India defeats Pakistan again: फ्रेम में नज़र आते इन दो प्लेयर्स में सिर्फ नीले-हरे, रन-विकेट या जीत-हार का ही फ़र्क नहीं है..
इन दो प्लेयर्स, या इन दोनों प्लेयर्स की टीम के बीच में सबसे बड़ा फ़र्क बुद्धि का है बुद्धि का!
पाक्सतां प्लेयर्स अक्सर रोते रहते हैं कि हमें इंडिया जैसी ट्रेनिंग नहीं मिलती, डाइट नहीं मिलती, कोच नहीं मिलते, पैसा नहीं मिलता दूध नहीं मिलता घी नहीं मिलता, एक बार तो कह दिया था कि डीजे वाली की तरफ़ से दिल-दिल पाक्सतां नाम का गाना नहीं मिलता।
पर सही मायने में इन मूर्खों को अक्ल नहीं मिलती। ये रोटी नहीं खाते, ये मुर्गे नहीं खाते, ये गधे हैं जो शायद घास खाते हैं। इतना बड़ा बना दिया था इस मैच को, आल टाइम राइवलरी, उस्मान तारीक़ कमाल करेगा, साहिबजादे से बुमराह को बचना पड़ेगा, अजी बेल आइकान!
ये इतने बेवकूफ़ प्लेयर्स हैं कि पहले तो 6 स्पिनर खिला के, स्पिन सपोर्टिंग पिच पर पहले गेंदबाजी ले ली जबकि बैटिंग लेनी थी। बॉलिंग में 6-7 गेंदबाज होते हुए भी पिटते हुए शाहीन और अबरार को बार बार गेंद दी।
फिर चेज़ करने आये तो पहले 3 विकेट्स तो फ़ास्ट बॉलर्स को दे डाले। उसमें भी तब जब खुद पहले गेंदबाजी कर चुके थे, इन्हें पता होना चाहिए था कि कोलंबो का ग्राउन्ड छक्के मारने वाला नहीं है। सिंगल डबल लेने की कोई कोशिश नहीं।
आप बुद्धि का फ़र्क देखिए कि किशन भले ही धुआँधार तेज़ खेला, पर उसने भी फ़ील्ड को ध्यान में रखकर शॉट्स मारे, ईशान के 10 चौके और मात्र 3 सिक्स हैं, जो ईशान को जानते हैं वो उन्हें पता है कि सिर्फ 3 सिक्स ईशान के गेम स्टाइल से मेल नहीं खाते।
फिर ईशान के जाने के बाद सूर्य न रन-अ-बॉल खेलते हुए भी विकेट्स नहीं जाने दिए, तिलक को भी जल्दबाज़ी नहीं करने दी। रन लेते रहो, ये खुद ही प्रेशर में आ जाएंगे। और वही हुआ!
लेकिन ये ब्रेनless ज़ोमबीज़ अंधे-बहरों की तरह आउट होने लगे। इनके बाबर आज़म से बेहतर बैटिंग तो चुप-चुपके में राजपाल यादव ने की थी। एक ही शॉट में लोटा सिर पे बजा दिया था!
इन सारे जोकर्स में से शादाब को मैं थोड़ा बुद्धिमान समझ रहा था, पर वो तो इतना मूर्ख निकला कि तिलक वर्मा की गेंद पर वहाँ कैच दे दिया जहाँ पूरी लेग साइड पर सिर्फ एक प्लेयर था! माय बैड, मुझे लगा था 150 तो बनाएंगे गिरते पड़ते कि नेट रन-रेट पर फ़र्क न पड़े!
मतलब इतना घटिया कोई कैसे खेल सकता है?
इन खोतों को कोई बताए कि बुद्धि दूसरों को देखकर भी आ सकती है। वर्ना निदरलैंड, यूएसए और अफ़गानिस्तान के पास भी भारतीय टीम जैसी ट्रेनिंग डाइट और पैसा नहीं है, पर वो थोड़ी बुद्धि और जज़्बे से मैच तो लड़ाते हैं।
अच्छा ज़िम्बावे के पास कौन से बिलियन डॉलर्स हैं? पर उन्होंने अपने गेम प्लान से ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया!
एक तरफ़ा मैच था ये, अब कमेन्ट में आकर किसी पाकी ने राइवरी की बात की न तो कमेन्ट में ईंट बाँध फेंककर मारूँगा।
बजाओ इनके कान में डिल-डिल पाक्सतां!
(सिद्धार्थ अरोड़ा सहर)



