Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी मनाने के पीछे क्या कारण है? आखिर क्यों माँ पार्वती भगवान शिव पर कुपित हो गई थीं? पूरी कहानी जानिए..
भगवान शिव के गुस्से की वजह से ही गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिन के दिन ही गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। भारत के दक्षिणी राज्यों में, खासकर महाराष्ट्र में, इस दिन बहुत धूमधाम रहती है।
सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत महत्व है। इस बार यह त्योहार 27 अगस्त को है। यह पर्व महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन हर घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। उनकी पूजा की जाती है और उन्हें प्रसाद चढ़ाया जाता है।
भगवान गणेश को मोदक का प्रसाद बहुत पसंद है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह त्योहार क्यों मनाया जाता है? इसके पीछे की कहानी क्या है? आइए, हम आपको बताते हैं।
गणेश चतुर्थी मनाने के पीछे की कहानी
गणेश चतुर्थी मनाने के पीछे कई कथाएँ हैं, लेकिन सबसे मशहूर कहानी भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है।
कहानी कुछ यूँ है — एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उस समय भगवान शिव घर पर नहीं थे। तब माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन (मैल) से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी। उन्होंने इस बालक का नाम गणेश रखा और उसे दरवाजे पर पहरा देने के लिए कहा।
तभी भगवान शिव वापस आए और जैसे ही अंदर जाने लगे, गणेश ने उन्हें रोक दिया। गणेश, शिव जी को पहचान नहीं पाए। एक बालक द्वारा इस तरह रोके जाने पर भगवान शिव को गुस्सा आ गया और उन्होंने गणेश का सिर काट दिया।
जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आईं और उन्होंने गणेश का कटा हुआ सिर देखा, तो वे बहुत नाराज हो गईं।
भगवान गणेश एक आदर्श पुत्र हैं
माता पार्वती के गुस्से को देखकर भगवान शिव को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत अपने सेवकों (गणों) को आदेश दिया कि जो भी जीवित प्राणी सबसे पहले दिखे, उसका सिर काटकर ले आओ।
सेवक जब ढूँढने निकले, तो उन्हें सबसे पहले एक हाथी का बच्चा दिखाई दिया। उन्होंने उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर भगवान शिव के सामने पेश किया। भगवान शिव ने वह सिर गणेश के धड़ पर लगा दिया। इस तरह गणेश जी फिर से जीवित हो गए।
इस घटना के बाद भगवान गणेश को एक आदर्श पुत्र और माँ के प्रति प्रेम का प्रतीक माना जाने लगा। इस तरह भगवान गणेश का जन्म हुआ और उनके जन्मदिन को ही हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं।
(प्रस्तुति -अर्चना शेरी)