें निरंतर कुछ न कुछ सिखाया है और हर आगामी वर्ष पिछले वर्ष से कुछ सीख कर आया है. आदर्श विचारों की काल्पनिक दुनिया से कठोर धरातल वाली व्यवहार की दुनिया में उतरना आसान नहीं होता किन्तु हमारा यही प्रयत्न रहा है कि कल्पना का सुन्दर लोक यथार्थ के दुष्कर चित्र में अधिक से अधिक रंग भर सके. हर वर्ष हमने बजट बनाने के पूर्व पिछले बजट को सामने रखा है उसका विश्लेषण किया है, उसके हानि-लाभ वाले परिणामों से सीख हासिल करके इस वर्ष के लिये और अधिक सार्थक और व्यावहारिक बजट बनाने का प्रयास किया है.
बन्धुओं, बजट बनाना सरल नहीं होता और एक अच्छा बजट बनाना तो और भी दुष्कर होता है परन्तु प्रयास, परिश्रम और प्रेरणा से हम हर बार अपने वान्छित वित्त-प्रबन्धन का वर्ष भर का ढांचा तेयार कर पाते हैं जिसमें ऊर्जापूर्ण प्रयास, अहर्निश परिश्रम और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा हमारा मार्गदर्शन करती है, वैसे भी मैं और आप, हम सभी अपने घर का बजट प्रतिमाह बनाते हैं जिसमें आवश्यकता को ध्यान में रख कर प्रत्येक कार्य में, प्रत्येक मद में नपी-तुली राशि का आवन्टन करते हैं और प्रयास ये भी करते हैं कि कुछ राशि बचा भी सकें जो आगे किसी अनिवार्य आवश्यकता में काम आ सके.
इस तरह एक छोटे स्तर के बजट के निर्माण में हमें अपनी बुद्धि और कौशल का पूरा उपयोग करना होता है जिसमें हमें पिछली बार के बजट का अनुभव भी मार्गदर्शन करता है. फिर भी प्रायः ऐसा हो जाता है कि कुछ कम-ज्यादा हो जाता है कुछ ऊंच-नीच का सामना करना पड़ता है, और इससे मिली सीख आगामी बजट में हमारी सहायता करती है. ये तो एक इकाई का बजट होता है याने एक घर का बजट – वहीं जब हम डेढ़ सौ करोड़ घरों का बजट बनाते हैं याने देश का बजट बनाते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि कितनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है.
देश के बजट का एक पहलू ये भी है कि हमें हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर विभाग को ध्यान में रखना होता है ऐसे में सबको प्रसन्नता मिले, सबकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके -इसका अधिकतम प्रयास रहता है. कहां कितनी आवश्यकता है, किसके लिये कितना धन आवंटित करना है, कहाँ कम पैसा खर्च करना है -इसका विश्लेषण करना अत्यंत जटिल और परिश्रमपूर्ण कार्य होता है. इतना ही नहीं, हमें टैक्स के माध्यम से आप सभी के द्वारा प्रदान किये राष्ट्रीय धन को विदेशी ऋण चुकाने के लिये भी इस्तेमाल में लाना होता है और देश भर में चल रहे विकास के कार्यो को आगे बढ़ाने के लिये भी पैसा देना होता है साथ ही राष्ट्र की सुरक्षा एवं संप्रभुता की रक्षा को ध्यान में रख कर सैन्य बजट में भी कोई कमी नहीं आने देनी होती है – इस तरह प्रतिवर्ष फरवरी माह की पहली तारीख को आने वाला यह बजट हमारे लिये न केवल चुनौतीपूर्ण होता है, अपितु हमारे अपने बौद्धिक चातुर्य की परीक्षा भी होता है, जिसमें हमें राष्ट्र की सेवा सुरक्षा और समस्याओं के समाधान का ध्यान भी रखना होता है.
यहाँ एक बात बिलकुल स्पष्ट है, जिस पर हममें से कोई भी असहमत नहीं हो सकता कि सबको समान रूप से खुश करना लगभग असंभव जैसा होता है – और हर बार बजट में यही पक्ष सबसे महत्वपूर्ण होता है कि लोग इसको लेकर कितने संतुष्ट हैं, और हम अपने देशवासियों को संतुष्टि प्रदान करने में कितने सफल हो सके. यही लोक-तुष्टि की हमारी चिन्ता राष्ट्रीय बजट निर्माण के दौरान हमारा मार्गदर्शन करती है.
आइये, थोड़ा समझने का प्रयास करते हैं कि हम अपने प्रयास में इस बार कितना लोक-हित का ध्यान रख पाये, किसको कितना दे पाये और अपने प्रयास में कितना सफल हो पाये.
