पटना 23 अप्रैल।विहार संस्कृत संजीवन समाज एवं सर्वत्र संस्कृतम् के तत्वावधान में आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत सीता -राम स्मृति दस दिवसीय अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर का भव्य समापन समारोह सम्पन्न हुआ।
संस्कृतमय वातावरण में आयोजित यह शिविर निरन्तर 42 वां संस्कृत भाषा में समापन समारोह है। इस शिविर में प्रतिभागियों को सरल और व्यवहारिक पद्धति से संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण दिया गया।
अपने उद्घाटन उद्बोधन में अभियान के प्रधान संरक्षक एवं लोक सेवा न्यायाधिकरण, उत्तर प्रदेश के सदस्य (प्रशासनिक) डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि रामचरितमानस राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित होना चाहिए, जिसमें सीता -राम के चरित्र की व्यापक चर्चा आदर्श स्वरूप में है, जिसका आधार वाल्मीकि रामायण है।
पूर्व संयुक्त निदेशक, पेंशन उत्तर प्रदेश के श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी मुख्यातिथि के रूप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सीता -राम के चरित्र को समझे बिना भारत की कल्पना नहीं हो सकती है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि विश्व में शांति स्थापित करने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है।
अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका प्रो०रागिनी वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में विस्तार से विचार व्यक्त की। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ लीना चौहान एवम् उग्र नारायण झा, विशिष्ट अतिथि डॉ अनिल कुमार चौबे ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर शिविर के सभी प्रतिभागियों ने सीता -राम स्मृति प्रतियोगिता में संस्कृत में विस्तार से विचार व्यक्त किए, जिसमें राजकीय महिला महाविद्यालय गुलज़ारबाग पटना के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ रंजु कुमारी को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। एल एम टी महाविद्यालय सहरसा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ दीप्ति कुमारी एवं अभियान के असम प्रांत सह संयोजक डॉ विश्वजीत रुद्रपाल को संयुक्त रूप से द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया।
मध्य प्रदेश के प्रांत सह संयोजिका तारा विश्वकर्मा एवं मध्य प्रदेश के अंग्रेजी शिक्षिका वन्दना पटेरिया तृतीय पुरस्कार की विजेता बनीं। वहीं पटना की संस्कृत शिक्षिका डॉ रागनी कुमारी, मध्य प्रदेश की संस्कृत शिक्षिका उमा हनोते, दिल्ली के देवेश प्रकाश को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।
आगत अतिथियों का स्वागत उग्र नारायण झा, कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ लीना चौहान एवं ऐक्य मन्त्र डॉ नीरा कुमारी ने प्रस्तुत की।



