India-ChinaTrade: The Mummy of All Deals? – भारत-चीन व्यापार $155.6 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर -क्या अब FTA की बारी है?
वैश्विक व्यापार के मंच पर भारत इस समय ‘गोल्डन रन’ से गुजर रहा है। यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौतों के बाद, अब पड़ोसी देश चीन के साथ भी आर्थिक रिश्तों में नई गर्माहट देखी जा रही है। भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $155.6 अरब (लगभग ₹13 लाख करोड़) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह पिछले वर्ष की तुलना में 12% की वृद्धि दर्शाती है, जो सीमा पर तनाव कम होने और राजनयिक संबंधों के ‘रीसेट’ होने का स्पष्ट संकेत है।
चीन के साथ ‘ट्रेड डील’ की चर्चा क्यों?
भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ जो समझौता किया (टैरिफ 50% से घटकर 18%), उसे विशेषज्ञों ने ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है। अब सवाल यह है कि क्या चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) संभव है?
व्यापार घाटा (Trade Deficit): सबसे बड़ी चुनौती $116 अरब का रिकॉर्ड व्यापार घाटा है। भारत चीन से आयात बहुत अधिक करता है, जबकि निर्यात तुलनात्मक रूप से कम है।
भारत का पलड़ा भारी: अमेरिका और EU के साथ भारत ‘सरप्लस’ में था, लेकिन चीन के मामले में भारत एक विशाल ‘बाजार’ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस स्थिति का लाभ उठाकर चीन को अपनी शर्तों पर व्यापार समझौता करने के लिए मजबूर कर सकता है।
रिश्तों में सुधार के 5 बड़े संकेत
चीनी राजदूत ने तियानजिन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को संबंधों की नई शुरुआत बताया। इसके कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
निर्यात में वृद्धि: भारत से चीन को होने वाले निर्यात में 9.7% का उछाल आया है।
सीधी उड़ानें: दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से बहाल हो गई हैं।
धार्मिक पर्यटन: कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः शुरू हुई, जिसमें 20,000 भारतीयों ने हिस्सा लिया।
वीजा सुविधा: चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा जारी करना शुरू कर दिया है।
ब्रिक्स (BRICS) सहयोग: चीन ने इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन करने का वादा किया है।
क्या हैं भारत की शर्तें और चिन्ताएं?
रिकॉर्ड व्यापार के बावजूद, नई दिल्ली ने बीजिंग के सामने अपनी चिंताएं स्पष्ट कर दी हैं:
मार्केट एक्सेस: भारतीय कंपनियों को चीनी बाजारों में (विशेषकर आईटी और फार्मा) पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है।
निर्यात प्रतिबंध: उर्वरक (Fertilizers), रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे क्षेत्रों में चीन के प्रतिबंधों पर भारत ने आपत्ति जताई है।
सहयोगात्मक अधिशेष: चीनी राजदूत ने आश्वासन दिया है कि चीन जानबूझकर व्यापार अधिशेष नहीं बनाता और वह भारतीय उत्पादों के लिए अपने दरवाजे और अधिक खोलने को तैयार है।
मदर ऑफ ऑल डील्स?
अगर भारत और चीन के बीच एक संतुलित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो जाता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा घटनाक्रम होगा। जहाँ अमेरिका के साथ डील ने भारतीय ‘एक्सपोर्ट’ को पंख दिए हैं, वहीं चीन के साथ एक सही डील भारत के ‘इम्पोर्ट बिल’ को कम कर सकती है और व्यापार घाटे की खाई को पाट सकती है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद, 2026 का यह आर्थिक मेल-मिलाप एशिया की नई शक्ति संतुलन की ओर इशारा कर रहा है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



