Wednesday, February 4, 2026
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Bull Carts Back: ट्रैक्टर जायेंगे अब बैल वापस आयेंगे खेतों में

Bull Carts Back: बैल आधारित खेती को बढ़ावा: राज्य सरकार देगी 30,000 रुपये की सहायता, पारंपरिक कृषि और गोवंश संरक्षण को मिलेगा नया सहारा

Bull Carts Back: बैल आधारित खेती को बढ़ावा: राज्य सरकार देगी 30,000 रुपये की सहायता, पारंपरिक कृषि और गोवंश संरक्षण को मिलेगा नया सहारा

राज्य सरकार ने पारंपरिक खेती, जैविक कृषि और गोवंश संरक्षण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30,000 रुपये का अनुदान देने की घोषणा की है। यह अनुदान राज्य के ग्रीन बजट घोषणा के अंतर्गत दिया जाएगा, जिसका मकसद है– ग्रामीण क्षेत्रों में बैलों से जुताई की परंपरा को पुनर्जीवित करना, पर्यावरण का संरक्षण करना और किसानों की लागत कम करना।

राजसमंद जिले में शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया

राजसमंद जिले में इस योजना को लागू करते हुए अधिकारियों ने बताया कि बैल पालने और बैलों से खेती करने वाले किसान अब इस अनुदान के लिए ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

सहायक कृषि अधिकारी, भीम—कमलेश यादव ने जानकारी दी कि पंचायत समिति भीम की कुल 27 पंचायतों में इस योजना के लिए 32 किसानों का भौतिक आवंटन प्राप्त हुआ है।

जिन किसानों के पास बैलों की जोड़ी मौजूद है और वे खेतों की जुताई इन्हीं बैलों के माध्यम से करते हैं, वे 25 सितंबर 2025 तक अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

लॉटरी से किसानों का चयन

इसके अगले दिन अर्थात 26 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत स्तर पर लॉटरी प्रणाली के माध्यम से पात्र किसानों का चयन किया जाएगा। इस लॉटरी प्रक्रिया में—

पंचायत प्रशासक

कृषि पर्यवेक्षक

ग्राम विकास अधिकारी

पटवारी

सभी मौजूद रहेंगे ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो।

योजना के लिए पात्रता शर्तें (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी:

किसान के पास कम से कम एक जोड़ी (दो बैल) होना अनिवार्य है।

किसान के नाम खेती योग्य भूमि का स्वामित्व होना चाहिए।

तहसीलदार द्वारा जारी लघु/सीमान्त किसान प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।

बैलों का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए।

किसान के आधार कार्ड और जन आधार कार्ड की प्रति आवश्यक है।

जन आधार से लिंक बैंक खाते की प्रति जमा करनी होगी।

100 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र जमा करना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें? (Application Process)

किसानों को अपने नजदीकी कृषि कार्यालय में जाकर आवेदन करना होगा।
आवेदन करते समय किसान को निम्न विवरण भरने होंगे:

नाम

आधार नंबर

जन आधार नंबर

मोबाइल नंबर

कृषक श्रेणी (लघु/सीमान्त/अन्य)

बैलों की जानकारी और खेती का विवरण

चयनित किसानों को 30,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खाते में सीधे भेज दी जाएगी।

योजना की प्रमुख विशेषताएँ (Key Highlights of the Scheme)

 छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारा

यह योजना छोटे किसानों के लिए किसी राहत पैकेज से कम नहीं है। ट्रैक्टर और मशीनरी के बढ़ते दामों के बीच बैलों से खेती करने पर होने वाला खर्च बेहद कम है। अनुदान से किसानों को सीधी आर्थिक मजबूती मिलेगी।

 पारंपरिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन

आधुनिक मशीनरी के अधिक उपयोग से बैलों की संख्या तेजी से घट रही है। यह योजना किसानों को पारंपरिक पद्धतियों और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी, जो भूमि की उर्वरता और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक है।

गोपालन और पशुपालन को बढ़ावा

अक्सर किसान नर बछड़ों को बेकार समझकर छोड़ देते हैं, जिससे गोवंश संरक्षण पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह योजना इन बछड़ों को बैल बनाकर खेती में उपयोग करने को प्रोत्साहित करेगी, जिससे गोपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत होंगे।

पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान

बैलों से जुताई करने पर डीज़ल की आवश्यकता नहीं रहती, जिससे

प्रदूषण घटता है,

डीजल खर्च की बचत होती है,

और खेती अधिक टिकाऊ बनती है।

साथ ही बैलों की जुताई जमीन को कम नुकसान पहुंचाती है और उसकी प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखती है।

गांवों में बैलों की वापसी

गांवों में बैलों की संख्या कम होने से खेती की पारंपरिक पहचान भी कमजोर हो रही थी। इस योजना के चलते बैलों की मांग बढ़ेगी और ग्रामीण जीवन में फिर से बैलों की अहम भूमिका देखने को मिलेगी।

(अर्चना शेरी)

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