India UAE Relations: भारत–UAE रिश्तों में नई उड़ान: पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद की ऐतिहासिक मुलाकात, रक्षा से ऊर्जा तक कई बड़े समझौते..
ढाई घंटे की मुलाकात ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश
क्या किसी विदेशी राष्ट्रपति की केवल कुछ घंटों की यात्रा वैश्विक राजनीति को हिला सकती है? क्या इतनी छोटी मुलाकात से दो देशों के रिश्तों की दिशा बदल सकती है? और क्या अचानक किसी नेता का आना इस बात का संकेत है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी रणनीति चल रही है?
भारत आए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की यह तेज़ रफ्तार यात्रा ऐसे ही सवालों को जन्म देती है। सोमवार को उनकी अचानक दिल्ली यात्रा ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। पाकिस्तान और तुर्की की निगाहें खास तौर पर इस दौरे पर टिकी रहीं, क्योंकि संदेश साफ था—भारत और UAE के रिश्ते अब नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं।
“पावर विज़िट” के मायने
भले ही यह दौरा केवल ढाई घंटे का रहा, लेकिन इसके महत्व बेहद गहरे हैं। कूटनीतिक हलकों में इसे “पावर विज़िट” कहा जा रहा है। सामान्यतः इतनी कम अवधि में न तो इतनी बड़ी मुलाकातें होती हैं और न ही इतने अहम फैसले लिए जाते हैं। यही वजह है कि इस यात्रा को असाधारण माना जा रहा है।
गोपनीय तैयारी और विशेष स्वागत
इस यात्रा की तैयारी पूरी तरह गुप्त रखी गई थी। जैसे ही राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद दिल्ली पहुंचे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। प्रोटोकॉल तोड़कर किया गया यह स्वागत अपने आप में बड़ा संकेत था। भारत बहुत चुनिंदा मौकों पर ही ऐसा करता है, और यह दिखाता है कि UAE भारत के लिए केवल साझेदार नहीं बल्कि भरोसेमंद रणनीतिक मित्र है।
रक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर गहन चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद की मुलाकात औपचारिकता से कहीं आगे बढ़ी। इसमें रक्षा, ऊर्जा, निवेश, तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और वैश्विक राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। यही कारण है कि इस मुलाकात को “2 घंटे, 5 समझौते और 7 बड़े ऐलान” के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई। लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए, जिससे स्पष्ट है कि अब सहयोग केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और विशेष बलों की ट्रेनिंग तक फैलेगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र: भारत और UAE ने सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च सुविधाओं के साझा उपयोग पर सहमति जताई। इससे स्पेस रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और व्यावसायिक सैटेलाइट सेवाओं में नए अवसर खुलेंगे।
ऊर्जा सुरक्षा: UAE ने भारत को हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG सप्लाई करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर बन गया।
आर्थिक सहयोग: UAE ने गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में निवेश का भरोसा दिया। साथ ही GIFT सिटी में दो कंपनियों को ऑफिस खोलने की मंजूरी मिली।
आतंकवाद पर एकजुटता: दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकियों को सजा दिलाने पर जोर दिया।
भारतीय समुदाय और व्यापारिक लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने UAE में रहने वाले 43 लाख से अधिक भारतीयों के योगदान की सराहना की। उन्होंने भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए UAE सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। यह अहम है क्योंकि UAE की आबादी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है।
दोनों देशों ने 2032 तक व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। फिलहाल व्यापार 100 अरब डॉलर से अधिक है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत UAE को 63 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता है।
भविष्य की साझेदारी: परमाणु ऊर्जा और AI
भारत और UAE ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग का निर्णय लिया। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टर, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, न्यूक्लियर प्लांट संचालन और सुरक्षा शामिल हैं।
साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राथमिक क्षेत्र माना गया। UAE ने भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने में निवेश पर विचार करने की बात कही। फरवरी 2026 में भारत में होने वाले AI समिट में UAE उच्च स्तर पर भाग लेगा। डिजिटल या डेटा एम्बेसी की संभावना पर भी चर्चा हुई।
सांस्कृतिक कूटनीति और उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आवास पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद और उनके परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने गुजरात की पारंपरिक नक्काशीदार लकड़ी का झूला भेंट किया, जो पारिवारिक एकता का प्रतीक है। यह उपहार UAE द्वारा 2026 को ‘ईयर ऑफ फैमिली’ घोषित किए जाने से जुड़ा है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें कश्मीरी पश्मीना शॉल और चांदी के डिब्बे में रखा कश्मीरी केसर भेंट किया। ये उपहार भारत की समृद्ध संस्कृति और हस्तशिल्प का प्रतीक हैं।
वैश्विक राजनीति के बीच अहम संकेत
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच तनाव, ईरान की स्थिति, गाजा संकट और पश्चिम एशिया की उथल-पुथल जारी है। ऐसे माहौल में भारत और UAE की यह मुलाकात स्पष्ट संकेत देती है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
रिश्तों की मजबूती और आगे की राह
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और UAE के रिश्तों में नई मजबूती आई है। 2019 में पीएम मोदी को UAE के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया जाना इसका बड़ा उदाहरण है। UAE भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 75 अरब डॉलर निवेश का वादा कर चुका है और अब तक 22 अरब डॉलर से अधिक निवेश कर चुका है।
आज भारत का UPI और RuPay सिस्टम UAE में उपलब्ध है। रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद की यह ढाई घंटे की यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश थी—भारत और UAE अब मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं।
अब सवाल यही है कि क्या यह तेज़ रफ्तार यात्रा आने वाले समय में किसी बड़े वैश्विक बदलाव की नींव बनेगी। क्या भारत और UAE मिलकर पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा देंगे। और क्या यह मुलाकात दुनिया को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भारत अब वैश्विक फैसलों के केंद्र में खड़ा है। जवाब भविष्य में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि यह छोटी यात्रा बहुत बड़े मायने रखती है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



