Friday, August 29, 2025
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One Hindustani: युद्ध क्षेत्रों से लेकर ट्रॉपिकल आइलैंड्स तक -19 साल का अकेला यात्री जिसने घूम लिए 118 देश

One Hindustani: हिन्दुस्तानी मूल का एक अमेरिकी नागरिक दुनिया घूमने का इतना बड़ा शौकीन है कि जान हथेली पर रख कर उसने अब तक सवा सौ देशों की यात्रा पूरी कर ली है..

One Hindustani: हिन्दुस्तानी मूल का एक अमेरिकी नागरिक दुनिया घूमने का इतना बड़ा शौकीन है कि जान हथेली पर रख कर उसने अब तक सवा सौ देशों की यात्रा पूरी कर ली है..

कभी रूस के हवाई हमलों से बचना पड़ा, कभी तालिबान के बीच समय बिताना पड़ा, तो कभी दुनिया के सबसे कम देखे गए देश नाउरु में बच्चों के साथ खेलना पड़ा – ये कहानी है 19 साल के अर्जुन मालवीय की, जो आज दुनिया के सबसे कम उम्र के सोलो ट्रैवलर माने जाते हैं।

बचपन से था सफ़र का जुनून

अर्जुन कैलिफ़ोर्निया (अमेरिका) के वेस्टलेक विलेज से हैं। उनके माता-पिता अरपित मालवीय और अनीता वेंकटरामन एक एविएशन सॉफ़्टवेयर कंपनी चलाते हैं। बचपन में ही अर्जुन अक्सर अपने माता-पिता के साथ बिज़नेस और फैमिली ट्रिप्स पर जाते थे। तभी से उन्हें अलग-अलग देशों और संस्कृतियों को देखने का जुनून हो गया।

16 साल की उम्र तक उन्होंने हाईस्कूल पूरा कर लिया था और मूरपार्क कॉलेज से जनरल एजुकेशन कोर्स भी खत्म कर लिया था। लेकिन कॉलेज कैंपस में इतनी कम उम्र के छात्र के तौर पर पढ़ना उन्हें आकर्षक नहीं लगा।

इसलिए उन्होंने सोचा – क्यों न वो अपने असली सपने की ओर कदम बढ़ाएँ? वो सपना था – 20 साल की उम्र से पहले पूरी दुनिया को अकेले घूम लेना।

इसके लिए उन्होंने स्कूल के दिनों में ही कई छोटे-मोटे जॉब किए – जैसे टेनिस कोचिंग देना, बच्चों को टीम में शामिल होने के लिए ट्रेन करना और ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी करना। इन पैसों को अर्जुन ने बचाकर अपनी यात्रा के लिए तैयारियां कीं।

महामारी और भूगोल से प्रेम

कोविड महामारी के समय जब सामाजिक मेलजोल लगभग बंद हो गया, तो उनकी अंदरूनी बेचैनी और दुनिया देखने की ख्वाहिश और गहरी हो गई। साथ ही भूगोल से उनके बचपन का प्यार उन्हें बार-बार याद दिलाता था कि किताबों में पढ़े गए दूरस्थ स्थानों को अब असलियत में देखना है।

जून 2023 में, 17 साल की उम्र में, अर्जुन ने सिर्फ़ एक बैकपैक और प्लान के साथ सफ़र शुरू किया।

खतरों और अनुभवों से भरी यात्राएँ

यूक्रेन: नवंबर 2023 में जब वो ओडेसा शहर गए, तो अचानक रूसी हवाई हमलों के सायरन बजने लगे। बर्फ़ जमी सड़कों की वजह से बसें बंद हो गईं और उन्हें बम शेल्टर में कई घंटे रुकना पड़ा।

अफ़ग़ानिस्तान: यहाँ उन्होंने तालिबान सदस्यों से मुलाक़ात की, जिन्होंने उन्हें हैरान कर देने वाली मेहमाननवाज़ी दिखाई।