वर्ष 2026-27 के इस बजट में सबसे पहले यह समझ लीजिये कि देश के हर नागरिक को उपहार दिया गया है – सीधे तौर पर भी और प्रकारान्तर से भी. देश के बजट की जिन महत्वपूर्ण आवन्टनों से हम सबके घर के बजट को प्रसन्नता मिलती है, वो तो वहां है ही उसके अतिरिक्त देश के हित में भी जो आवन्टन हुआ है, वह भी सीधे न सही प्रकारान्तर से देश के हर नागरिक के हित में ही है.
सर्वप्रथम बताना चाहूंगा कि क्या-क्या सस्ता हुआ है जो सीधे-सीधे देश के हर भाई की जेब को राहत देगा. जीवन के लिये सबसे महत्वपूर्ण होता है स्वास्थ्य, ये हम जानते हैं. इस बजट में सरकार ने स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर दो तरह की दवाइयों को सस्ता किया है. देश में औसतन हर नौवां-दसवाँ नागरिक शुगर का पेशेन्ट है. ऐसे में शुगर की दवाइयों के लिये अब आपको कम भुगतान करना होगा जो कि आपके आर्थिक स्वास्थ्य के लिये भी लाभप्रद है. देश और दुनिया में कैन्सर नामक बीमारी डरावनी मानी जाती है जिसमें मरीज को उपचार के लिये भी काफी खर्चा करना पड़ता है. देशवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर स्वास्थ्य की दिशा में जो दूसरा शुभ समाचार देश के नागरिकों को मिला है, वह कैन्सर की दवाइयों पर आने वाले व्यय को कम करता है.
कैन्सर के उपचार में प्रयुक्त होने वाली 17 महत्वपूर्ण दवाओं (जैसे रिबोसीक्लिब, एबमैसीक्लिब, वेनेटोक्लैक्स, आदि) पर भी कस्टम ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई हैं. इस तरह शुगर और कैन्सर के मरीजों का आर्थिक दबाव कम किया गया है. इस कदम से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो इन महंगी जीवन रक्षक दवाओं के लिए लाखों रुपये खर्च करते थे. स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए दूसरी बड़ी घोषणाओं में ये भी है कि अब सात नई दुर्लभ बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं पर से कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई है और रोगियों को प्रदान किया जाने वाला विशेष भोजन भी अब आधारभूत सीमा शुल्क से मुक्त हो गया है. इस छूट के बाद अब इन बीमारियों का इलाज सस्ता हो जाएगा.
सरकार ने देश के नागरिकों के लिये 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाइयां भी सस्ती की गई हैं. इनमें पहली बीमारी है कंजनाइटल हाइपरइन्सु-लिनिमिक हाइपोग्लाइ-सीमिया, जिसमें शरीर में इंसुलिन का स्तर बहुत अधिक हो जाता है और फिर उस कारण शुगर लेवल खतरनाक रूप से गिर जाता है. दूसरी बीमारी है फैमिलियल होमोजिगस हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया – यह वह जेनेटिक स्थिति है जिसमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. तीसरी बीमारी है अल्फा मैनोसिडोसिस नामकी जो हमारी कोशिकाओं में शुगर के अणुओं को तोड़ने की क्षमता को प्रभावित करता है. चौथी बीमारी है प्राइमरी हाइपरऑक्सालुरिया जिसके कारण किडनी में स्टोन और डैमेज होने का खतरा रहता है. पांचवीं सिस्टिनोसिस एक ऐसी बीमारी है जो शरीर की कोशिकाओं में सिस्टीन नामक अमीनो एसिड जमा कर देती है. छठी हेरेडिटरी एंजियोएडेमा नामक बीमारी में शरीर के विभिन्न अंगों में अचानक गंभीर सूजन आ जाती है और इसी तरह सातवीं दुर्लभ बीमारी है प्राइमरी इम्यून डेफिशिएंसी डिसऑर्डर. इस रोग में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता याने हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. जिस मरीज पर इस तरह के दुर्लभ रोग आक्रमण करते हैं उनको इसकी जानकारी जब डॉक्टर देते हैं तो जैसे उन पर वज्रपात सा होता है -लगता है अब प्राण नहीं बचेंगे. पर चिन्ता न करें, इनकी दवाइयाँ उपलब्ध हैं, आपको कुछ नहीं होगा..और अब तो सरकार ने इन दवाइयों को सस्ता भी कर दिया है.
