Sunday, February 22, 2026
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Human Tail: आखिर कहाँ चली गई इन्सान की पूँछ ? – बंदर थे हम तो पूंछ कहाँ छोड़ आये ?

Human Tail: मानवों की पूंछ क्यों गायब हुई? वैज्ञानिकों ने खोजा जेनेटिक कारण, TBXT जीन में अलु तत्व से मिला जवाब..

Human Tail: मानवों की पूंछ क्यों गायब हुई? वैज्ञानिकों ने खोजा जेनेटिक कारण, TBXT जीन में अलु तत्व से मिला जवाब..

मानवों की पूंछ का रहस्य

मनुष्य कई अद्भुत गुणों से संपन्न हैं, लेकिन हमारे शरीर में एक चीज़ नहीं है जो अधिकांश रीढ़धारी जीवों में होती है—पूंछ। यह अंग संतुलन, गति, संचार और कीड़ों से बचाव में मदद करता है। हमारे सबसे करीबी रिश्तेदार यानी महान वानर (ग्रेट एप्स) भी पूंछ रहित हैं। लगभग 2.5 करोड़ वर्ष पहले जब होमिनोइड्स का पुरानी दुनिया के बंदरों से अलगाव हुआ, तब पूंछ का अंत हो गया। लंबे समय से माना जाता था कि यह बदलाव दो पैरों पर चलने की प्रक्रिया से जुड़ा है, लेकिन असली जेनेटिक कारण अब तक स्पष्ट नहीं था।

 जेनेटिक खोज

नई रिसर्च ने पूंछ खोने का कारण एक छोटे डीएनए अनुक्रम में खोजा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि अलु तत्व (Alu element) नामक “जंपिंग जीन” ने TBXT जीन में प्रवेश किया। TBXT जीन पूंछ की लंबाई नियंत्रित करता है।

किसी समय हमारे पूर्वजों में AluY तत्व TBXT जीन में जुड़ गया। जब वैज्ञानिकों ने छह होमिनोइड प्रजातियों और 15 गैर-होमिनोइड प्राइमेट्स का डीएनए तुलना किया, तो पाया कि AluY केवल होमिनोइड्स में मौजूद है।

 चूहों पर प्रयोग

वैज्ञानिकों ने CRISPR तकनीक का उपयोग करके चूहों में TBXT जीन में अलु तत्व डाला। परिणामस्वरूप कुछ चूहों की पूंछ लंबी रही, कुछ की छोटी और कुछ की बिल्कुल नहीं बनी। यह अलु तत्व TBXT जीन को दो प्रकार के प्रोटीन बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिनमें से एक प्रोटीन पूंछ को छोटा कर देता है।

इस खोज ने यह धारणा बदल दी कि अलु जैसे अनुक्रम “जंक डीएनए” हैं। वास्तव में, ये हमारे शरीर की संरचना और विकास को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

 विकासवादी महत्व

मुख्य शोधकर्ता बो शिया (MIT और हार्वर्ड के ब्रॉड इंस्टीट्यूट) ने कहा कि यह पहली बार है जब पूंछ खोने का जेनेटिक कारण सामने आया है। सह-लेखक इताई यानाई (NYU) ने बताया कि यह अलु तत्व हमारे जीनोम में “लाखों में एक” है, जिसे पहले सभी ने नज़रअंदाज़ कर दिया था।

हालांकि यह अध्ययन बताता है कि कैसे पूंछ गायब हुई, लेकिन क्यों गायब हुई यह अब भी रहस्य है। टेक्सास विश्वविद्यालय की मानवविज्ञानी लिज़ा शापिरो ने कहा कि शुरुआती वानर जैसे प्रोकॉन्सुल अफ्रीकानस पेड़ों पर रहते थे और चार पैरों से चलते थे, लेकिन पूंछ नहीं थी। यानी पूंछ का अंत दो पैरों पर चलने से पहले ही हो गया था।

मानव विकास और स्वास्थ्य संबंध

मानव भ्रूण में शुरुआती हफ्तों में पूंछ दिखाई देती है, लेकिन आठवें सप्ताह तक गायब हो जाती है। कभी-कभी दुर्लभ मामलों में शिशु पूंछ जैसी संरचना के साथ जन्म लेते हैं, लेकिन उनमें हड्डी या उपास्थि नहीं होती।

शोध से यह भी संकेत मिला कि पूंछ खोने का संबंध स्पाइना बिफिडा जैसी न्यूरल ट्यूब विकृति से हो सकता है। कुछ चूहों में, जिनकी पूंछ जेनेटिक रूप से हटाई गई थी, ऐसे ही दोष पाए गए।

भविष्य की दिशा

वैज्ञानिक मानते हैं कि पूंछ खोने में अन्य जीन भी शामिल थे। आगे के अध्ययन यह समझने में मदद कर सकते हैं कि इस बदलाव ने भ्रूण विकास, चाल-ढाल और व्यवहार को कैसे प्रभावित किया।

यानाई ने कहा कि भले ही इस उत्परिवर्तन को उलट दिया जाए, “पूंछ वापस नहीं आएगी।”

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