Love Jihad: ये है जिन्दा कहानी एक लव जिहादी की शिकार बनी हिन्दू लड़की की जो राष्ट्रीय सेलेब्रिटी रह चुकी है..
मिस इंडिया अर्थ 2019 विजेता सायली सुर्वे ने 10 साल बाद इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म में वापसी की है। उन्होंने अपने पति आतिफ तासे पर जबरन धर्मांतरण, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। अब उन्होंने वैदिक विधि से शुद्धिकरण कर अपना नाम बदलकर ‘आद्या सुर्वे’ रख लिया है।
पुणे के पिंपरी-चिंचवाड की रहने वाली सायली सुर्वे, जिन्होंने मिस इंडिया अर्थ 2019 प्रतियोगिता में जीत हासिल की थी, ने हाल ही में इस्लाम धर्म को त्यागकर हिंदू धर्म में वापसी की है। उन्होंने अपने पति आतिफ तासे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शादी के बाद उन्हें जबरन धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया और लगातार मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
प्यार में सब कुछ छोड़ा, मिला धोखा
सायली ने बताया कि 10 साल पहले उन्होंने अपने परिवार के विरोध के बावजूद मीरा-भायंदर के उद्योगपति आतिफ तासे से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद उनका नाम बदलकर अतेज़ा तासे रख दिया गया और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया।
शुरू में सब सामान्य था, लेकिन कुछ समय बाद उनके साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया।
चार बच्चों के लिए सहती रहीं अत्याचार
सायली और आतिफ के चार बच्चे हैं। मॉडल होने के बावजूद सायली ने अपने बच्चों की खातिर सब कुछ सहा। उन्होंने कई बार पुलिस से मदद मांगी, लेकिन उन्हें समय पर कोई सहायता नहीं मिली।
सायली ने मीडिया से कहा, “आतिफ से शादी करना मेरी सबसे बड़ी भूल थी। मैंने कई बार पुलिस से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन मुझे कहीं से मदद नहीं मिली।”
हिंदू धर्म में वापसी और शुद्धिकरण
अंततः सायली ने हिंदुत्ववादी संगठनों से संपर्क किया, जिनकी मदद से उन्होंने घर वापसी की। पिंपरी-चिंचवाड में वैदिक मंत्रोच्चार, होम और हवन के माध्यम से उनका शुद्धिकरण किया गया।
उन्होंने अपना नया नाम ‘आद्या सुर्वे’ रखा है और कहा कि अब उन्हें अपने धर्म में लौटकर असीम शांति और आत्मबल महसूस हो रहा है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने महाराष्ट्र में ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
हिंदू संगठनों ने इस मामले को धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक सुरक्षा से जोड़ते हुए समर्थन जताया है।
राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति में शुद्धिकरण समारोह आयोजित किया गया, जिससे यह मामला और अधिक सार्वजनिक ध्यान में आया।
कानूनी और सामाजिक सवाल
सायली की कहानी उन सैकड़ों महिलाओं की आवाज बन रही है जो अंतरधार्मिक विवाह के बाद धार्मिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करती हैं।
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, महिला सुरक्षा और कानूनी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को उजागर करता है।
सायली ने कहा, “अब मैं अपने बच्चों को हिंदू संस्कारों में बड़ा करना चाहती हूं और समाज को जागरूक करना चाहती हूं कि धर्मांतरण के पीछे क्या सच्चाई होती है।”
धर्म की ओर लौटने की यात्रा
सायली सुर्वे की घर वापसी सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह धार्मिक पहचान, महिला अधिकार और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन चुकी है। उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो धार्मिक दबाव और मानसिक उत्पीड़न के बावजूद अपने मूल धर्म में लौटने का साहस दिखाते हैं।
(सुमन सुरखाब)



