West Bengal: हम लोकतान्त्रिक परिवर्तन के उस दौर मे है जहाँ वन पार्टी रुल देखने को भी मिल रहा है मगर उसमे मजा भी आ रहा है..
अब तीन तरह के नेता देश मे है एक जो बीजेपी के साथ है दूसरे जिन्हे बीजेपी साथ नहीं लेना चाहती, तीसरे ओवैसी जैसे कुछ अपवाद हो सकते है। सायनी घोष के साथ ये बात तो साफ हो गयी कि बीजेपी जिसे चाहे अपने साथ ले सकती है।
बहरामपुर के मुसलमानो ने अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी को वोट दिया था ये कितना हास्यास्पद है। अमित शाह को वैसे एक झटका तो फिर भी लगा है, बागी गुट ने कुछ ज्यादा अक्लमंदी दिखा दी। NDA को बाहर से समर्थन करते तो कुछ खास मिलता नहीं ऐसे मे इन्होने खुद का विलय NDA की ही एक पार्टी मे कर दिया।
NCPI की एक सीट भी नहीं थी और अब आयी तो अचानक से 20 आ गयी, NDA मे बीजेपी के बाद ये अचानक से दूसरा सबसे बड़ा दल बन गया जबकि कल तक तो खुद NDA समर्थको को नहीं पता था कि ऐसी भी कोई पार्टी उनके साथ है। ये मास्टर स्ट्रोक है, अब मोदीजी को दो केबिनेट मंत्री पद तो देने ही पड़ेंगे।
शायद काकोली घोष और शताब्दी रॉय को ही ये पद मिले, चंद्रबाबू नायडू की TDP को भी दो मंत्री पद दिये गए थे ऐसे मे इन्हे भी देने तो पड़ेंगे। पार्टी के हिसाब से तो वो 2022 से ही आपका हिस्सा है बस उस पार्टी के रातोरात दिन पलट गए, ज़ीरो से नंबर दो पर आ गयी ये संविधान मे मौजूद अपवादों का ही परिणाम है।
कलेजे पर पत्थर रखो या चट्टान, मंत्री तो आपको बनाना ही पड़ेगा, DMK भी ऐसा कुछ कर सकती है। ये लालची पार्टियां है इन्हे पता है कि अपनी दम पर कभी दिल्ली नहीं जीत सकते, इन्हे सत्ता का ऑक्सीजन भी चाहिए। वर्तमान परिदृश्य मे कांग्रेस नंबर दो पार्टी जरूर है मगर 2024 उसने सिर्फ 330 के लगभग सीटों पर लड़ा था।
आज 150 सीटें तो वैसी है जहाँ बीजेपी को बिना लड़े ही लीड मिलती है जबकि इसमें मध्यप्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ की 66 सीटें अभी जोड़ी नहीं है। गणित का खेल है जो हर सांसद करता है, सांसद छोड़िये मुसलमान भी करता है। इसीलिए महाराष्ट्र मे NCP को रिकॉर्ड तोड़ मुस्लिम वोट मिले।
क्या महाराष्ट्र का मुसलमान नहीं जानता था कि NCP का BJP के साथ गठबंधन है? लेकिन ये सत्ता की ताकत है जिसे सब सलाम करते है। एक बात और है जो सोचने लायक है कि आज बीजेपी को समर्थन दे रही पार्टियां अधिकांश वे है जो कभी कांग्रेस का हिस्सा थी।
TDP को एनटीआर ने कांग्रेस से अलग किया था आज वो बीजेपी के साथ है, जनता दल की तो जननी ही कांग्रेस मे हुई बगावत है, अब TMC भी आ गयी है, सुनेत्रा पवार की NCP भी कभी कांग्रेस का हिस्सा थी। वो छोड़िये पवन कल्याण भी कभी कांग्रेसी ही हो चुके थे जबकि आज दक्षिण के अशोक सिंघल बन चुके है।
सिवाय शिवसेना के, NDA मे ऐसा कोई नहीं है जो कांग्रेस का कभी हिस्सा ना रहा हो। कांग्रेस से इन्हे 100 शिकायते थी मगर BJP से खुशी खुशी जुड़े हुए है, बीजेपी कल को हिन्दुराष्ट्र का प्रस्ताव भी ले आये तो ये उसके समर्थन मे वोट करेंगे।
हालांकि ये दल विशुद्ध कांग्रेस नहीं है उसकी फ़िल्टर लगी क्रीमी लेयर है, इन्होने कांग्रेस को मात दी है और अब ज़ब बीजेपी को नहीं दे पाए तो उससे दोस्ती कर ली। ये तो सदियों से होता आ रहा है, बीजेपी का अश्वमेध यज्ञ चल रहा है या तो विलय कर लो या युद्ध मे परिणाम भुगतो। बस इस अश्वमेध यज्ञ मे फैसले बीजेपी ले रही है कि उसे घोड़ा कहाँ रुकवाना है और कहाँ दौड़ाना है।
स्टालिन के लिए ये रेड सिग्नल है, शांति से NDA मे शामिल हो जाओ कल को यदि दयानिधि मारन ही बागी हो जाए तो अब तो किसी को आश्चर्य भी नहीं होगा। सांसद अपनी मर्जी से टूटे उससे अच्छा है यज्ञ के घोड़े के सामने खुद ही झुक जाओ, नाम के लिए ही सही तुम्हारे पास पार्टी रह जायेगी जिसके फैसले दिल्ली से अमित शाह ले रहे होंगे।
(परख सक्सेना)



