RSS: प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी ने देश के लिये एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश करते हुए कहा कि संस्कृत के उत्थान से खड़ी हो जाएगी सभी भारतीय भाषाएँ..
भारतीय शिक्षण मण्डल का 57वां स्थापना दिवस कार्यक्रम, दिल्ली प्रान्त द्वारा 26 मार्च, 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस महाविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया I
‘स्वबोध – औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का मार्ग’ विषयक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि हम आज संकल्प और शोध के साथ आगे बढ़ रहे हैं I ज़ेनज़ी को लेकर बहुत शंका हैं लेकिन हमकों चिंता करने की आवश्यकता नहीं हैं, हजारों साल के इतने आक्रमण के बाद भी हमारी सभ्यता आज भी जीवित हैं, हमनें हरेक नए विचारों को स्वीकार किया क्योंकि हमारी जड़ों में बल हैं I उन्होंने कहा कि सबको प्रयास करना चाहिए, किसी एक के प्रयास से सबको मुक्ति प्राप्त होगी, वो कौन होगा किसी को पता नहीं इसीलिए सबको योगदान करना होगा I

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा कि हमें अच्छी बातें बोलना, देखना और सुनना चाहिए, ऐसा करने से सुबोध अपने आप आयेगा, जितने दिन की आयु है उसके लिए अच्छा स्वास्थ्य और दिमाग चाहिए I मन्त्रों में तीन बार शांति उच्च्चारण का अर्थ बताते हुए कहा कि पहली शांति विश्व के लिए दूसरी समाज के लिए और तीसरी स्वयं के लिए प्रार्थना की जाती हैं I मनुष्य की बुध्दि ही उसको विशेष बनाती हैं कोई भी ताकत मानव को नहीं झुका सकती हैं जब तक कि स्वयं हार न माने I

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रान्त के संघ चालक डॉ अनिल अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था और कंटेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा में पढ़ने से दिमाग का विकास होता हैं तो हम अपनी मातृभाषा में क्यों नहीं पढ़ा सकते I हमारा संघर्ष का इतिहास रहा हैं गुलामी का नहीं I अंग्रेजों के आने के बाद भारतीयों का स्वाभिमान ख़त्म हो गया I विश्व की शीर्ष पांच इकॉनमी अपनी भाषा में पढ़ाती हैं I उन्होंने कहा कि दुनिया के पैमाने से अपने को नापेंगे तो बौना ही पाएंगे, हमको स्वयं के पैमाने पर आंकने की आवश्यकता हैं I

स्वागत भाषण में भारतीय शिक्षण मंडल, दिल्ली प्रान्त के उपाध्यक्ष प्रो. रवींद्र गुप्ता ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल, शिक्षा में फैली औपनिवेशिक मानसिकता नामक तमस को दूर करने का प्रयास कर रहा हैं | हम अज्ञानतावश आज भी मानसिक रूप से गुलाम हैं, बाहरी ज्ञान को अच्छा समझते हैं वैज्ञानिक समझते हैं, भारतीय को कमतर समझते हैं, भारतीय ज्ञान परंपरा के इस मानसिकता में अब बदलाव आ रहा हैं | प्रो. गुप्ता ने सबसे आह्वान किया कि इस दिशा में कार्य करें, केवल विवेचना ना करें | इस अवसर पर प्रान्त द्वारा प्रकाशित ‘सार्थक’ पत्रिका का विमोचन किया गया |
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी आर शंकरानंद का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ | कार्यक्रम का आरम्भ भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक और ध्येय वाक्य के उच्चारण के साथ किया गया | संचालन और अतिथियों का परिचय डॉ मनीषा चौरसिया ने प्रस्तुत किया जबकि डॉ बबिता सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और डॉ धर्मेन्द्र नाथ तिवारी के सभी का आभार व्यक्त किया | कार्यक्रम का समापन कल्याण मन्त्र और वन्दे मातरम् के साथ किया गया |
इस स्थापना दिवस के अवसर पर प्रो अजय कुमार अरोरा, प्रो धनंजय जोशी, प्रो. रवि प्रकाश टेकचन्दानी, प्रो. अजय कुमार भागी, डॉ ऋषि मोहन भटनागर, सचिन मारण, प्रो. अरविन्द कुमार, प्रो पवित्रा भारद्वाज, प्रो. आर के गुप्ता, डॉ विभूति गौड़, डॉ अमित खरखड़े, प्रो. संजय भारद्वाज, डॉ सूर्य प्रकाश, डॉ नरेश तंवर, प्रो. नारायण प्रसाद, प्रो. विजेता सिंह अग्रवाल, डॉ एस के दुबे सहित समाज और शिक्षा जगत के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।