इराक: उन्होंने सद्दाम हुसैन के बाबिलोन पैलेस में विशेष अनुमति लेकर प्रवेश किया, जहाँ आम जनता को जाने की इजाज़त नहीं होती।

वेनज़ुएला: एयरपोर्ट पर उन्हें रोका गया क्योंकि अधिकारी समझ बैठे कि वो नाबालिग हैं और माता-पिता से भाग रहे हैं। दो घंटे समझाने और सीसीटीवी फुटेज दिखाने के बाद ही उन्हें जाने दिया गया।

दूर-दराज़ के देश और लोकजीवन

अर्जुन सिर्फ़ मशहूर जगहों पर नहीं गए बल्कि दुनिया के सबसे कम-देखे गए देशों और गाँवों तक पहुँचे। नाउरु और तुवालु जैसे छोटे-छोटे द्वीप राष्ट्र जहाँ इंटरनेट भी मुश्किल से मिलता है। उन्होंने इसे बोझ नहीं, बल्कि प्रकृति और लोगों से जुड़ने का मौका माना।

पापुआ न्यू गिनी और म्यांमार के गाँवों में स्थानीय बच्चों और किसानों के साथ समय बिताया। इंडोनेशिया के खेतों में धान बोने वाले मजदूरों की मदद की। ईरान में दुर्लभ धार्मिक उत्सव देखे। नॉर्वे में उत्तरी रोशनी (Northern Lights) का नज़ारा देखा और श्रीलंका में हाथियों के झुंड के बीच समय गुज़ारा।

खर्च और साधन

उन्होंने ज्यादातर सस्ते हॉस्टल्स और Airbnb में ठहरे, स्ट्रीट फूड खाकर और ट्रैवल ऐप्स की मदद से सस्ते रूट्स पकड़कर अपना खर्च संभाला। उनकी बचत और पार्ट-टाइम जॉब की कमाई ने इसमें मदद की।

सीख और समझ

अर्जुन की सबसे बड़ी समझ ये रही कि दुनिया भर के लोग असल में बहुत मिलते-जुलते हैं। हर इंसान को – नौकरी, परिवार का सुख, शिक्षा और भोजन – यही सब चाहिए।

उन्होंने महसूस किया कि कई बार किसी देश की छवि वहाँ की सरकार तय करती है, जबकि आम लोग उतने अलग नहीं होते। उनका मक़सद कभी किसी जगह को सनसनीखेज़ दिखाना नहीं था, बल्कि वहाँ के लोगों की असल ज़िंदगी समझना था।

अर्जुन का कहना है:

“अगर कोई बच्चा अकेले सफ़र करता दिखे तो लोग खुद मदद करने लगते हैं। कई बार मुझे घर बुलाकर खाना खिलाया गया, तो कभी लोग अपनी गाड़ी में छोड़ने आ गए।”

कठिन हालात और हिम्मत

उन्होंने हमेशा खुद को यह सिखाया कि “Uncomfortable situations में भी Comfortable रहो।” यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

वो कहते हैं कि अगर तालिबान के बीच डरकर बैठे रहते, तो शक पैदा होता। लेकिन उनके शांत और आत्मविश्वासी व्यवहार ने सबकुछ आसान बना दिया।

आगे का सपना

अर्जुन अभी UC Santa Barbara में कंप्यूटर इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं। लेकिन उनका सफ़र अभी पूरा नहीं हुआ। अब तक वे 118 देशों में जा चुके हैं और उनका सपना है कि वो दुनिया के सभी 195 देशों में कदम रखें।

उनका संदेश युवाओं के लिए है:

“जाइए, सफ़र कीजिए! ख़बरों में जो पक्षपात भरी बातें सुनाई देती हैं, उनकी सच्चाई खुद देखिए। असलियत आपको वही दिखेगी, जिसे कोई आपसे छीन नहीं सकता।”

(प्रस्तुति -त्रिपाठी इन्द्रनील)

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