Wednesday, February 4, 2026
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US & Saudi Arabia: अमेरिका–सऊदी रणनीतिक गठबंधन हुआ मजबूत – परमाणु ऊर्जा, F-35 सौदा & बदलती वैश्विक राजनीति का नया दौर

US & Saudi Arabia: डॉलर की वैश्विक पकड़ को मजबूत करने के लिये अमेरिका के चाचा ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ मजबूती से पकड़ना शुरू कर दिया है..

US & Saudi Arabia: डॉलर की वैश्विक पकड़ को मजबूत करने के लिये अमेरिका के चाचा ट्रम्प ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ मजबूती से पकड़ना शुरू कर दिया है..

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रिश्तों में नया मोड़ आया है। पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब और चीन की बढ़ती नज़दीकियों ने वॉशिंगटन की चिंता बढ़ा दी थी—खासतौर पर तब, जब दोनों देशों ने करेंसी स्वैप समझौता किया था। इस समझौते के तहत चीन और सऊदी अरब ने बिना डॉलर के, अपनी-अपनी मुद्रा में व्यापार करने पर सहमति जताई थी।

इसे डॉलर की वैश्विक पकड़ के लिए एक बड़ा झटका माना गया। इसी वजह से अमेरिका ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दीं।

ऐतिहासिक मुलाकात और नया समझौता

वॉइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस की मुलाकात में एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता हुआ। इस समझौते को दोनों देशों के रिश्तों में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि सैन्य, परमाणु और टेक्नोलॉजी—तीनों स्तरों पर बड़े बदलाव की शुरुआत है।

F-35 लड़ाकू विमान और भारी रक्षा सौदा

इस बैठक में अमेरिका ने सऊदी अरब को दुनिया की सबसे उन्नत पाँचवीं पीढ़ी के F-35 लड़ाकू विमान देने की मंजूरी दे दी। इसके साथ लगभग 300 अमेरिकी टैंकों की सप्लाई भी तय की गई।
वॉइट हाउस के अनुसार, यह रक्षा समझौता दोनों देशों की 80 साल से अधिक पुरानी साझेदारी को और मजबूत करेगा। इससे अमेरिकी रक्षा उद्योग में बड़े पैमाने पर रोजगार और अरबों डॉलर का निवेश बढ़ेगा।

परमाणु ऊर्जा पर बड़ा कदम

इस दौरे में नागरिक परमाणु ऊर्जा पर भी एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे आने वाले कई दशकों तक चलने वाले विशाल परमाणु परियोजनाओं का रास्ता साफ हो गया है।

अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यह साझेदारी कड़े नॉन-प्रोलिफरेशन नियमों के तहत होगी—यानी सऊदी अरब को परमाणु ऊर्जा तो मिलेगी, लेकिन उसका इस्तेमाल हथियार बनाने में नहीं किया जा सकेगा।

आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने की तैयारी

अमेरिका का अनुमान है कि सऊदी अरब अपने 600 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचा सकता है। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बहुत बड़ा विस्तार देगा।
इसके साथ ही रणनीतिक सुरक्षा समझौते पर भी दस्तखत हुए जो रक्षा सहयोग को और गहरा करेगा।

महत्वपूर्ण खनिज और AI पर सहयोग

दोनों देशों ने सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर एक नया फ्रेमवर्क बनाया है।
साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी समझौता हुआ है, जिसके तहत सऊदी अरब को अमेरिकी एआई तकनीक तक सीमित और नियंत्रित पहुंच मिलेगी।

खशोगी हत्याकांड पर विवाद

इस यात्रा के दौरान एक विवाद भी सामने आया। एक पत्रकार ने वॉइट हाउस में जमाल खशोगी की हत्या पर सवाल पूछा, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप नाराज़ हो गए। उन्होंने रिपोर्टर को रोकते हुए कहा कि वह उनके मेहमान को शर्मिंदा न करे।

ट्रंप ने दावा किया कि क्राउन प्रिंस का इस हत्या से कोई संबंध नहीं है, जबकि 2021 में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने विपरीत रिपोर्ट दी थी। ट्रंप ने खशोगी को “विवादित व्यक्ति” कहा और एबीसी न्यूज पर “फेक न्यूज” चलाने का आरोप लगाया।

दुनिया की राजनीति में बड़ा असर

इस पूरे समझौते का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यह तब हो रहा है जब – चीन सऊदी अरब के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, ईरान क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, और इज़रायल–अरब देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में अमेरिका–सऊदी अरब का यह नया गठबंधन दुनिया की भू-राजनीति पर गहरी छाप छोड़ेगा।

क्या बदलने वाला है?

यह समझौता सऊदी अरब को आधुनिक सैन्य तकनीक, परमाणु ऊर्जा और एआई में ताकत देगा –
वहीं अमेरिका को रक्षा उद्योग, निवेश और वैश्विक प्रभाव बनाए रखने में बड़ा फायदा मिलेगा। आने वाले समय में यह गठबंधन मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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