Jimming: 60 साल की उम्र में भी बन सकती हैं मज़बूत मांसपेशियां: सही व्यायाम और पोषण से बदलेगा बुढ़ापे का सफ़र..
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि मांसपेशियां केवल युवावस्था में ही बन सकती हैं और 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद ताक़त घटने लगती है। लेकिन अब विशेषज्ञ इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 60 साल के बाद भी मांसपेशियां बनाना संभव है और यह स्वस्थ बुढ़ापे के लिए बेहद ज़रूरी है।
उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों की समस्या
बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों का क्षय होना स्वाभाविक है। इसे सारकोपीनिया कहा जाता है। 50 वर्ष के बाद यह प्रक्रिया तेज़ हो जाती है और 60 के दशक में यह और स्पष्ट दिखाई देती है। इसके कारण कमजोरी, थकान, संतुलन बिगड़ना और गिरने या हड्डी टूटने का ख़तरा बढ़ जाता है।
भारतीय खानपान में कार्बोहाइड्रेट अधिक और प्रोटीन कम होता है, जिससे मांसपेशियों का क्षय और तेज़ हो जाता है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. अतुल काकर (सर गंगाराम अस्पताल, दिल्ली) कहते हैं –
“60 साल के बाद भी मांसपेशियां बन सकती हैं, लेकिन इसके लिए सही रणनीति चाहिए। हाई-इंटेंसिटी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन सेवन से सारकोपीनिया को रोका जा सकता है।”
डॉ. रवि प्रकाश (कार्डियोलॉजी, पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली) का कहना है –
“मज़बूत मांसपेशियां न केवल ताक़त देती हैं बल्कि डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज़ और आर्थराइटिस जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में भी मदद करती हैं। यह शरीर की मुद्रा, सांस लेने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती हैं।”
60 साल में मांसपेशियां कैसे बनाएं?
डॉक्टरों का जवाब है -हाँ, लेकिन सावधानी के साथ।
भारी और असुरक्षित व्यायाम से बचें।
हल्के डंबल, रेज़िस्टेंस बैंड, बॉडीवेट एक्सरसाइज़, योग और पिलाटेस सुरक्षित विकल्प हैं।
दीवार पर पुश-अप्स, स्क्वैट्स, हल्की साइक्लिंग और रोज़ाना पैदल चलना बेहद उपयोगी है।
लक्ष्य बड़े-बड़े मसल्स बनाना नहीं, बल्कि ताक़त, संतुलन और स्वतंत्रता बनाए रखना होना चाहिए।
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉ. ब्रह्मराजु टी.जे. (ग्लेनईगल्स बीजीएस अस्पताल, बेंगलुरु) कहते हैं –
“धीरे-धीरे शुरुआत करें। 30 मिनट का व्यायाम, हफ़्ते में तीन से चार बार पर्याप्त है। मशीनों से शुरुआत करना सुरक्षित रहता है क्योंकि वे मूवमेंट को नियंत्रित करती हैं और चोट का ख़तरा कम करती हैं।”
डॉ. संजीब कुमार बेहरा (केयर अस्पताल, हैदराबाद) कहते हैं –
“सबसे ज़रूरी है कि व्यायाम विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाए। सही मुद्रा और वार्म-अप पर ध्यान दें। पीठ और घुटनों पर ज़्यादा दबाव डालने वाले व्यायाम से बचें।”
स्वास्थ्य समस्याओं में भी संभव है व्यायाम
यदि किसी बुज़ुर्ग को डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज़, ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस जैसी बीमारियां हैं, तब भी हल्का व्यायाम किया जा सकता है।
जोड़ों के दर्द वाले लोग चेयर एक्सरसाइज़ कर सकते हैं।
आर्थराइटिस वाले मरीजों के लिए वॉटर वर्कआउट या एक्वाटिक थेरेपी उपयोगी है।
हार्ट पेशेंट्स के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में हल्के व्यायाम सुरक्षित हैं।
कई बुज़ुर्ग यह सोचकर व्यायाम से दूर रहते हैं कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियां नहीं बन सकतीं। लेकिन यह धारणा गलत है। सही मार्गदर्शन, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से 60 साल की उम्र में भी मांसपेशियां बनाना और स्वस्थ रहना पूरी तरह संभव है।



