Speak Sanskrit: देवभाषा संस्कृत को जनभाषा की प्रतिष्ठा प्रदान करने का संकल्प-रथ निरंतर गतिमान है..अब संपन्न हुआ है शिक्षक प्रशिक्षण संभाषण शिविर का समापन समारोह..
वसंतोत्सव एवं सरस्वती पूजा को लेकर दस दिनों तक लगातार देश भर में संस्कृत की ज्ञान धारा प्रवाहित होती रही. विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों से लेकर विभिन्न विद्यालयों और संस्थानों, विधिविशेषज्ञों, प्रशासनिक क्षेत्र के संस्कृतज्ञों एवं विद्वान वक्ताओं के परस्पर हुए संस्कृत संवाद व वन्दना में सरस्वती को ज्ञानदात्री बताया गया.
देवभाषा संस्कृत और सनातन संस्कृति को समर्पित यह अवसर था बिहार संस्कृत संजीवन समाज पटना एवं आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान अंतर्गते दशदिवसीय अंतर्जालीय महादेवी सरस्वती संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण संभाषण शिविर के समापन समारोह का. वक्ताओं ने सर्वत्र संस्कृतं का संकल्प दोहराते हुए कहा कि घर-घर और जन-जन तक संस्कृत विस्तार ही देवी सरस्वती की सच्ची आराधना है.
अभियान के प्रधान संरक्षक एवं उप्र लोक सेवा न्यायाधिकरण के सदस्य (प्रशासनिक) डॉ. अनिल कुमार सिंह (सेनि आईएएस) ने देवी सरस्वती की पूजा और महत्ता को समर्पित दशदिवसात्मक संस्कृत शिविर को भारतीय ज्ञान परम्परा का अनूठा प्रयोग बताया.
डॉक्टर चौबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा सभी में ज्ञान, बुद्धि, विवेक की वृद्धि की इच्छा होती है और इसके लिए देवी सरस्वती की पूजा-आराधना करते हैं. प्रधान संरक्षक डॉ. अनल कुमार सिंह ने कहा कि सरस्वती देवी को शारदा, शतरूपा, वाणी, वाग्देवी, वागेश्वरी और भारती आदि विभिन्न नाम-रूपों में जाना और पूजा जाता है।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार संस्कृत संजीवन समाज, पटना के महासचिव डॉ. मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि हिंदू धर्म में ज्ञान की देवी के रूप में सरस्वती पूज्य हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी और पार्वती के साथ तीन प्रमुख देवियों में से वे एक हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ओझा ने कहा कि ज्ञान, शिक्षा, विद्या, कला, वाणी, कविता, संगीत, रचनात्मकता, शुद्धि, भाषा और संस्कृति की देवी के रूप में सरस्वती को पूजा जाता है।
अपने संबोधन में डॉक्टर ओझा ने कहा दशदिवसात्मक संस्कृत शिविर के माध्यम से देश भर के संस्कृतज्ञों ने स्वयं को ज्ञानवान बनाने की प्रार्थना के साथ भारतीय संस्कृति और ज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के लिए देवी सरस्वती की आराधना की. उन्होंने कहा ज्ञान वृद्धि का यह अभियान संस्कृत शिविरों के माध्यम से निरंतर संचालित रहेगा, जिसमें सभी संस्कृतज्ञों और सुधीजनों की सहभागिता व सहयोग सच्चे रूप में देवी सरस्वती की पूजा है.
मुख्य अतिथि पूर्व संयुक्त निदेशक पेंशन उत्तर प्रदेश शासन धर्मन्द्रपति त्रिपाठी ने कहा लगातार लगभग चालीस संस्कृत शिवरों का संचालन देवी सरस्वती की पूजा का एक रूप है. श्री त्रिपाठी ने कहा देवी सरस्वती की कृपा से व्यक्ति को शिक्षा, वाणी और कला का विशेषज्ञ बनता है। सरस्वती की कृपा इसका प्रमाण है कि ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, वरन वह संगीत, कला, विज्ञान और आत्म-चिंतन से भी प्राप्त हो सकता है। कहा देवी सरस्वती विवेक और विनम्र भाव की प्रदात्री हैं।
स्वागत करते हुए डॉ. रागिनी वर्मा ने विचार व्यक्त किये. अपने विचार प्रस्तुत करने के साथ ही डॉक्टर लीना चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया. तारा विश्वकर्मा ने ऐक्यमंत्र प्रस्तुत किया.
इस संस्कृत शिविर में डॉ. अनिल कुमार चौबे ने संस्कृत गीत और महेश मिश्र ने डॉ मिथिलेश कुमारी मिश्र रचित संस्कृत गीत प्रस्तुत किया, डॉ. नीरा कुमारी, डॉ. अवन्तिका कुमारी, डॉ. मधु कुमारी, उग्रनिरायण झा, अदिति चोला, दीप्ति कुमारी, मुरलीधर शुक्ल, मुकेश ने विचार व्यक्त किये.
भगवती सरस्वती स्मृति संस्कृत सम्भाषण प्रतियोगिता परिणाम 2026 में प्रथम पुरस्कार डॉ. दीप्ति कुमारी, संस्कृत विभागाध्यक्ष, एमएलटी महविद्यालय, सहरसा बिहार एवं अदिति चोला, संस्कृत स्नातकोत्तर, कासगंज , उत्तर प्रदेश को प्रदान किया गया.
द्वितीय पुरस्कार डॉ. रागनी कुमारी, संस्कृत शिक्षिका, पटना एवं तारा विश्वकर्मा-भोपाल को प्रदान किया गया.
तृतीय पुरस्कार मुरलीधर शुक्ल, संस्कृत शिक्षक:, बांकीपुर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पटना व वन्दना पटेरिया, अंग्रेजी शिक्षिका, सागर मध्यप्रदेश को मिला।
विशेष पुरस्कार बीजेन्द्र सिंह-संस्कृत शोध छात्र:, दिल्लीविश्वविद्यालय, उमा हनोते (संस्कृत शिक्षिका, भोपाल) श्रद्धा कुमारी (कार्यालय सचिव, बिहार संजीवन समाज, पटना) एवं विकास (संस्कृत छात्र, पटना) को प्रदान किया गया.
निर्णायक मण्डल में प्रो० रागिनी वर्मा (राष्ट्रीय संयोजिका, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान), डॉ लीना चौहान (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) एवं डॉकटर नीरा कुमारी (सदस्य) रहीं.