बजट की अन्य मुख्य स्वास्थ्य घोषणाओं पर भी ध्यान दीजिये. सरकार ने आयात के क्षेत्र में भी आपकी आवश्यकता को महत्व दिया है. आपके व्यक्तिगत आयात पर राहत प्रदान की गई है. यदि कोई मरीज अपने निजी उपयोग हेतु इन बीमारियों की दवाएं बाहर से मंगवाता है, तो उसे अब कोई टैक्स नहीं देना होगा.
आगे बढ़ते हैं तो दैनंदिन जीवन की एक बड़ी आवश्यकता है बिजली. बिजली के खर्च का भार भी आपके लिये कम करने की कोशिश की गई है, इसके लिये सोलर एनर्जी से जुड़ी चीजें सस्ती की गई हैं. सोलर पैनल लगाइये, बिजली के खर्च से सदा के लिये मुक्त हो जाइये. आप चल सकें और ज्यादा से ज्यादा चल सकें इसके लिये जहाँ एक तरफ जूते सस्ते किये गये हैं, वहीं बैट्री को भी सस्ता कर दिया गया है. हमारे किचन के काम के लिये माइक्रोवेव ओवन भी अब आसानी से खरीदा जा सकेगा. ओवन भी सस्ता हो गया है.
मध्यम वर्ग को ध्यान में रख कर बजट में प्रावधान किये गये हैं. देश की सरकार ने मध्यम वर्ग की ईमानदारी का सम्मान किया है. नई कर व्यवस्था के अंतर्गत टैक्स स्लैब का सरलीकरण किया गया है साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोत्तरी भी की गई है ताकि सीधे तौर पर आम आदमी की जेब में अधिक पैसा छोड़ा जा सके.
आपको यह बताते हुए मुझे प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है कि डिजिटल इंडिया और पेपरलेस गवर्नेंस ने भ्रष्टाचार का अंत किया है. आज देश के सामान्य नागरिकों को सरकारी सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते. अतिरिक्त पैसा, परिश्रम और प्रयास तीनों की बचत होती है.
यदि आप ग्राम निवासी हैं और यदि आप कृषिकार्य करते हैं तो जान लीजिये, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी पुष्ट करने की कोशिश की है हमारी सरकार ने. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत 6 करोड़ किसानों का डेटा ‘डिजिटल कृषि मिशन’ से जुड़ना निश्चित ही एक क्रांतिकारी कदम है. इससे लाभ ये होगा कि अब खाद, बीज और ऋण की सुविधा सीधे आपके मोबाइल पर उपलब्ध हुई है.
प्राकृतिक खेती की दिशा में जो सरकार ने कदम उठाये हैं, उनमें 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है. इस तरह न केवल हम अपनी धरती माँ को बचा सकेंगे अपितु किसानों की लागत भी कम करने के साथ उनकी आय को भी बढ़ाने का प्रयास किया गया है. भंडारण की बात करें तो विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना अब हमारे देश की है जिसके कारण अब छोटे किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकेंगे और सही दाम मिलने पर उसको बेचने में सफल हो पायेंगे.
कहा जा रहा है कि यह बजट ऐतिहासिक है..सत्य है यह कथन इस दृष्टि से भी सत्य है कि भारत युवाओं का देश है और यह बजट देश के युवाओं का बजट है. इसमें युवा, कौशल और रोजगार का पूरा ध्यान रखा गया है. इसमें यदि इंटर्नशिप योजना की बात कीजिये तो देश की टॉप 500 कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप की व्यवस्था प्रदान की गई है. और साथ ही पांच हजार रुपये हर महीने उनको भत्ता भी दिया जायेगा. इस तरह यह योजना ‘लर्निंग विद अर्निंग’ का सुन्दर उदाहरण है. युवाओं के लिये आसान और उत्तम ऋण की व्यवस्था भी की गई है. इस मुद्रा लोन की सीमा को अब 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है. यह कदम हमारे उभरते हुए उद्यमियों के पंखों को उड़ान देने वाला कदम है. आज भारत में स्टार्ट-अप का बहुरंगी मौसम उभर कर सामने आया है. देश के नव-उद्यमियों के लिये सरकार का संदेश है कि महत्वाकांक्षा की इस यात्रा में तुम अकेले नहीं हो, हम तुम्हारे साथ हैं. देश की सरकार ने एंजेल टैक्स को पूरी तरह समाप्त करके इस वायदे को निभाया है और इस तरह भारत को दुनिया का स्टार्टअप कैपिटल बना दिया है.
