Nehru – Indira: बीजेपी ने किया बड़ा खुलासा – ऐतिहासिक किताबों के हवाले से दावा किया कि भारत के सुरक्षा तंत्र की कमर तोड़ी नेहरू – इन्दिरा ने..
राहुल गांधी द्वारा अमेरिका के साथ ट्रेड डील को ‘होलसेल सरेंडर’ बताए जाने के बाद, अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलट दिए हैं। बीजेपी ने कुछ ऐतिहासिक किताबों और संस्मरणों का हवाला देते हुए दावा किया है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक हितों के लिए देश की खुफिया क्षमता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया।
बीजेपी ने पॉल एम. मैकगैरी की पुस्तक ‘Spying in South Asia’ और पूर्व अमेरिकी राजदूत डैनियल पैट्रिक मोयनिहान के संस्मरण ‘A Dangerous Place’ का जिक्र करते हुए नेहरू-गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जवाहरलाल नेहरू: ‘अपने ही खुफिया तंत्र की कमर तोड़ी’
बीजेपी का दावा है कि नेहरू की नीतियों ने भारत को 1962 के युद्ध में चीन के सामने कमजोर स्थिति में धकेल दिया था। नेहरू पर मुख्य आरोप कुछ इस प्रकार हैं:
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का विस्तार रोका: जब आईबी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना बनी, तो नेहरू ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह भारत की क्षमता से बाहर है। इसे देश की सुरक्षा के प्रति एक ‘जानबूझकर की गई अदूरदर्शिता’ बताया गया है।
चीन के लिए रास्ता साफ किया: नेहरू का तर्क था कि भारत को भारी खुफिया ढांचे की जरूरत नहीं है। इसका नतीजा यह हुआ कि चीन ने भारत के भीतर अपना एक मजबूत जासूसी तंत्र खड़ा कर लिया, जबकि भारतीय एजेंसियां फंड और नीतियों की कमी के कारण पिछड़ गईं।
विशेषज्ञता को नजरअंदाज किया: 1950 के दशक तक भारत में चीनी भाषा, संस्कृति और राजनीति के अध्ययन को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। जब आईबी ने चीन में जासूस तैनात करने की अनुमति मांगी, तो नेहरू ने ऐसी कड़ी शर्तें थोप दीं कि योग्य अधिकारी मिलना ही नामुमकिन हो गया।
इंदिरा गांधी: ‘विदेशी एजेंसियों के साथ गुपचुप साठगांठ का आरोप’
बीजेपी ने इंदिरा गांधी पर और भी गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए विदेशी खुफिया एजेंसियों से हाथ मिलाया था।
चुनाव के लिए CIA से पैसा: पूर्व अमेरिकी राजदूत मोयनिहान के संस्मरणों के आधार पर बीजेपी ने दावा किया कि CIA ने भारतीय राजनीति में दो बार सीधा हस्तक्षेप किया। आरोप है कि केरल और पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों को हराने के लिए CIA ने कांग्रेस पार्टी को मोटी रकम दी थी। यहाँ तक कि एक बार यह पैसा सीधे इंदिरा गांधी को दिया गया था, जब वे पार्टी अध्यक्ष थीं।
कांग्रेस का दोहरा मापदंड: बीजेपी का कहना है कि जो कांग्रेस सार्वजनिक रूप से विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करने का ढोंग करती थी, वही पर्दे के पीछे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अमेरिकी डॉलरों का सहारा ले रही थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ‘खिलवाड़’ की विरासत
खुफिया तैनाती में रोड़े: बीजेपी ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 1957 में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद भी नेहरू ने खुफिया अधिकारियों की तैनाती में रोड़े अटकाए। उनके द्वारा थोपी गई कठिन शर्तों के कारण बीजिंग में समय रहते सही अधिकारी नहीं भेजे जा सके। बीजेपी के अनुसार, ये ऐतिहासिक तथ्य कांग्रेस के ‘राष्ट्रवाद’ के दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं और राहुल गांधी के आरोपों का जवाब उनके अपने ही पुरखों के इतिहास में छिपा है।
(त्रिपाठी पारिजात)



