मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घुसखोर पंडित’ को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस विवाद का मुख्य कारण फिल्म का शीर्षक है, जिसे ब्राह्मण समाज ने अपमानजनक बताया है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम को सारांश में इस तरह समझिये –
‘घुसखोर पंडित’ विवाद: मुख्य बिंदु
1. विरोध का केंद्र और कारण
जयपुर: ‘सर्व ब्राह्मण महासभा’ ने फिल्म के नाम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म के जरिए ब्राह्मण समाज को अपराध और भ्रष्टाचार से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
भोपाल: यहाँ विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया है। ब्राह्मण समाज के लोगों ने धोती-कुर्ता पहनकर सड़कों पर प्रदर्शन किया और फिल्म निर्माताओं की ‘बुद्धि-शुद्धि’ के लिए हवन भी किया।
आरोप: प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर किसी विशेष समुदाय की गरिमा को ठेस पहुँचाना गलत है।
2. कानूनी कार्रवाई (Legal Action)
विवाद अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालतों तक पहुँच गया है:
दिल्ली हाईकोर्ट: वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध (Ban) लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि यह शीर्षक दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक है।
FIR की मांग: भोपाल में प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के कलाकारों (मनोज बाजपेयी), निर्माताओं और निर्देशकों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
3. नेटफ्लिक्स की बढ़ती मुश्किलें
यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज होने वाली है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि:
यदि फिल्म का शीर्षक और आपत्तिजनक संवाद नहीं बदले गए, तो यह आंदोलन देशव्यापी (Nationwide) रूप लेगा। समाज का कहना है कि वे इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं होने देंगे।
(प्रस्तुति -अर्चना शेरी)



