Pakistan की सत्ता ने खुद खोली ऑपरेशन सिंदूर की पोल – जरदारी, शहबाज और मुनीर के बयानों से उजागर हुई भारत की सैन्य कार्रवाई की असली ताकत..
जब पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व को बंकरों में छिपने की तैयारी करनी पड़ी
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में ऐसी हलचल मचा दी थी कि वहां की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व व्यवस्था तक हिल गई थी। हालात इतने गंभीर बन गए थे कि पाकिस्तान के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को सुरक्षित बंकरों में भेजने की चर्चा होने लगी थी। यह बात किसी भारतीय अधिकारी ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सार्वजनिक मंच से स्वीकार की है।
इस स्वीकारोक्ति के बाद यह साफ हो गया है कि भारत की इस रणनीतिक कार्रवाई ने पाकिस्तान के भीतर किस स्तर तक असर डाला था।
सीजफायर के दावों के पीछे छुपी थी असली बेचैनी
मई महीने में भारत–पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद जहां एक ओर अमेरिका ने संघर्षविराम का दावा किया, वहीं पाकिस्तान दुनिया भर में यह प्रचार करता रहा कि वह इस झड़प में सफल रहा। लेकिन अब उसी देश के सर्वोच्च नेतृत्व की स्वीकारोक्तियां सामने आ रही हैं, जो यह दर्शाती हैं कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को कितनी गहराई तक हिला दिया था।
राष्ट्रपति जरदारी ने सार्वजनिक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि भारत की सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई के कारण पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों में भय का माहौल बन गया था।
‘जंग शुरू हो गई है, बंकर में चलिए’ — राष्ट्रपति को मिली थी चेतावनी
अपने भाषण में जरदारी ने बताया कि जब भारतीय हमले शुरू हुए, तो उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें सुरक्षा कारणों से सुरक्षित बंकर में जाने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस समय शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों में घबराहट साफ दिखाई दे रही थी।
उन्होंने बताया कि उन्हें यह कहा गया था — “युद्ध शुरू हो चुका है, हमें बंकर में शरण लेनी चाहिए।”
यह घटना 7 मई की है, जब भारत ने अचानक ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की और पाकिस्तान इस रणनीतिक कदम के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था।
ड्रोन और एयरबेस पर हमलों की पुष्टि
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी साल के अंत में हुई प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की प्रभावशीलता को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया। उन्होंने माना कि भारत ने रावलपिंडी के चकला क्षेत्र में स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था, जिससे वहां के सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा।
डार ने यह भी बताया कि भारत की ओर से 36 घंटों के भीतर कई ड्रोन पाकिस्तानी सीमा में भेजे गए, जिनमें से कम से कम एक ड्रोन ने सैन्य प्रतिष्ठान को प्रभावित किया। इससे पहले भारत इन हमलों की बात कहता रहा था, लेकिन पाकिस्तान टालमटोल करता रहा। अब यह बयान भारत की कार्रवाई की सटीकता को स्पष्ट करता है।
मुनीर को अल्ला की याद आई
जरदारी से पहले दिसंबर की शुरुआत में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद में आयोजित नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत के हमलों के दौरान उन्हें “ऊपर से मदद” महसूस हुई।
उन्होंने कहा कि 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने भारी दबाव का सामना किया। जिस समय वह भारत को करारा जवाब देने के दावे कर रहे थे, उसी दौरान हालात ऐसे बन गए कि उन्हें ईश्वर का स्मरण करना पड़ा।
शहबाज शरीफ ने भी मानी ब्रह्मोस की मार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही यह स्वीकार कर चुके हैं कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने उनके सैन्य ठिकानों को हिला दिया था। एक विदेशी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सेनाएं भारत पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रही थीं, लेकिन भारत ने उनसे पहले ही सुबह-सुबह ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला कर दिया।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय मिसाइल हमलों के दौरान रावलपिंडी एयरपोर्ट तक प्रभावित हुआ था।
पाकिस्तान की अपनी स्वीकारोक्तियों से उजागर हुई सच्चाई
शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और अब राष्ट्रपति जरदारी — तीनों के बयान यह साफ करते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को भीतर तक हिला दिया था। दुनिया के सामने खुद पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था ने इस सैन्य अभियान की प्रभावशीलता को स्वीकार कर लिया है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



