Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी मिशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ सिर्फ तीन दिन में ही रोक दिया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत में प्रगति का हवाला दिया, लेकिन नाकेबंदी जारी है। जानिए कैसे जहाज फंसे और समुद्री व्यापार पर पड़ा असर..
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ महज तीन दिन में ही रोक दिया गया। यह वही मिशन था जिसके जरिए अमेरिका ने दावा किया था कि वह फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाएगा और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाएगा। लेकिन अचानक ट्रंप ने इसे अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान कर दिया।
प्रोजेक्ट फ्रीडम की शुरुआत
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल और गैस की सप्लाई होती है। जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा तो अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक ऑपरेशन शुरू किया। इसका मकसद था कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को सुरक्षा प्रदान करे और किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत जवाब दे। शुरुआत में इसे लेकर अमेरिका ने बड़े दावे किए और कहा कि अब कोई भी जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकेगा।
तीन दिन में ही रोक क्यों लगी?
हालांकि ऑपरेशन शुरू होते ही हालात बिगड़ने लगे। ईरान ने चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए न केवल अमेरिकी जहाजों बल्कि यूएई से जुड़े जहाजों पर भी हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि हमले इतने बड़े नहीं थे कि युद्ध छिड़ जाए, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सीजफायर बेहद नाजुक स्थिति में है। इसी बीच ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ बातचीत में ‘बड़ी प्रगति’ हुई है और इसी कारण ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया गया है।
पाकिस्तान और अन्य देशों का दबाव
ट्रंप ने यह भी बताया कि पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका से अपील की थी कि वह सैन्य कार्रवाई को रोककर बातचीत का रास्ता अपनाए। इस दबाव का असर भी उनके फैसले में दिखा। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान के खिलाफ नाकेबंदी जारी रहेगी। यानी ईरान से कोई भी जहाज बाहर नहीं जा पाएगा और न ही कोई जहाज अरब सागर से ईरान तक पहुंच सकेगा।
ईरान की प्रतिक्रिया और खतरे की आशंका
ईरान ने अमेरिका की उम्मीदों के विपरीत कदम उठाते हुए हमले किए। इससे यह साफ हो गया कि हालात अभी भी अस्थिर हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने भी कहा कि स्थिति ‘काबू में’ है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। इस वजह से यह आशंका बनी हुई है कि किसी भी समय हालात फिर बिगड़ सकते हैं।
समुद्री व्यापार पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान समुद्री व्यापार को हुआ है। अमेरिका ने दावा किया था कि सैकड़ों जहाज होर्मुज से गुजरने के इंतजार में हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर शिपिंग कंपनियां अभी भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। पहले दिन केवल दो अमेरिकी झंडे वाले जहाज ही इस रास्ते से निकल पाए। दूसरे दिन कोई भी जहाज आगे नहीं बढ़ा। इससे साफ है कि समुद्र में भरोसा अभी भी नहीं बना है।
कार्गो जहाज पर हमला
तनाव के बीच मंगलवार को एक कार्गो जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। इस घटना ने साबित कर दिया कि हालात बेहद अस्थिर हैं और किसी भी समय स्थिति और खराब हो सकती है। इस हमले ने शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी है।
रणनीति में बदलाव लेकिन दबाव कायम
ट्रंप का फैसला यह दिखाता है कि अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। सैन्य दबाव कम नहीं किया गया है, बल्कि बातचीत को प्राथमिकता दी गई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ समझौता हो जाए ताकि तनाव कम हो सके। लेकिन नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा।
वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व इतना बड़ा है कि यहां की छोटी सी घटना भी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि अमेरिका का यह फैसला वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का फैसला भले ही बातचीत की दिशा में एक कदम हो, लेकिन इससे यह भी साफ हो गया है कि हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। जहाज फंसे हुए हैं, शिपिंग कंपनियां डरी हुई हैं और ईरान की ओर से खतरा अभी भी बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या वाकई तनाव कम हो पाता है या नहीं।
(त्रिपाठी पारिजात)



