इस बच्चे का चेहरा देखिए आप, ये जब ग्राउन्ड पर आया और अभिषक का विकेट गिरा तो ये इतना खुश था कि मानों जग जीत लिया हो।
हालाँकि ये तस्वीर उस समय की है जब पाकीज़ के 4 विकेट्स गिर चुके थे। बच्चा ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था। अपनी टीम को चीयर कर रहा था।
मैच जीतने के बाद ग्राउन्ड के बाहर निकलकर, रिपोर्टर के सामने ये रोते हुए बोला कि “बाबर बिल्कुल हर्रामज़ादा है, एक दम दिल ही तोड़ दिया। अल्लामाफ़ करे, इत्ता गंदा खेले हैं ये, इनसे भरोसा ही हट गया। ये लोग ‘डैश-डैश’ हैं, इनसे उम्मीद लगानी बेकार है”
इसके बाद ये बच्चा आँसू पोंछते हुए बोला “इंशाअल्लाहजब मैं बड़ा हो जाऊँगा न तो किरकिट खेलूँगा और इन एंडीया वालों को ओ-कात दिखा दूंगा (फिर और रोने लगा), मुझे नफ़रत है इनसे.”
जब नफ़रत वाली लाइन बोली बच्चे ने, तो रिपोर्टर ने कन्फर्म कर लिया “किससे नफ़रत है अपनी टीम से या एंडीया वालों से”
बच्चा बिचारा बस घूरता रह गया, कोई शब्द न बोल सका। शायद वो भी कॉनफ्यूज़ था कि उसे एक्चुअली ज़्यादा नफ़रत किससे है?
पर ये किस तरह के बच्चे बन रहे हैं पाक्सतां में? मैंने कभी हमारे यहाँ के बच्चों को ऐसे मैच के बाद रोते और नफ़रती बयान देते नहीं देखा!
मैं सच लिखूँ दोस्तों तो मुझे बहुत दुख हुआ इस बच्चे को दुखी देख!
मुझे लगता है कि हमारे पड़ोसी मुल्क को अपने बच्चों के लिए एक बेहतर समाज की ज़रूरत है। जहाँ नफ़रत कम हो और मुहब्बत ज़्यादा।
मुहब्बत की दुकानों की फ्रेंचाइज़ कराची में खुलनी चाहिए और वहाँ ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगाता एक आलम भाई होना चाहिए, जो कहे “डार्लिंग डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा, पीलो-पीलो आलम दूध सोडा”
“पाईनेप्प्ल….. वो तो ख़त्म हो गया, ओरेंज ले आऊँ?”
(सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’)



