नक्शे पर खींची गई एक साधारण सी लकीर… लेकिन 133 साल बाद भी वह खून से रंगी जा रही है। यह लकीर है डूरंड लाइन। एक ऐसी सीमा, जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने तय किया था, लेकिन जिसकी कीमत आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान चुका रहे हैं।
क्या है डूरंड लाइन?
डूरंड लाइन 12 नवंबर 1893 को तय हुई थी। यह समझौता ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव Sir Mortimer Durand और अफगान अमीर Abdur Rahman Khan के बीच हुआ था। करीब 2,640 किलोमीटर लंबी यह रेखा ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के प्रभाव क्षेत्र को अलग करने के लिए खींची गई थी।
1947 में जब पाकिस्तान बना, तो यही लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा बन गई। लेकिन यहीं से विवाद शुरू हुआ।
विवाद की असली वजह
अफगानिस्तान ने कभी भी डूरंड लाइन को स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। कारण यह है कि यह सीमा पश्तून इलाकों को दो हिस्सों में बांट देती है। एक हिस्सा पाकिस्तान में है और दूसरा अफगानिस्तान में।
इसी वजह से “पश्तूनिस्तान” की मांग और सीमा पार तनाव दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट भरते रहे हैं।
इतिहास में क्या-क्या हुआ?
19वीं सदी में ब्रिटेन और अफगानिस्तान के बीच कई युद्ध हुए। 1919 में थर्ड एंग्लो-अफगान युद्ध के बाद एक समझौता हुआ, लेकिन बाद में अफगानिस्तान ने फिर इस सीमा पर आपत्ति जताई।
1947 में पाकिस्तान बनने के बाद भी अफगानिस्तान ने इस सीमा को लेकर सवाल उठाए। पाकिस्तान का कहना है कि यह उसकी वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा है और अधिकतर देश इसे मानते हैं।
आज क्यों भड़क रहा है तनाव?
आज डूरंड लाइन सिर्फ नक्शे की रेखा नहीं, बल्कि सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी जैसे समूहों को पनाह दे रहा है। वहीं अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान बिना वजह हमले कर रहा है।
हाल के दिनों में सीमा पर झड़पें बढ़ी हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले और जवाबी कार्रवाई के दावे किए हैं। इससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
फेंसिंग और टकराव
पाकिस्तान ने 2017 से इस सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिश शुरू की। अफगानिस्तान इसे विवादित मानता है और इसका विरोध करता है। सीमा के दोनों ओर एक ही कबीले और परिवार रहते हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है।
तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते
जब अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया, तो पाकिस्तान को उम्मीद थी कि रिश्ते बेहतर होंगे। लेकिन उल्टा हुआ। टीटीपी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच भरोसा कम होता गया और तनाव बढ़ता गया।
दुनिया क्यों चिंतित है?
अगर यह संघर्ष बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैल सकती है। आतंकवाद, शरणार्थी संकट और आर्थिक असर बढ़ सकते हैं। कतर और तुर्की जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी समाधान नहीं निकला है।
बड़ा खतरा क्या है?
एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चल रहा है, दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान आमने-सामने हैं। अगर हालात और बिगड़े, तो इसका असर पूरे एशिया पर पड़ सकता है।
डूरंड लाइन सिर्फ एक सीमा नहीं, बल्कि इतिहास का एक अधूरा अध्याय है। जब तक दोनों देश बातचीत से हल नहीं निकालते, तब तक यह पुराना जख्म बार-बार हरा होता रहेगा।



