Chhattisgarh: पूजा के बाद फैला रैबीज के संक्रमण का डर, प्रशासन से मेडिकल इमरजेंसी की मांग..
सरगुजा जिले के सरगांवा गांव में एक धार्मिक अनुष्ठान के बाद ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जिसने पूरे क्षेत्र को भय और अनिश्चितता के साये में धकेल दिया है। गांव में आयोजित पारंपरिक ‘निकाली पूजा’ के दौरान बलि दिए गए बकरों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से एक बकरा कुछ दिन पहले एक ऐसे कुत्ते द्वारा काटा गया था जो बाद में रेबीज से संक्रमित पाया गया। इसके बावजूद उसे बलि में शामिल कर उसका मांस ग्रामीणों को परोस दिया गया।
400 से अधिक ग्रामीणों ने खाया मांस
ग्रामीणों के अनुसार, पूजा के दौरान कुल 13 बकरों की बलि दी गई थी, जिनमें से एक बकरा पहले कुत्ते के काटने का शिकार था। इस आयोजन में गांव के करीब 400 लोगों ने प्रसाद के रूप में वही मांस ग्रहण किया, जिसके बाद अब पूरे गांव में संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर डर का माहौल है।
सरपंच और उपसरपंच पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए गांव के सरपंच नारायण प्रसाद और उपसरपंच कृष्णा सिंह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि उन्होंने उसी महिला से यह बकरा खरीदा था जिसे पहले कुत्ते ने काटा था। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि बकरे को बचाने के लिए रेबीज की वैक्सीन लगवाने की बात सामने आई थी, लेकिन फिर भी उसे बलि में शामिल किया गया।
गांव में भय और सन्नाटा
इस सूचना के सार्वजनिक होते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। कई परिवारों ने अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने से रोक दिया है। लोगों के मन में लगातार यही सवाल घूम रहा है कि कहीं यह घटना किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण न बन जाए।
मेडिकल कैंप की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाया जाए, ताकि सभी प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच हो सके और एहतियातन रेबीज के टीके लगाए जा सकें।
डॉक्टर की राय
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सी. के. मिश्रा ने कहा कि यदि मांस को पूरी तरह से पकाकर खाया गया है तो रेबीज फैलने की संभावना काफी कम होती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एहतियात के तौर पर सभी ग्रामीणों की मेडिकल जांच अनिवार्य है।
ग्रामीणों के बयान
अजीत यादव ने कहा, “हमें तो बाद में पता चला कि बकरा कुत्ते के काटने वाला था, अब पूरा गांव डर के साये में है।” अमरजीत और अमृत हलदर ने भी तुरंत मेडिकल कैंप की मांग दोहराई। बकरे की मालकिन महिला ने बताया कि कुत्ते के काटने की जानकारी सरपंच को पहले से थी।
यह मामला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे गांव के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है, जिस पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जा रही है।
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)



