Indian Defense: THAAD, S-500 और Iron Dome को चुनौती देगा भारत का नया ‘ब्रह्मास्त्र’? अग्नि-6 की ताकत ने बढ़ाई दुनिया की धड़कनें
भारत की संभावित अग्नि-6 मिसाइल को भविष्य की सबसे उन्नत ICBM प्रणालियों में गिना जा रहा है। MIRV, MaRV और PENAIDS जैसी तकनीकों से लैस यह मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। जानिए इसकी पूरी कहानी।
दुनिया में हथियारों की दौड़ अब सिर्फ ताकत दिखाने तक सीमित नहीं रह गई है। आज मुकाबला इस बात का है कि कौन दुश्मन की सबसे आधुनिक सुरक्षा ढाल को भेद सकता है और कौन अपने हथियारों को आखिरी पल तक बचाकर लक्ष्य तक पहुंचा सकता है। इसी बदलते सैन्य परिदृश्य के बीच भारत की अगली पीढ़ी की मिसाइल ‘अग्नि-6’ एक बार फिर चर्चा में है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत एक ऐसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जो भविष्य में दुनिया के सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा तंत्रों के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है। हालांकि परियोजना को लेकर अभी तक कोई औपचारिक सरकारी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चर्चाओं में अग्नि-6 को भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा बदलाव लाने वाली प्रणाली माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में वैश्विक सैन्य तकनीक तेजी से बदली है। अमेरिका का THAAD, रूस का S-500 और चीन का HQ-19 जैसे आधुनिक एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगातार ज्यादा सक्षम होते जा रहे हैं। इनका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है। ऐसे में दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अब ऐसी मिसाइलें विकसित कर रही हैं जिन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो।
भारत की संभावित अग्नि-6 भी इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-6 को केवल लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भविष्य के उन्नत मिसाइल रक्षा नेटवर्क को चकमा देने और उनके खिलाफ प्रभावी बने रहने के लिए डिजाइन किया जा सकता है।
इस मिसाइल की सबसे चर्चित विशेषता इसकी संभावित MIRV क्षमता है। यानी एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने वाले कई वॉरहेड लेकर जा सकती है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों में आमतौर पर एक ही वॉरहेड होता है, लेकिन MIRV तकनीक वाली मिसाइल अपने मार्ग में कई स्वतंत्र वॉरहेड छोड़ सकती है।
रक्षा विश्लेषकों का अनुमान है कि भविष्य में अग्नि-6 एक साथ 10 से 12 अलग-अलग लक्ष्य भेदने में सक्षम वॉरहेड ले जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए एक ही समय में इतने लक्ष्यों को ट्रैक करना और रोकना बेहद कठिन हो जाएगा।
लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती।
अग्नि-6 से जुड़ी चर्चाओं में MaRV यानी मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक का भी जिक्र किया जा रहा है। सामान्य बैलिस्टिक वॉरहेड तय रास्ते पर चलते हैं, इसलिए उनका अनुमान लगाना अपेक्षाकृत आसान होता है। जबकि MaRV तकनीक वाले वॉरहेड वातावरण में दोबारा प्रवेश करते समय अपना मार्ग बदल सकते हैं, अचानक मोड़ ले सकते हैं और दिशा बदलकर इंटरसेप्टर मिसाइलों को भ्रमित कर सकते हैं।
युद्ध विशेषज्ञ मानते हैं कि यही तकनीक भविष्य की मिसाइल लड़ाइयों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यदि लक्ष्य लगातार अपना रास्ता बदलता रहे तो उसे रोकने की संभावना काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा अग्नि-6 में PENAIDS यानी पेनीट्रेशन एड्स तकनीक शामिल किए जाने की भी चर्चा है। इसका उद्देश्य दुश्मन के रडार और ट्रैकिंग सिस्टम को भ्रमित करना होगा। मिसाइल उड़ान के दौरान नकली लक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान और विशेष डिकॉय छोड़ सकती है, जिससे असली वॉरहेड की पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाए।
सरल शब्दों में कहें तो दुश्मन के रडार स्क्रीन पर कई लक्ष्य दिखाई देंगे, लेकिन उनमें से वास्तविक कौन है और नकली कौन, यह समझना आसान नहीं होगा। ऐसी स्थिति में एयर डिफेंस सिस्टम अपने महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों को गलत लक्ष्यों पर भी खर्च कर सकता है।
एक और तकनीक जो अग्नि-6 को खास बना सकती है, वह है रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग। यह विशेष सामग्री मिसाइल की रडार पर दिखाई देने वाली पहचान को कम कर सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरसेप्टर सिस्टम को यदि लक्ष्य की जानकारी कुछ सेकंड देर से मिले तो उसका पूरा गणित बिगड़ सकता है।
मिसाइल की गति और प्रक्षेपण प्रणाली को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार इसमें चार चरण वाला हाई-एनर्जी सॉलिड फ्यूल प्रोपल्शन सिस्टम इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मिसाइल शुरुआती चरण को बेहद तेजी से पार कर सकेगी, जिससे दुश्मन की निगरानी प्रणालियों को प्रतिक्रिया देने के लिए कम समय मिलेगा।
अग्नि-6 की मोबाइल लॉन्च क्षमता भी इसकी बड़ी ताकत मानी जा रही है। इसे सड़क आधारित ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर प्लेटफॉर्म से संचालित किया जा सकता है। इससे मिसाइल को लगातार अलग-अलग स्थानों पर ले जाना संभव होगा और विरोधी देशों के लिए इसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाएगा।
रिपोर्टों में इसकी संभावित मारक क्षमता 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है। यदि भविष्य में यह परियोजना पूरी तरह आकार लेती है तो भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से शामिल हो सकता है जिनके पास लंबी दूरी तक मार करने वाली अत्याधुनिक रणनीतिक मिसाइल क्षमता मौजूद है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अग्नि-6 को लेकर सामने आई कई जानकारियां अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई हैं। परियोजना की अंतिम रूपरेखा, तकनीकी विशेषताएं और तैनाती से जुड़ी जानकारी भविष्य में सरकार और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिर भी इतना जरूर है कि आधुनिक युद्ध के बदलते समीकरणों में भारत अपनी रणनीतिक क्षमता को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। और अगर अग्नि-6 अपनी संभावित क्षमताओं के साथ वास्तविकता का रूप लेती है, तो यह केवल एक नई मिसाइल नहीं बल्कि भारत की दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है।
(त्रिपाठी पारिजात)



