Tuvalu: जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में तुवालु नाम का यह छोटा-सा देश पूरी तरह समुद्र में डूब जाएगा..
कई वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह घटना लगभग 80 साल में होगी, लेकिन कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह समय इससे भी बहुत कम हो सकता है — लगभग अगले 25 सालों में ही यह देश लहरों के नीचे गायब हो सकता है।
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के कारण एक नए तरह के संकट का सामना कर रही है। जिन इलाकों में हमेशा भरपूर बारिश होती थी, अब वहां भयंकर सूखा पड़ रहा है। वहीं, जो जगहें हमेशा सूखी और बंजर रही हैं, जैसे रेगिस्तान, वहां अब असामान्य और भारी बारिश हो रही है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि यह सब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है। धरती के ध्रुवीय इलाकों में मौजूद विशाल बर्फ की चादरें और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसके कारण समुद्र का जलस्तर लगातार ऊपर उठ रहा है। यह बढ़ता जलस्तर कई देशों के लिए सीधा खतरा बन चुका है, क्योंकि उनके तटीय इलाके और द्वीप अब डूबने की कगार पर हैं।
तुवालु: डूबने के खतरे में एक खूबसूरत देश
तुवालु एक बेहद सुंदर द्वीपीय देश है, जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में स्थित है। यह देश 9 छोटे-छोटे कोरल द्वीपों से मिलकर बना है।
यहां की कुल आबादी सिर्फ 11,000 लोगों के करीब है। इसकी सबसे खास बात यह है कि समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई केवल 2 मीटर है।
लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है — समुद्र का बढ़ता जलस्तर और ऊंची लहरें यहां के लोगों के लिए रोजाना खतरा बन रही हैं। तेज ज्वार-भाटा और लहरें बार-बार बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर देती हैं। इतना ही नहीं, तुवालु के दो द्वीप पहले ही पूरी तरह समुद्र में डूब चुके हैं।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: पूरा देश गायब हो जाएगा
जलवायु वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार, यदि हालात ऐसे ही रहे तो पूरा तुवालु देश अगले 80 साल में पानी में समा जाएगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब 25 साल में ही हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया की मदद और ऐतिहासिक समझौता
इस बड़े संकट के समय तुवालु की मदद के लिए ऑस्ट्रेलिया आगे आया है। साल 2023 में दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसे फलेपिली संधि (Falepili Treaty) कहा जाता है।
इस समझौते के तहत हर साल 280 तुवालु नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया में स्थायी रूप से बसने की अनुमति दी जाएगी। इन लोगों को ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार और घर समेत सभी बुनियादी अधिकार दिए जाएंगे।
यह दुनिया में पहली बार हो रहा है जब किसी देश की पूरी आबादी को जलवायु परिवर्तन के कारण अपना वतन छोड़कर दूसरे देश में बसना पड़ रहा है।
चेतावनी पूरी दुनिया के लिए
तुवालु लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। तुवालु के नेताओं का कहना है कि यह केवल उनके देश का संकट नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। यदि दुनिया ने अब भी कदम नहीं उठाया, तो भविष्य में कई और द्वीपीय देश दुनिया के नक्शे से हमेशा के लिए गायब हो सकते हैं।
(प्रस्तुति – त्रिपाठी इन्द्रनील)