Saturday, August 30, 2025
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Homeधर्म- ज्योतिषJai Shri Ganesh: आज बुधवार है मंगलमूर्ति गजानन का दिन

Jai Shri Ganesh: आज बुधवार है मंगलमूर्ति गजानन का दिन

 

Jai Shri Ganesh: हमारे भोले बाबा के बुद्धिमान पुत्र हैं गणेश जी जिनको हम सभी प्यार से गन्नू भैया भी कहते हैं. यही हमारे भगवान गणेश: बुद्धि, समृद्धि और शुभता के प्रतीक हैं.

भगवान गणेश, जिन्हें गजानन, विघ्नहर्ता, और मंगलकर्ता के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। वे श्री पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं और हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाती है। उनके बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं माना जाता।

भगवान गणेश का स्वरूप और प्रतीकात्मकता

भगवान गणेश का विशिष्ट रूप उनके महत्व को दर्शाता है, यथा :

हाथी का सिर – बुद्धिमत्ता और ज्ञान का प्रतीक।
छोटी आँखें – गहरी सोच और दूरदृष्टि का प्रतीक।
बड़ा पेट – सभी अच्छी और बुरी चीजों को आत्मसात करने की क्षमता।
छोटी सूंड और बड़े कान – सूक्ष्म से सूक्ष्म बातों को समझने और धैर्यपूर्वक सुनने की प्रेरणा।
एक टूटा हुआ दंत (एकदंत) – आत्मसंयम और बलिदान का प्रतीक।
मूषक (चूहा) वाहन – इच्छाओं को नियंत्रित करने की सीख।

भगवान गणेश के प्रमुख नाम और अर्थ

भगवान गणेश के कई नाम हैं, जो उनके गुणों को दर्शाते हैं, यथा :

विघ्नहर्ता – सभी बाधाओं को दूर करने वाले।
गणपति – समस्त देवताओं और प्राणियों के स्वामी।
लंबोदर – विशाल ज्ञान और धैर्य के प्रतीक।
गजानन – हाथी के समान विशाल बुद्धि और शक्ति वाले।

भगवान गणेश से जुड़ी प्रमुख कथाएँ

1. गणेश जी का जन्म और भगवान शिव द्वारा सिर काटने की कथा

एक बार माता पार्वती ने अपने उबटन से एक सुंदर बालक को बनाया और उसे अपने द्वार पर प्रहरी के रूप में नियुक्त किया। जब भगवान शिव वहाँ पहुँचे, तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश का सिर काट दिया। माता पार्वती के रोष को शांत करने के लिए शिवजी ने हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया, और उन्हें प्रथम पूज्य का आशीर्वाद दिया।

2. शिव-पार्वती की परिक्रमा और गणेश जी की बुद्धिमानी

एक बार देवताओं ने गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय को पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता दी। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर तेजी से पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने अपनी बुद्धिमानी से माता-पिता (शिव और पार्वती) की परिक्रमा कर ली और कहा, “माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं।” उनकी इस बुद्धिमत्ता के कारण उन्हें “बुद्धि के देवता” के रूप में प्रतिष्ठित किया गया।

3. महाभारत लेखन

महर्षि वेदव्यास ने जब महाभारत लिखने के लिए गणेश जी को लेखक चुना, तो गणेश जी ने एक शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे। वेदव्यास जी ने भी एक शर्त रखी कि गणेश जी को श्लोकों को समझकर ही लिखना होगा। इस प्रकार, गणेश जी ने अपना एक दंत तोड़कर लेखनी बना ली और महाभारत को लिपिबद्ध किया। इसी कारण वे “एकदंत” कहलाए।

गणेश उत्सव और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्तगण गणपति बप्पा की मूर्ति घरों और पंडालों में स्थापित कर भक्ति और श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं। मोदक भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है।

गणेश पूजन के 5 मुख्य मंत्र

ॐ गण गणपतये नमः।
ॐ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्।
ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्री महागणपतये नमः।

गणेश जी से क्या सीख सकते हैं?

बुद्धिमत्ता और धैर्य – सोच-समझकर निर्णय लें।
संघर्ष में भी प्रसन्नता – हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहें।
अहंकार का त्याग – ज्ञान और शक्ति के बावजूद विनम्र बने रहें।
सही मार्गदर्शन – अपने माता-पिता और गुरु का सम्मान करें।
हर स्थिति को स्वीकारें – समस्याओं का समाधान धैर्यपूर्वक खोजें।

भगवान गणेश सिर्फ हिंदू धर्म के देवता ही नहीं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक भी हैं। वे हमें सिखाते हैं कि बुद्धि, समर्पण और आत्मसंयम के साथ हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। उनकी पूजा करने से जीवन में शुभता, समृद्धि और सफलता आती है।

गणपति बप्पा मोरया!

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