Shivaji Maharaj: औरंगजेब को शिवाजी महाराज ने सीधे युद्ध में नहीं हराया, क्योंकि दोनों कभी आमने-सामने नहीं लड़े..लेकिन हरा दिया दूसरी तरह से..
लेकिन शिवाजी ने अपनी चतुराई, गुरिल्ला युद्ध, छापेमारी से मुगल साम्राज्य को बहुत कमजोर किया। उन्होंने स्वराज्य की नींव रखी, जो बाद में मराठा साम्राज्य बनी।
औरंगजेब ने दक्षिण में 25 वर्षों से अधिक समय तक मराठों से लड़ाई की, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि वह मुगल आक्रान्ता पूरी तरह से मराठों पर जीत हासिल कर सका हो। मराठों की गुरिल्ला (छापामार) युद्ध शैली से लड़ते -लड़ते आखिरकार औरंगजेब थक गया।
छत्रपति शिवाजी महाराज और मुगल बादशाह औरंगजेब के बीच संघर्ष जरूर हुआ था, लेकिन इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि शिवाजी महाराज ने किसी सीधी लड़ाई में औरंगजेब को व्यक्तिगत रूप से हराया हो।उस समय औरंगजेब खुद मैदान में कम और अपने सेनापतियों के माध्यम से युद्ध करवाता था।
1666 में आगरा की घटना जरूर हुई थी, जब शिवाजी महाराज औरंगजेब से मिलने गए थे और वहां से उन्होंने बेहद चतुराई से निकलकर इतिहास की सबसे प्रसिद्ध रणनीतिक घटनाओं में से एक को अंजाम दिया था।
ये घटना औरंगजेब के लिए बहुत शर्मिंदगी वाली थी। लोग कहते हैं कि औरंगजेब ने सिर पकड़ लिया और कहा “जादू हो गया”।
इतिहास को समझते समय हमें भावनाओं से ज्यादा तथ्यों और प्रमाणों को महत्व देना चाहिए।किसी भी महान व्यक्तित्व का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन सही जानकारी के साथ।
(दिव्यांशी)
Disclaimer:यह पोस्ट केवल सामान्य जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर लिखी गई है। यह पोस्ट केवल जानकारी और विचार साझा करने के उद्देश्य से है। किसी व्यक्ति, देश या समुदाय की भावनाओं को आहत करना इसका उद्देश्य नहीं है।



