Capital Dome: कर्तव्य पथ पर तैनाती से बदली राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा रणनीति, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने ड्रोन युद्ध में दिखाई निर्णायक बढ़त
भारत ने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत करते हुए कर्तव्य पथ पर एक अत्याधुनिक, स्वदेशी एंटी-ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है। इस रणनीतिक कदम के साथ ही भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देश अब ड्रोन आधारित युद्ध और हवाई आतंकवाद के हर संभावित खतरे के लिए पूरी तरह तैयार है। ‘कैपिटल डोम’ परियोजना के तहत किए गए इस कदम से पाकिस्तान में भारी बेचैनी देखी जा रही है और सीमापार हलचल तेज हो गई है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली सुरक्षा नीति
साल 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को पहली बार बड़े स्तर पर ड्रोन आधारित हमलों की वास्तविक चुनौती का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय एयर डिफेंस को पूरी तरह आधुनिक बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत देशभर में मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 2035 तक पूरे भारत को किसी भी प्रकार के हवाई हमले से सुरक्षित करना है। इस मिशन में लाखों करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।
कर्तव्य पथ पर तैनात हुआ ‘वज्र सेंटिनल’ सिस्टम
राजधानी की सुरक्षा के लिए चेन्नई स्थित रक्षा स्टार्ट-अप Big Bang Boom Solutions (BBBS) द्वारा विकसित ‘वज्र सेंटिनल एंटी-ड्रोन सिस्टम’ को तैनात किया गया है। यह सिस्टम आधुनिक AI आधारित सेंसर, पैसिव RF तकनीक और स्मार्ट जैमिंग सिस्टम से लैस है, जो DJI Mavic, Phantom जैसे कमर्शियल ड्रोन से लेकर उन्नत सैन्य ड्रोन तक को निष्क्रिय करने में सक्षम है।
इस प्रणाली की विश्वसनीयता 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिद्ध हो चुकी है, जब भारतीय सेना और वायुसेना ने इसके जरिए कई विदेशी ड्रोन खतरों को नाकाम किया था। सैनिकों द्वारा दिए गए फीडबैक में इसे विदेशी तकनीकों से भी अधिक प्रभावी बताया गया।
सेना की विशाल ड्रोन फोर्स की तैयारी
भविष्य के युद्धों की रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना अब एक समर्पित ड्रोन फोर्स का गठन कर रही है। हर कोर में 8,000 से 10,000 ड्रोन तैनात करने की योजना बनाई गई है। 2027 तक हर सैनिक को ड्रोन संचालन का मूल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए IMA देहरादून, OTA चेन्नई और गया, महू इन्फैंट्री स्कूल और देओलाली आर्टिलरी स्कूल सहित 19 सैन्य संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
सेना स्वदेशी हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है। नागास्त्र-1, D4, सक्षम, भार्गवास्त्र और DRDO के लेजर आधारित ड्रोन-रोधी सिस्टम को तेजी से शामिल किया जा रहा है।
पाकिस्तान में हड़कंप, सीमा पर बदली रणनीति
कैपिटल डोम परियोजना और भारतीय सेना की इन तैयारियों से पाकिस्तान में जबरदस्त घबराहट देखी जा रही है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान ने PoK के रावलाकोट, कोटली और भींबर क्षेत्रों में चीन निर्मित और स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात कर दिए हैं। ‘स्पाइडर’ और ‘सुफ्रा’ ड्रोन-जैमिंग सिस्टम को सीमा पर लगाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय ड्रोन क्षमताओं की सफलता ने पाकिस्तान को अपनी रक्षा रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे दक्षिण एशिया में ड्रोन-केंद्रित सैन्य संतुलन की नई तस्वीर उभर रही है।
आत्मनिर्भर भारत की ताकत
कर्तव्य पथ पर वज्र सेंटिनल की तैनाती यह दर्शाती है कि भारत अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी और राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा में भी स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत के तहत देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



