Friday, August 29, 2025
Google search engine
Homeअजब ग़ज़बShip With Wings: अब आ गया पानी का उड़न-खटोला !!

Ship With Wings: अब आ गया पानी का उड़न-खटोला !!

Ship With Wings: एक नया जहाज जो पेलिकन पक्षी की तरह उड़ता है, यात्रा और सुरक्षा की दुनिया को बदल सकता है..

Ship With Wings: एक नया जहाज जो पेलिकन पक्षी की तरह उड़ता है, यात्रा और सुरक्षा की दुनिया को बदल सकता है..

इस गर्मी में, अमेरिका के रोड आइलैंड में एक नए तरह के जहाज का परीक्षण किया जा रहा है जो पानी की सतह से ठीक ऊपर उड़ने की क्षमता रखता है। यह जहाज, जिसे ‘सीग्लाइडर’ नाम दिया गया है, नागरिक और सैन्य दोनों ही ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

यह अनोखा जहाज कैसा दिखता है?

इस जहाज में हवाई जहाज जैसी एक नोक और 65 फुट (20 मीटर) चौड़े पंख हैं। इसके पंखों पर लगे बारह प्रोपेलर इसे चलाते हैं। यह देखने में वहाँ के पारंपरिक मछली पकड़ने वाले जहाजों या सेलबोट से बिल्कुल अलग दिखता है।

यह कैसे काम करता है?

यह जहाज तीन तरीकों से चल सकता है:

  1. तैरना (फ्लोट मोड): यह शुरुआत में एक साधारण मोटरबोट की तरह पानी पर तैरता है।

  2. उठना (फॉयल मोड): खुले पानी में, यह हाइड्रोफॉयल्स (विशेष पंख) की मदद से पानी से ऊपर उठ जाता है। इस मोड में यह 50 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है और पानी से लगभग एक इंसान की लंबाई जितना ऊपर रहता है।

  3. उड़ना (फ्लाइ मोड): इसका सबसे खास मोड है ‘उड़ना’। इसमें यह जहाज पानी की सतह से लगभग 30 फुट (10 मीटर) ऊपर उठकर 180 मील प्रति घंटे की तेज रफ्तार से उड़ सकता है। यह उसी ‘ग्राउंड इफेक्ट’ का इस्तेमाल करता है जिसका इस्तेमाल पेलिकन या कॉर्मोरेंट जैसे समुद्री पक्षी समुद्र के ऊपर तेजी से और आसानी से ग्लाइड करने के लिए करते हैं।

यह यात्रा को कैसे बदल सकता है?

इसकी गति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह न्यूयॉर्क शहर की यात्रा, जो ट्रेन से कम से कम तीन घंटे और सड़क मार्ग से उससे भी ज्यादा समय लेती है, को महज एक घंटे में पूरा कर सकता है। इसके निर्माता, रीजेंट क्राफ्ट कंपनी, का मानना है कि यह तटीय परिवहन का एक नया और क्रांतिकारी तरीका बन सकता है। कंपनी फ्लोरिडा, हवाई, जापान और फारस की खाड़ी जैसे इलाकों में commercial ferry services शुरू करने की योजना बना रही है।

सेना के लिए इसके क्या फायदे हैं?

अमेरिकी मरीन कोर भी इस तकनीक में दिलचस्पी दिखा रही है। उनके लिए, इस तरह के जहाज प्रशांत क्षेत्र में द्वीपों के बीच सैनिकों और सामान की आवाजाही के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। सैन्य संस्करण में बैटरी की जगह जेट ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि लंबी दूरी की यात्रा की जा सके। यह जहाज रडार और सोनार की पकड़ में आसानी से नहीं आते, जिससे वे दुश्मन के लिए ‘छुपे रहने’ में मददगार हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, पनडुब्बी रोधी युद्ध और मेडिकल इमरजेंसी में भी किया जा सकता है।

इसे किसने और कैसे बनाया?

रीजेंट कंपनी की स्थापना 2020 में बिली थलहीमर और माइक क्लिंकर ने की थी। दोनों MIT के छात्र रहे हैं और बाद में बोइंग जैसी कंपनी में काम किया है। थलहीमर एक कुशल नाविक हैं और क्लिंकर का बचपन लॉबस्टर मछली पकड़ने में बीता है। उनका लक्ष्य 1930 के दशक के ‘फ्लाइंग बोट’ के आराम और शान को एक नई, सुरक्षित, शांत और प्रदूषण-मुक्त तकनीक के साथ वापस लाना है। उन्हें पीटर थिएल और मार्क क्यूबन जैसे निवेशकों का समर्थन भी मिला हुआ है।

अगला कदम क्या है?

फिलहाल, ‘पैलेडिन’ नाम का यह प्रोटोटाइप जहाज परीक्षण के दौर से गुजर रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2027 तक ये जहाज यात्रियों को ले जाने के लिए तैयार हो जाएं। इसके लिए एक manufacturing plant भी बनाया जा रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक जहाज ही माना गया है, न कि एक हवाई जहाज, क्योंकि यह पानी के रास्ते और दूसरे जहाजों के बीच ही चलता है।

चुनौतियाँ क्या हैं?

विशेषज्ञों के मन में इसकी सैन्य उपयोगिता को लेकर कुछ सवाल हैं, जैसे कि अलग-अलग मौसम और समुद्री हालात में इसकी स्थिरता, इसकी रेंज और इसकी लागत। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो यह समुद्री यात्रा और रक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा तेज, कुशल और मजेदार बन सकती है।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी इन्द्रनील)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments