Parakh Saxena writes: बांग्लादेश के इस संकट के माध्यम से भारत के उन हिन्दुओं को जगाइये जिन्हे मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट से डर नहीं लग रहा लेकिन बांग्लादेश के हिन्दुओं के अंदर एक सेक्युलर और वामपंथी भी दिखाई देगा आपको..
बांग्लादेश के हिन्दुओ के साथ जो हो रहा है गलत है लेकिन ये भी तय मानिये कि जिस दिन आपने इन्हे शरण दी अगले दिन ये कहेंगे कि वहाँ के मुसलमानो ने हमारी बाहर निकलने मे बड़ी मदद की और हर मुसलमान बुरा नहीं है।
बांग्लादेश पर सैन्य चढ़ाई करनी है, बेशक कीजिये। फिर अगला अचीवमेंट क्या होगा? या तो आप वहाँ के 14 करोड़ मुसलमानो को मार देंगे जो कि प्रैक्टिकली नहीं हो सकता, दूसरा यदि आप सिर्फ बम गिराकर आ गए तो वहाँ हिन्दुओ का और अधिक कत्लेआम होगा और उन्ही हिन्दुओ की दूसरी पीढ़ी भारत को दोषी ठहराएगी।
वामपंथ बंगाल की धमनियो मे बहता है, उस सेक्युलरिज्म को आप ऐसे नहीं निकाल सकते। वायरस जहाँ जाएगा वहाँ फैलेगा, ये साहित्य की भूमि है और साहित्य का प्रवाह समुद्र से भयावह है। मुसलमानो पर यह कारगर नहीं रहा क्योंकि वहाँ तब्लीगी जमात ने बहुत मेहनत की है। हिन्दुओ पर क्या कारगर रहा?
भावुक होना सही है, एक हिन्दू को जलाया गया उसके लिए खून खौलना भी चाहिए ये मोमेंटम हर हिन्दू मे बने रहना चाहिए। लेकिन ज़ब आप कहते है कि वहाँ के हिन्दू को बचाना चाहिए तो शायद आपने हिन्दू को कभी जाना नहीं।
उनकी भारत वापसी मे यदि एक मुसलमान ने भी मदद कर दी तो वो हिन्दू भारत मे आकर हिन्दू नहीं बल्कि खौलता सेक्युलर बन जायेगा जिससे टकरायेगा उसका माइंड वाश करेगा। आज आप वीडियो दिखाकर भारत के सेक्युलरों की घर वापसी करा रहे है मगर क्या नजारा होगा ज़ब जलने वाला बोलेगा कि मुझे मुसलमानो ने नहीं आग ने जलाया था।
हिन्दू को है ये शौक कि वो खुद को बुद्धिजीवी दिखाने के लिए अनपढ़ों जैसी बातें करें और बांग्लादेशी हिन्दू इससे अलग नहीं है। आप पहले ही 115 करोड़ हो, एक करोड़ और भी जुड़ गए तो क्या हासिल कर लोगे? इन एक करोड़ मे 50 लाख वामपंथी भी शरण के रास्ते घुस गए तो भारत वालों को आपने 3-5 साल पहले ही ठिकाने लगाया है।
बड़ी मुश्किल से हम उस स्थिति मे आये है जहाँ शासन भी हमारा है और व्यवस्था भी, इन 50 लाख को घुसाकर क्यों बना बनाया बिगाड़ना चाहते हैं। यकीन मानिये बंगाली के केस मे 50 नहीं 90 लाख सेक्युलर घुसेंगे। इसलिए भावनायें अपनी जगह हैं लेकिन वास्तविकता के लिए आप अलग चश्मा नहीं ले सकते वो भी इन्ही आँखों से देखिये।
ये सब थ्योरी है हो सकता है गलत भी हो जाये हो सकता है वे सेक्युलर ना निकले और हिंदूवादी ही हो लेकिन क्या आप रिस्क लेना चाहते हो? कट्टर रहे तो ज्यादा कुछ नहीं जोड़ पाएंगे लेकिन यदि यहाँ आकर वामपंथी बन गए तो बना बनाया देश बिगाड़ देंगे और संभव है पश्चिम बंगाल को काटने का प्लान भी बनायें।
भावनाओं को एक तरफ रखिये और यथार्थ से सामना कीजिये। बांग्लादेश के इस संकट के माध्यम से भारत के उन हिन्दुओं को जगाइये जिन्हे मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट से डर नहीं लग रहा लेकिन बांग्लादेश के हिन्दुओं के अंदर एक सेक्युलर और वामपंथी भी देखिये। जहाज डूबाने को एक छेद पर्याप्त है और आप तो एक करोड़ कीलों की बात कर रहे है।
विशेषार्थ – नस्लभेद बंगाली हिन्दू नहीं अपितु समूचे हिन्दू समाज के लिए है, आज भी एक औसत हिन्दू मे 2014 से पहले वाला हिन्दू ही नजर आता है जिसका ध्येय वाक्य था “ऑल रिलीजन्स आर सेम”
(परख सक्सेना)



