Wednesday, February 4, 2026
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Nitish Kumar: कभी लालू कभी मोदी विरोध लेकिन किस्मत में हमेशा CM की कुर्सी!

Nitish Kumar: विकास पुरुष बाद में बने, पहले नीतीश थे लालू विरोधी फिर हुए मोदी विरोधी -लेकिन उनके भाग्य ने कभी उनका विरोध नहीं किया और हमेशा उनको सीएम की कुर्सी का उपहार दिया..

Nitish Kumar: विकास पुरुष बाद में बने, पहले नीतीश थे लालू विरोधी फिर हुए मोदी विरोधी -लेकिन उनके भाग्य ने कभी उनका विरोध नहीं किया और हमेशा उनको सीएम की कुर्सी का उपहार दिया..

बिहार की राजनीति में फिर वही नाम और वही चेहरा—नीतीश कुमार—सिर्फ सुर्खियों में नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता के केंद्र में है। 74 साल के नीतीश को चुनाव से पहले कई लोग कमजोर मान रहे थे, लेकिन नतीजे आते ही उन्होंने सबको चौंका दिया। उनके विरोधी प्रशांत किशोर जहां जेडी(यू) को 25 सीटों से कम मिलने का अनुमान लगा रहे थे, वहीं जेडी(यू) ने 2020 की तुलना में लगभग दोगुनी सीटें जीतते हुए 85 सीटें हासिल कीं।

पूरे बिहार में एनडीए की जीत की लहर चली। 243 में से 202 सीटें एनडीए के खाते में गईं, और नीतीश कुमार ने अपने दसवें कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो एक रिकॉर्ड है।

नीतीश का राजनीतिक सफर बिहार की राजनीति का पूरा इतिहास बताता है। 2000 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, उनकी सरकार केवल सात दिन ही चली। 2005 में बीजेपी के साथ गठबंधन किया और मजबूत जनादेश के साथ सत्ता में बने रहे। 2010 में उनकी पकड़ और भी मजबूत हुई।

लेकिन 2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने के बाद नीतीश ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया। आरजेडी और कांग्रेस के समर्थन से सत्ता में बने रहे, लेकिन 2014 की लोकसभा हार के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। जीतन राम मांझी को कुर्सी दी, लेकिन यह अधिक समय तक नहीं चला। 2015 से पहले उन्होंने खुद कमान संभाली और महागठबंधन बनाकर चुनाव जीते।

2017 में उन्होंने फिर पलटी मारी और बीजेपी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बने। 2020 में जेडी(यू) कमजोर थी, बीजेपी मजबूत, लेकिन एनडीए ने फिर भी नीतीश को ही मुख्यमंत्री बनाए रखा। 2022 में उन्होंने फिर से बीजेपी का साथ छोड़कर आरजेडी-कांग्रेस की ओर रुख किया और शपथ ली। लेकिन यह सरकार 17 महीनों में टूट गई और 2024 की शुरुआत में नीतीश ने फिर से एनडीए का दामन थाम लिया।

2025 के चुनावों में, तमाम आलोचनाओं और उतार-चढ़ाव के बावजूद, नीतीश कुमार ने साबित कर दिया कि वे बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं। हर चुनाव, हर गठबंधन और हर संकट के बीच वे खुद को फिर से स्थापित कर लेते हैं। यही वजह है कि दो दशक बाद भी बिहार की सत्ता के केंद्र में वही चेहरा है—नीतीश कुमार।

(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)

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