Late Night Eating: देर रात खाना क्यों छीन लेता है आपकी ऊर्जा? जानिए नींद, हार्मोन और थकान के बीच छुपा कनेक्शन..
दिन भर थकान बनी रहती है और बार-बार झपकी लेने का मन करता है? अगर हां, तो इसकी वजह सिर्फ कम नींद या ज्यादा काम नहीं हो सकती। आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी आपकी ऊर्जा को धीरे-धीरे खत्म कर रही होती हैं। इनमें कुछ आदतें तो साफ नजर आती हैं -जैसे शाम को देर तक कैफीन लेना – लेकिन कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो दिखती नहीं, पर असर गहरा डालती हैं। इन्हीं में से एक बेहद आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली आदत है: देर रात खाना खाना।
पोषण विशेषज्ञ सामंथा पीटरसन (MS, RD), जो Simply Wellness की संस्थापक और CEO हैं, और रेबेका गुडरिच (RD), जो अमेरिका की सबसे बड़ी सार्वजनिक हेल्थ योजना L.A. Care Health Plan से जुड़ी हैं, बताती हैं कि देर रात खाना शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को कैसे बिगाड़ देता है।
देर रात खाना नींद को कैसे प्रभावित करता है
न्यूट्रीशन एक्सपर्ट सामंथा पीटरसन के अनुसार, सोने से ठीक पहले कुछ भी खाना शरीर के अंदर चल रही उस प्रक्रिया में बाधा डालता है, जो हमें नींद के लिए तैयार करती है। सामान्य रूप से रात के समय शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ता है, मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर खुद की मरम्मत यानी रिपेयर मोड में चला जाता है।
लेकिन जैसे ही आप देर रात भोजन करते हैं, यह संतुलन बिगड़ जाता है। खाना खाने के बाद शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ता है, और यही इंसुलिन मेलाटोनिन को दबा देता है। मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो दिमाग को संकेत देता है कि अब सोने का समय हो गया है।
इसके साथ ही पाचन प्रक्रिया के कारण कोर्टिसोल -जिसे तनाव हार्मोन कहा जाता है – भी बढ़ा रह सकता है। इन दोनों का असर यह होता है कि गहरी नींद देर से आती है और अगली सुबह शरीर भारी, सुस्त और थका हुआ महसूस करता है।
सामंथा पीटरसन कहती हैं कि रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म अगले दिन की ऊर्जा तय करता है। अगर रात में शरीर को आराम नहीं मिला, तो सुबह खुद-ब-खुद थकान महसूस होगी।
अगर रात में भूख लग जाए तो क्या करें
हालांकि यह भी सच है कि हर बार खुद को भूखा रखना न तो व्यावहारिक है और न ही सेहतमंद। सामंथा पीटरसन के मुताबिक, अगर किसी को सच में सोने से पहले भूख लग रही हो, तो थोड़ी मात्रा में सोच-समझकर खाना बिल्कुल ठीक है।
उनका कहना है कि सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है स्थिरता। शरीर को नियमितता चाहिए ताकि वह रात भर ठीक से रिचार्ज हो सके और आपकी सर्कैडियन रिदम संतुलन में बनी रहे।
आखिरी भोजन का सही समय और सही चुनाव
रेबेका गुडरिच सलाह देती हैं कि कोशिश करें कि आपका आखिरी मुख्य भोजन सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले हो जाए। इससे शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और नींद में बाधा नहीं आती।
हालांकि हर व्यक्ति पर खाने की मात्रा और समय का असर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कुछ चीजें लगभग सभी के लिए नुकसानदायक होती हैं। खासकर देर रात भारी भोजन और ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें रिफाइंड शुगर ज्यादा हो – जैसे मिठाइयां, मीठे पेय, आइसक्रीम, पेस्ट्री – नींद और हार्मोन दोनों को प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा तले-भुने और देर से पचने वाले भोजन जैसे पिज्जा, फास्ट फूड और डीप फ्राइड आइटम्स भी रात में खाने से बचने चाहिए।
अगर स्नैक लेना ही हो तो क्या खाएं
अगर सोने से पहले हल्का-फुल्का खाने की जरूरत महसूस हो, तो रेबेका गुडरिच लगभग 200 कैलोरी के आसपास के स्नैक्स लेने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार, कुछ बेहतर विकल्प हैं –
एक कप खट्टे चेरी (tart cherries)
थोड़े से नट्स
आधा कप ताजी हरी सोयाबीन
एक छोटा कीवी
आधा केला, साथ में एक चम्मच स्मूद नट बटर
ये विकल्प न सिर्फ हल्के होते हैं बल्कि शरीर पर ज्यादा मेटाबॉलिक दबाव भी नहीं डालते।
परफेक्शन नहीं, संतुलन जरूरी
अंत में, विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि अगर कभी-कभार आपको सोने के बिल्कुल पास खाना पड़ जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। उद्देश्य पूर्णता नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चलने वाले उस “मेटाबॉलिक शोर” को कम करना है, जिससे शरीर अच्छी और गहरी नींद पर ध्यान केंद्रित कर सके।
सही समय पर खाना, हल्का भोजन और नियमित दिनचर्या – यही आपकी ऊर्जा को बनाए रखने और थकान को दूर रखने की असली कुंजी है।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



