Wednesday, February 4, 2026
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Israel: भारत के दोस्त का चतुर ऐक्शन – पाकिस्तान के दोस्त की बढ़ी टेन्शन

Israel: भारत के रणनीतिक मित्र इजरायल ने खेला ऐसा बड़ा कूटनीतिक दांव, पाकिस्तान के सहयोगी तुर्की की बढ़ी बेचैनी — दुनिया के नक्शे पर उभरने जा रहा नया मुस्लिम देश सोमालीलैंड..

Israel: भारत के रणनीतिक मित्र इजरायल ने खेला ऐसा बड़ा कूटनीतिक दांव, पाकिस्तान के सहयोगी तुर्की की बढ़ी बेचैनी — दुनिया के नक्शे पर उभरने जा रहा नया मुस्लिम देश सोमालीलैंड..

दुनिया की भू-राजनीतिक बिसात पर एक ऐसा मोड़ आने जा रहा है, जिसने न केवल मुस्लिम देशों के आपसी समीकरणों को हिला दिया है, बल्कि भारत-पाकिस्तान के मित्र देशों के बीच तनाव को भी खुलकर सामने ला दिया है। भारत के बेहद करीबी सहयोगी इजरायल ने इस बार ऐसा कूटनीतिक कदम उठाया है, जिससे पाकिस्तान के भरोसेमंद दोस्त तुर्की और मिस्र जैसे देश बुरी तरह असहज हो गए हैं।

इजरायल ने अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में स्थित सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र, संप्रभु और अलग देश के रूप में आधिकारिक मान्यता देकर इतिहास रच दिया है। यह फैसला सोमालीलैंड के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह इलाका पिछले 34 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय पहचान पाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

34 साल बाद मिला वैश्विक दरवाज़ा

सोमालीलैंड ने वर्ष 1991 में सोमालिया से अलग होकर अपनी आज़ादी की घोषणा की थी। इसके बाद यहां अपनी सरकार, संसद, सेना, पुलिस, चुनावी प्रणाली और संविधान तक तैयार हो गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश ने इसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं किया था।

अब इजरायल इस क्षेत्र को मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है, जिससे सोमालीलैंड के अंतरराष्ट्रीय भविष्य के दरवाज़े अचानक खुल गए हैं।

इजरायल-सोमालीलैंड के बीच पूर्ण राजनयिक रिश्ते तय

इजरायल के विदेश मंत्री गिडिओन सआर ने औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति बन चुकी है। इसके तहत:

दोनों देशों में एक-दूसरे के दूतावास खोले जाएंगे, राजदूतों की नियुक्ति होंगी और रक्षा, खुफिया और व्यापारिक सहयोग बढ़ाया जाएगा।

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस फैसले को अब्राहम समझौते की भावना के अनुरूप बताया है, जिनके तहत 2020 में कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे।

नेतन्याहू का मास्टरस्ट्रोक

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वीडियो कॉल के ज़रिये सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही से सीधी बातचीत की और उन्हें येरुशलम आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया, जिसे राष्ट्रपति ने तुरंत स्वीकार कर लिया।

इजरायली नेतृत्व का मानना है कि सोमालीलैंड अब अफ्रीका और अरब सागर के बीच उनकी नई रणनीतिक चौकी बन सकता है।

तुर्की और मिस्र भड़के

इजरायल के इस फैसले से सबसे ज्यादा नाराजगी तुर्की और मिस्र में देखी जा रही है। तुर्की ने आरोप लगाया है कि इजरायल यह कदम उठाकर सोमालिया की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है और अफ्रीका में अपनी विस्तारवादी नीति को आगे बढ़ा रहा है।

तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का करीबी सहयोगी रहा है, और ऐसे में इजरायल का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान समर्थक धड़े के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

अमेरिका को भी हुई चिन्ता

इस फैसले से अमेरिका भी असहज दिखाई दे रहा है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि अमेरिका सोमालीलैंड को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है।

वर्तमान में अमेरिकी सेना सोमालिया में अल-शबाब आतंकी संगठन के खिलाफ अभियान चला रही है और वहां की केंद्र सरकार को सुरक्षा सहायता भी दे रही है। ऐसे में सोमालीलैंड को अलग देश मानना अमेरिका के लिए रणनीतिक उलझनें पैदा कर सकता है।

इजरायल क्यों कर रहा है यह बड़ा दांव?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोमालीलैंड का भौगोलिक स्थान इजरायल के लिए बेहद अहम है। यह इलाका यमन के पास स्थित है, जहां इजरायल हूती विद्रोहियों के खिलाफ पहले से ही सैन्य अभियान चला रहा है।

इजराइली थिंक टैंक रिपोर्ट्स के अनुसार

सोमालीलैंड इजरायल का नया खुफिया निगरानी केंद्र बन सकता है। यहां से रेड सी और अरब सागर पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। संयुक्त अरब अमीरात का सैन्य अड्डा पहले से यहां मौजूद है। अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी इस क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं।

62 लाख की आबादी वाला नया संभावित देश

करीब 62 लाख की आबादी वाला सोमालीलैंड एक लोकतांत्रिक ढांचे के तहत संचालित होता है। यहां नियमित चुनाव होते हैं और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में पत्रकारों और विपक्ष पर दबाव बढ़ने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

इजरायल की मान्यता के बाद सोमालीलैंड पहली बार वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है, और अब अन्य देशों द्वारा भी इसे मान्यता देने की संभावनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)

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