यहाँ यह बताना आवश्यक हो जाता है कि सरकार राजकोषीय अनुशासन के प्रति पूरी तरह सावधान है. मान लीजिये कोई सही सोच में भी कुछ गलत ढूंढने की सोच का मारा हुआ हो तो उसका प्रश्न हो सकता है कि आप तो केवल खर्च कर रहे हैं, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि हमने राजकोषीय घाटे अर्थात फिस्कल डेफिसिट को साढ़े चार प्रतिशत से नीचे लाकर वित्तीय अनुशासन का सावधानी से पालन किया है.
प्रसन्नता होती है इस बजट के प्रथम व अंतिम संदेश को सामने रखते हुए कि यह बजट आत्मनिर्भरता का उत्सव है. अतिशयोक्ति न मानें अपितु समझने का प्रयास करें. यह बजट उस माँ का है जिसे उज्ज्वला से धुआं-मुक्त रसोई मिली है. यह बजट उस युवा का भी है जिसके पास आज स्टार्ट-अप का सपना है, और यह बजट उस किसान का भी है जिसे पीएम-किसान योजना का सीधा लाभ मिल रहा है..मैं तो ये भी कहूंगा कि यह बजट उस रक्षा प्रहरी का भी है जो कड़कती सर्दी में आज देश की सीमा पर बंदूक ताने खड़ा है. यही वो राष्ट्रप्रहरी है जो दुश्मन और देश के बीच खड़ा है और ये वही प्रहरी है जो जरूरत आने पर दुश्मन के सीने पर चढ़ा है.
जरा सोचिये, हमारे घटिया दुश्मन पाकिस्तान का पूरा बजट होता है 63 बिलियन डॉलर..दूसरी तरफ हमारे भारत का इस बार केवल बम बंदूक का, यानि रक्षा बजट ही उससे ज्यादा है – 85 बिलियन डॉलर का.
देश के बजट के इन सारे प्रावधानों और विशेषताओं पर दृष्टि डालिये तो सरकार का मन्तव्य आपके सामने पूर्णतया सुस्पष्ट हो जाता है और तब प्रत्येक राष्ट्रवादी नागरिक के लिये इस लोक-कल्याणकारी बजट का पुरजोर समर्थन करना महत्वपूर्ण हो जाता है.
दूसरे शब्दों में समझा कर कहूं तो मुझे लगता है कि 2026 का बजट विकसित भारत की नींव रखने वाला बजट है. इस दृष्टिकोण से हम इसे विस्तार से और आसानी से पूरी तरह समझ सकें इस हेतु इसे कुछ प्रमुख स्तंभों में विभाजित करना होगा.
जैसे, आप इसे युवा शक्ति का बजट भी कह सकते है. भावरूप में यह बजट नए भारत का संकल्प है. इस बजट की दूरदर्शिता देखिये, यह बजट केवल अगले एक साल का लेखा-जोखा नहीं है, अपितु यह 2047 के विकसित भारत’ का एक ठोस ब्लूप्रिंट है जब हम भारत राष्ट्र की स्वतंत्रता के सौवें साल में होंगे.
हम इस तथ्य के दुनियावी आयाम अर्थात वैश्विक संदर्भ की दिशा में देखें तो कहना ही होगा कि भारत आज दुनिया के लिये ब्राइट स्पॉट है. आज जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष करती दिखाई दे रही हैं, भारत सात प्रतिशत से अधिक की विकास दर को बनाये हुए है.
सर्वविदित है कि ग्यान जीवन में हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन करता है तो लीजिये यह बजट भी ग्यान बन कर देश का मार्गदर्शन कर रहा है. इस ग्यान याने जीवाईएएन का सीधा अर्थ है -गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी. देश का यह बजट समाज के इन चार स्तंभों के सशक्तिकरण को समर्पित है.
अब देश के बुनियादी ढांचे और पूंजीगत व्यय की बात कर लीजिये. यहां कैपेक्स की बात करनी होगी याने सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. जब हम 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव सीमेंट, स्टील और लेबर मार्केट पर पड़ता है, जिससे देश के नौजवानों के लिये रोजगार पैदा होता है. फिस्कल डेफिसिट को कम करने, महंगाई को कंट्रोल में लाने पर फोकस किया गया है. इसके साथ ही अच्छी बात ये भी है कि इस बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का कॉम्बिनेशन भी रखा गया है.
अब लॉजिस्टिक्स की दिशा में चलते हैं. गति शक्ति योजना के अंतर्गत लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को 14 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है जिसके उपरांत हमारे व्यापारी ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बन कर तन कर खड़ा हो पाएगा.
अब देश के रेलवे ट्रैक पर आजाते हैं. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों और 500 नए अमृत भारत स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है ताकि हमारे मध्यम वर्ग के सफर को और भी सम्मानजनक बनाया जा सके.
