Wednesday, February 4, 2026
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Russia: रूस का बड़ा बयान: पश्चिमी दबाव के बाद भी भारत को तेल सप्लाई करेंगे – पुतिन-मोदी समिट पर सबकी नजर

Russia: साफ है कि रूस भारत को लेकर अपनी प्राथमिकता बनाए हुए है और पुतिन-मोदी की मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती आने की उम्मीद है..

Russia: साफ है कि रूस भारत को लेकर अपनी प्राथमिकता बनाए हुए है और पुतिन-मोदी की मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती आने की उम्मीद है..

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत आ सकते हैं। इस दौरान उनका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शिखर सम्मेलन होने वाला है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रूस

रूस अभी भी भारत का प्रमुख तेल सप्लायर है। हालांकि पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बना हुआ है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे। भारत ने इस दबाव को नजरअंदाज करते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। इसी वजह से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ भी लगाया था। लेकिन इन सबके बीच भारत में रूस के राजदूत ने साफ कहा है कि रूस भारत को ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी रखेगा।

रूस के राजदूत का बयान

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने TASS को दिए इंटरव्यू में कहा कि पश्चिमी देशों की रुकावटों के बावजूद रूस भारत को तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि रूस भारत को ऊर्जा संसाधनों की खरीद के लिए बेहतर सौदे देने को तैयार है।

उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन भारत के लिए रूस हमेशा प्राथमिकता रहेगा। उनका मानना है कि रूस आगे भी भारत का प्रमुख तेल सप्लायर बना रहेगा।
पश्चिमी दबाव को भारत ने किया खारिज

अलिपोव ने कहा कि भारत ने रूस-भारत संबंधों को कमजोर करने की पश्चिमी कोशिशों का मजबूती से सामना किया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दरकिनार कर लगाए गए एकतरफा और अवैध प्रतिबंधों को मान्यता नहीं दी।

उन्होंने कहा कि भारत समझता है कि ऐसे प्रतिबंध पश्चिमी व्यापार और वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा कम करते हैं। यही वजह है कि स्वतंत्र देश वैकल्पिक तंत्र की तलाश करते हैं। रूस को लगता है कि ब्रिक्स और एससीओ जैसे संगठन इस दिशा में बड़े अवसर प्रदान कर सकते हैं।

नए सहयोग के क्षेत्र

अलिपोव ने बताया कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस और भारत ने सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। अमेरिकी टैरिफ दबाव के कारण रूस का बाजार भारतीय समुद्री भोजन और अन्य वस्तुओं के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच संयुक्त रूप से उर्वरक उत्पादन की भी संभावना है।
पुतिन-मोदी समिट पर उम्मीदें

राजदूत अलिपोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी का आगामी शिखर सम्मेलन दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। खासकर ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक चुनौतियों के मामलों में यह बैठक अहम साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस समिट के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

 

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