Speak Sanskrit: देवभाषा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प अविराम रूप से अस्तित्वमान है..संस्कृत शिक्षण व संभाषण के निरंतर गतिमान 39वें ऑनलाइन सेशन के सातवें दिन हुआ विशेष संबोधन..
पटना 19 दिसंबर। संस्कृत बोलने के लिए संस्कृत में सोचने की क्षमता को विकसित करना होगा। इसके लिए निरन्तर संस्कृत सम्भाषण शिविर में भाग लेना होगा। संस्कृत सम्भाषण शिविर में सरल पद्धति से अनुकरण द्वारा संस्कृत बोलने का अभ्यास कराया जाता है-
उपरोक्त सभी सभी बातें आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहीं।
डॉक्टर ओझा वर्द्धमान महावीर स्मृति अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय दशदिवसात्मक संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर के सातवें दिन सभी सदस्यों को सम्बोधित कर रहे थे। डॉ मुकेश कुमार ओझा ने क्रिया ज्ञान की विस्तार से जानकारी दी एवम् उसका अभ्यास भी कराया।
प्रो रागिनी वर्मा, डॉ लीना चौहान, डॉ नीरा कुमारी,डा रागनी कुमारी,तारा विश्वकर्मा, मुरलीधर शुक्ल, विमलेश पाण्डेय, डॉ बिधुबाला, डॉ दीप्ति कुमारी, डॉ अवन्तिका कुमारी, डॉ एकता वर्मा,बीजेन्द्र सिंह, रामनाथ पाण्डेय आदि की प्रस्तुति सराहनीय रही।
अभियान के प्रधान संरक्षक एवं माननीय सदस्य (प्रशासकीय) लोक सेवा न्यायाधिकरण उत्तर प्रदेश सरकार तथा संयुक्त सचिव पेंशन उत्तर प्रदेश श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भाषा केवल भारत की एक भाषा नहीं अपितु भारत की आत्मा है।
संस्कृत के विना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। भारतीयवासियों को शाकाहारी भोजन करना चाहिए। वर्द्धमान महावीर ने अहिंसा परमो धर्म:का उपदेश दिया। इस भाषा की रक्षा के लिए निरन्तर शिविर का आयोजन अत्यावश्यक है।