देखिये, हमें यह समझना होगा कि काम बहुत हैं, कामों की कोई कमी नहीं है. यहाँ बुद्धिमानी यही होगी कि हमे प्राथमिकता बना कर इनका निपटान करें. इसलिये देश के कार्यों और जिम्मेदारियों की अति-लंबी कार्यसूचि में पहले जिन कार्यो की आवश्यकता अधिक है, उनको प्राथमिकता मिल रही है. उनके अलावा भी बहुत दिशाओं में बहुत से कार्य किये जा रहे हैं. इसी बजट के माध्यम से देश की सरकार मिस्ड कॉल पर गैस सिलेंडर दे रही है, डीजी लॉकर, जन औषधि केन्द्र और आयुष्मान कार्ड चला रही है, आपके द्वारा दिये गये इन्हीं पैसों से श्री राम मंदिर निर्माण कर रही है, विश्वनाथ कॉरिडोर और केदारनाथ का पुनर्निर्माण चल रहा है, चिनाब ब्रिज, जम्मू की सुरंग बनाई जा रही है, गंगा एक्सप्रेस-वे और काशी कॉरिडोर जैसी बहुत सी बड़ी योजनाओं पर काम किया जा रहै है..इतना ही नहीं, देश भर में सरकार हाईवे का जाल बिछा रही है.
यदि संक्षेप में बिन्दुवत कहा जाये तो अपने बजट की बड़ी घोषणाओं को इस तरह समझिये – अब देश में सात बड़े हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेंगे, डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाए जायेंगे. बड़े टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे, देश के 4 राज्यों में खनिज कॉरिडोर बनेंगे, 3 केमिकल पार्क का निर्माण किया जायेगा, 20 नए जल मार्ग बनाने की तैयारी चल रही है, शहरी आर्थिक क्षेत्र को प्रगतिमान करने के लिये प्रति वर्ष 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे, बायो फार्मा सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ व्यय किये जायेंगे, एमएसएमई के लिए 10 हजार करोड़ लगाये जायेंगे. शुगर कैंसर की दवाएं सस्ती की जायेंगी और महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना भी प्रारंभ की जायेगी.
देश की सरकार पिछले बारह वर्षों से देश में बजट के इन्जन से सुनियोजित विकास के ट्रैक पर एक रिफॉर्म एक्सप्रेस चला रही है. रिफॉर्म एक्सप्रेस अब इस बार हमारे बजट को बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता प्रदान करने की दिशा में लेकर गतिमान हुई है.
आर्थिक मोर्चे पर देश की सफलता अपनी कहानी स्वयं कहती है. पिछले बारह वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था दसवें स्थान से चौथे स्थान पर आ गई है. हमारी GDP 2 ट्रिलियन से लेकर 4.3 ट्रिलियन की हो गई है. सुखद आश्चर्य आपको यह जानकर भी होगा कि ग्लोबल GDP ग्रोथ का 43 प्रतिशत सिर्फ भारत और चीन – इन दोनों देशों की इकोनॉमी से आता है.
इस गहन विषय पर कम समय में अधिक कहना तो गागर में सागर भरने जैसा है. फिर भी संक्षेप में कहूंगा कि हमारी सरकार ने बजट में आगामी पांच वर्षों के लिए दस हजार करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ बायोफार्मा ‘शक्ति’ का प्रस्ताव भी पेश किया है. रोजगार के क्षेत्र में मनरेगा और ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) में कुल 95 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है.
इतना ही नहीं, नौकरियों और लोकल ग्रोथ के लिए टूरिज्म पर फोकस करने का विचार किया गया है. नये इनकम टैक्स की नीति में दंड हटाकर टैक्स का प्रावधान है याने कि आप टैक्स देकर छूट सकते हैं. साथ ही अघोषित आय एक करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी है. लखपति दीदी कार्यक्रम का विस्तार किया जायेगा जिसके माध्यम से सरकार महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से एंटरप्राइज मालिक बनने में मदद करेगी.
अंत में कहूंगा चाहे वह हमारे घर का बजट हो या देश का बजट -पैसा सीमित होता है और आवश्यकताएं असीमित. ऐसे में हमें और हमारे देश को दोनो तरफ देखना होगा -घर भी देखना है और राष्ट्र भी. जब यह बात हम सबकी समझ में आ जाती है तो हमारी दृष्टि सकारात्मक और आशावादी हो जाती है..और सच कहूं तो रास्ता भी बस यही है.
वन्दे मातरम वन्दे भारत राष्ट्रम जयतु भारतम्
(त्रिपाठी पारिजात)



