China की मोनोपोली वाले रेयर अर्थ मिनरल्स पर सऊदी की बड़ी घोषणा हो गई और उसके बाद से अमेरिका और चीन दोनों सकते में हैं..
दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था इस समय जिस चीज़ से सबसे अधिक प्रभावित हो रही है, वह है खनिज और रेयर अर्थ मिनरल्स। यही कारण है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। लेकिन इसी बीच खाड़ी देश सऊदी अरब ने ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसने चीन और अमेरिका दोनों को चौंका दिया है।
खनिजों पर चीन का दबदबा और ट्रंप की रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही खनिज और रेयर अर्थ वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को लेकर संभावित समझौते की बात कही, जिसमें रेयर अर्थ मिनरल्स के अधिकार शामिल हो सकते हैं। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सैन्य तकनीक के लिए बेहद अहम हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, चीन इस समय दुनिया के लगभग 90% रिफाइंड रेयर अर्थ और करीब 60% खनन उत्पादन पर नियंत्रण रखता है। दशकों की रणनीतिक नीतियों और निवेश के कारण चीन इस क्षेत्र में अमेरिका से काफी आगे निकल चुका है। यही वजह है कि अमेरिका लगातार विकल्प तलाश रहा है।
सऊदी अरब का ऐलान: धरती का खजाना खोला गया
सऊदी अरब ने घोषणा की है कि उसके पास लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के खनिज भंडार मौजूद हैं। इनमें सोना, जिंक, तांबा, लिथियम और रेयर अर्थ शामिल हैं। ये सभी खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा, कंप्यूटर और हाई-टेक उपकरणों के लिए जरूरी हैं।
2021 से 2025 के बीच सऊदी अरब ने खनिज खोज पर अपने बजट में लगभग 595% की बढ़ोतरी की है। साथ ही घरेलू और विदेशी कंपनियों को नए खनन लाइसेंस देने की प्रक्रिया भी तेज हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि खनन और प्रोसेसिंग लंबी प्रक्रिया है, जिसमें किसी प्लांट को तैयार होने में 3 से 5 साल और कई बार 20 साल तक का समय लग सकता है।
विजन 2030 और सऊदी की रणनीति
सऊदी सरकार टैक्स छूट, आसान नियम और बड़े निवेश के जरिए खनिज क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। हाल ही में आयोजित फ्यूचर मिनरल्स फोरम में सरकारी खनन कंपनी मादेन (Maaden) ने अगले 10 वर्षों में 110 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की। यह निवेश अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और ग्लोबल टैलेंट को साथ लेकर किया जाएगा।
सऊदी की ‘विजन 2030’ योजना में खनन को अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ बनाया गया है। लक्ष्य सिर्फ खनिज निकालना नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सऊदी अरब अन्य देशों से निकाले गए खनिजों को रिफाइन करने का बड़ा केंद्र भी बन सकता है।
चीन के लिए खतरे की घंटी, अमेरिका की दिलचस्पी
चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर सख्ती के बाद अमेरिका वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है। इसी क्रम में अमेरिकी कंपनी एमपी मटीरियल्स और अमेरिकी रक्षा विभाग सऊदी अरब में नई रिफाइनरी लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका ग्रीनलैंड में भी खनिजों और रेयर अर्थ की वजह से निवेश करना चाहता है, लेकिन वहां लाभ मिलने में वर्षों लग सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा, साथ ही अरामको जैसी कंपनी का अनुभव, सऊदी अरब को चीन के विकल्प के रूप में उभार सकता है। हालांकि पर्यावरणीय चुनौतियां और क्षेत्रीय अस्थिरता यहां भी बड़ी बाधा बन सकती हैं।
कुल मिला कर कह सकते हैं कि
सऊदी अरब का यह कदम न केवल उसकी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी उसे एक नई ताकत के रूप में स्थापित कर सकता है। चीन की बादशाहत को चुनौती और अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में खनिज और रेयर अर्थ मिनरल्स अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को तय करेंगे।



