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Sanskrit March : छत्रपति शिवाजी महाराज स्मृति अन्तर्जालीय संस्कृत व्याकरण ज्ञान शिविर का भव्य उद्घाटन सम्पन्न

Sanskrit Manch:छत्रपति शिवाजी महाराज स्मृति अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्जालीय दशदिवसात्मक संस्कृत व्याकरण ज्ञान शिविर का भव्य उद्घाटन सम्पन्न

Sanskrit Manch:छत्रपति शिवाजी महाराज स्मृति अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्जालीय दशदिवसात्मक संस्कृत व्याकरण ज्ञान शिविर का भव्य उद्घाटन सम्पन्न

नई दिल्ली, 28 फरवरी 2025:

छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृति में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्जालीय (ऑनलाइन) दशदिवसात्मक संस्कृत व्याकरण ज्ञान शिविर का उद्घाटन समारोह हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन संस्कृत भाषा एवं व्याकरण के प्रचार-प्रसार हेतु किया गया, जिसमें देश-विदेश से अनेक संस्कृत प्रेमियों, विद्वानों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. मुकेश कुमार ओझा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, *”आधुनिको भव संस्कृतं वद” अभियान*; एवं महासचिव, बिहार संस्कृत संजीवन समाज, पटना) ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने संस्कृत व्याकरण की वैज्ञानिकता, उसकी समकालीन प्रासंगिकता तथा इस प्रकार के ज्ञान शिविरों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में *पिंटू कुमार (राष्ट्रीय संयोजक, “आधुनिको भव संस्कृतं वद” अभियान; शोधार्थी, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय)* उपस्थित रहे। उन्होंने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल देते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के द्वारा संस्कृत शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाया जा सकता है। साथ ही सभी को यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा के तैयारी हेतु महत्वपूर्ण संदेश दिए।

कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन एवं ऐक्य मंत्र का वाचन *डॉ. लीना चौहान (राष्ट्रीय उपाध्यक्षा, “आधुनिको भव संस्कृतं वद” अभियान)* ने किया। उन्होंने संस्कृत व्याकरण शिविर के सफल आयोजन हेतु सभी प्रतिभागियों, विद्वानों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

इस उद्घाटन सत्र में अनेक विशिष्ट सदस्य भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से *डॉ. लीना चौहान, डॉ. महेश केवट, डॉ. रम्भा कुमारी, सुजाता घोष, मयंक कुमार पाण्डेय, दयानी शारदे, सदानन्द प्रसाद, अंजली मिश्रा, पवन छेत्री, नेहा भारती, अदिति चोला एवं उमेश कुमार* शामिल थे।

यह ज्ञान शिविर आगामी दस दिनों तक चलेगा, जिसमें संस्कृत व्याकरण के विविध विषयों पर विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन संस्कृत भाषा के पुनरुद्धार एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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