Wednesday, March 4, 2026
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Success Story: 5 साल पहले 35 लाख के नुकसान से हार नहींं मानी – आज बन गये मशरूम किंग

Success Story: हजारीबाग के किसान ने मशरूम खेती से बदली किस्मत, जानिए कैसे बना करोड़ों का बिजनेस..

हजारीबाग जिले के एक साधारण किसान ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सबसे बड़ा नुकसान भी सफलता की सीढ़ी बन सकता है। बेहरी गांव के रहने वाले किसान सुबोध कुमार ने पारंपरिक खेती छोड़कर मशरूम की खेती को अपनाया और आज उसी मशरूम ने उन्हें पहचान, सम्मान और आर्थिक मजबूती दिला दी है।

खेती करना वैसे ही जोखिम से भरा काम होता है, और जब बात नई तकनीक या नए प्रयोग की हो, तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। मशरूम की खेती पिछले कुछ वर्षों में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है, लेकिन कोरोना महामारी के समय यह खेती कई किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई थी। सुबोध कुमार भी इस संकट से अछूते नहीं रहे।

सुबोध कुमार पहले धान और चावल जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। लेकिन उससे मिलने वाली आमदनी से परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा था। इसी वजह से उन्होंने साल 2017 में अपने घर के एक छोटे से कमरे में मशरूम की खेती शुरू की।

धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा और साल 2020 तक वह रोजाना करीब 50 किलो मशरूम का उत्पादन करने लगे थे। उनका कारोबार अच्छी गति पकड़ चुका था, लेकिन तभी कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने सब कुछ रोक दिया।

लॉकडाउन में 35 लाख का नुकसान, फिर भी नहीं मानी हार

कोरोना लॉकडाउन के दौरान बाजार बंद हो गए और तैयार मशरूम बिक नहीं पाए। इस कारण सुबोध कुमार को लगभग 35 लाख रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इतना बड़ा झटका किसी को भी तोड़ सकता था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय दोबारा खड़े होने का फैसला किया।

जैसे ही लॉकडाउन के बाद बाजार खुले, उन्होंने फिर से कर्ज लेकर मशरूम की खेती शुरू की। उन्होंने नई योजना के साथ काम को आगे बढ़ाया और लगातार मेहनत करते रहे।

आज रोजाना 100 किलो मशरूम का उत्पादन

उनकी मेहनत रंग लाई। धीरे-धीरे उनका सारा कर्ज भी उतर गया और आज उनका मशरूम फार्म पूरी तरह से सफल बिजनेस बन चुका है। वर्तमान में वह रोजाना 80 से 100 किलो तक मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं।

मशरूम ने दिलाई नई पहचान और रोजगार

सुबोध कुमार खुद बाजार जाकर और आसपास के गांवों में घूम-घूमकर मशरूम बेचते हैं। कई व्यापारी भी सीधे उनके फार्म पर आकर मशरूम खरीदते हैं। एक समय घाटे में चल रही यह खेती अब उनके लिए स्थायी आय का मजबूत साधन बन चुकी है।

सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपने इस मशरूम फार्म से चार अन्य लोगों को भी रोजगार दे रखा है। आज मशरूम की खेती ने उन्हें एक सफल किसान और उद्यमी के रूप में नई पहचान दिला दी है।

(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल)

 

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