Speak Sanskrit: पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी जयन्ती पर महामना मालवीय जी के साथ वाजपेयी जी की स्मृतियों का पुनर्जागरण हुआ पटना की अंतर्जालीय संस्कृत संगोष्ठी में..
वनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना मदनमोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी दोनों भारतरत्न राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत थे. संयोग से राष्ट्र की ये दोनों विभूतियाँ मनसा-वाचा-कर्मणा समानरूप से भारत की संस्कृति और संस्कृत के संवाहक थे. एक ओर जहाँ विश्व स्तरीय वनारस विश्वविद्यालय की स्थापना कर मदनमोहन मालवीय ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किया. वहीं प्रधानमंत्री के रूप में अटलविहारी वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण कराकर भारत के शक्ति सम्पन्न होने का कूनीतिक सुरक्षा कवच विश्व बिरादरी के सामने पेश किया.
यह विचार राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ओझा और प्रधान संरक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, ने संयुक्त रूप से व्यक्त किये. यह अवसर था विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना और आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान अंतर्गते महापुरुष द्वय महामना मदनमोहन मालवीय एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी जयन्ती पर अंतर्जालीय संस्कृत संगोष्ठी का.
इस संगोष्ठी में देश भर से पचास से अधिक संस्कृतज्ञों एवं विद्वानों ने विचार रखते हुए दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व व कृतित्व को परमार्थमय बताया. सुधि वक्ताओं ने हर्ष जताते हुए कहा कि भारतरत्न दोनों विभूतियों के जीवन आदर्शों को संस्कृत के माध्यम से स्मरण करने का अवसर भारत को विश्वगुरू की पदवी पर ले जाने की अद्भुत पहल है.
अध्यक्षता करते हुए आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डा. मुकेश कुमार ओझा ने महामना मदनमोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी को भारत निर्माण का सच्चा राष्ट्रनायक बताया. कहा ऐसी महान विभूतियाँ सदियों बाद जन्मती हैं. डॉ. ओझा ने कहा दोनों का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा.
उद्घाटनकर्ता अभियान के प्रधान संरक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, सदस्य (प्रशासकीय) राज्यलोक सेवा न्यायाधिकरण, उत्तर प्रदेश ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटलविहारी वाजपेयी को राजनीति का शिखरपुरुष कहा और भारतरत्न मदनमोहन मालवीय को शिक्षा-संस्कृति का प्रज्ञानपुरुष बताया. डॉ. सिंह ने कहा दोनों महापुरुषों का जीवन राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ भारतीय संस्कृति में रचा बसा था.
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संयोजिका, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान प्रो. रागिनी वर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी और मदनमोहन मालवीय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला.
मुख्य वक्ता अभियान के उपाध्यक्ष उग्र नारायण झा ने दोनों महापुरुषों के जीवन आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला. विशिष्ट अतिथि संरक्षक डॉ. अनिल कुमार चौबे ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी और मालवीय जी के जीवन को एक दर्शन बताया.
डॉ. अवन्तिका कुमारी- संस्कृत विभागाध्यक्ष,जगत नारायण लाल महाविद्यालय, खगौल पटना, डॉ. नीरा कुमारी, सहायक आचार्या, संस्कृत महाविद्यालय फतुहा पटना, डॉ. दीप्ति कुमारी -संस्कृत विभागाध्यक्ष, एमएलटी महाविद्यालय सहरसा ने संस्कृत विचारों से दोनों विभूतियों के व्यक्तित्व व कृतित्व को सराहा.
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. लीना चौहान ने स्वागत और धन्यवाद ज्ञापित किया. वैदिक मंत्र डा. दीप्ति कुमारी ने और ऐक्यमन्त्र तारा विश्वकर्मा ने प्रस्तुत किया. संगोष्ठी में डॉ. एकता वर्मा, तारा विश्वकर्मा, डॉ. रागनी कुमारी, मुरलीधर शुक्ल, डॉ. राघव नाथ झा, श्रद्धा कुमारी ने विचार रखे. संरक्षक महेश मिश्र सहित संस्कृतज्ञ शामिल रहे.



