Rashtra Dharm: राष्ट्र का धर्म पूछता है ये सब करने वाले आखिर आप हैं कौन?
जगदीप धनकड़ को भाजपा ने उपराष्ट्रपति बनाया और आपने उनका मजाक बनाया उनकी शारीरिक संरचना को लेकर उन्हें झुका हुआ जाट कहा।
भाजपा ने कैप्टन अभिमन्यु को हरियाणा में आगे बढ़ाया तो आपने उसका घर जला दिया।
जब आपकी बहन बेटियों की अस्मत पर हमले हो रहे थे तो आपके समाज से ही संजीव बालियान उन दंगाइयों के सामने अड़े, भाजपा ने संजीव बालियान को 10 साल केंद्र में मंत्री बनाए रखा लेकिन आपने उन्हें कभी जाट नेता नहीं माना।
भाजपा ने दिल्ली मुख्यमंत्री चुनाव के लिए ओपी धनकड़ को पर्यवेक्षक बनाया लेकिन आप उन्हें तवज्जो देते हों?
नहीं, क्योंकि आपको हुड्डा और चौटाला की पारिवारिक विरासत प्यारी है।
आप उमेश मलिक पर हमला करते हो, आप सबसे बड़े प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को ढेवा कहते हो।
और आप ही को दिल्ली में भाजपा से जाट मुख्यमंत्री ना बनाने की शिकायत है ?
प्रवेश वर्मा मुख्यमंत्री बन भी जाते तो क्या आप उन्हें नेता मान लेते, नहीं बल्कि आपको गाली देने के लिए एक और जाट नेता मिल जाता।
अब बड़ा सवाल ये है कि आप हैं कौन ?
तो आप हैं महाशय जातिवाद के झंडाबरदार, आप हैं राजनीतिक परिवारों की विरासतों को पोषण देने वाले मानसिक गुलाम, आप हैं हिंदुत्व की बढ़ती साख से जलने वाले, आप हैं जन्मना जातिगत श्रेष्ठता के बोध से ग्रस्त मानसिक बीमार व्यक्ति।
भाजपा के बहुत से जाट और गैरजाट समर्थक चाहते थे कि प्रवेश वर्मा मुख्यमंत्री बने, इसलिए क्योंकि प्रवेश वर्मा ने बेईमानों के राजा को हराया था और वह स्पष्ट मानसिकता का हिंदू आदमी है।
आपको प्रवेश वर्मा चाहिए था केवल अपनी जातीय संप्रभुता की हनक दिखाने के लिए।
आपको खिलाड़ियों की जीत में जातीय संप्रभुता दिखानी है, आपको पढ़ाई में अव्वल आने वाले छात्रों पर हनक दिखानी है, आपको हनक दिखानी है बिरादरी के किसी आदमी के बड़ा अधिकारी बनने पर।
अब ये आप केवल जाट नहीं हैं बल्कि अब ये आप सब बिरादरियों के लोग हैं।
लोकसभा चुनाव में पंचायतों का ड्रामा रचने वाले बिके हुए लोग भी और आंदोलनरत पहलवानों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले भी,विकास दुबे के एनकाउंटर पर छाती पीटने वाले भी और उमेश कुमार तथा प्रणव चैंपियन के आपसी झगड़े में बिरादरियों को पक्षकार बनाने वाले भी।
भाजपा आपकी कुंठा शांत करने के लिए राजनीति नहीं कर रही बल्कि परिवर्तन के लिए राजनीति कर रही है, इस संगठन के गठन का उद्देश्य ही ‘परम वैभवं नेतुमेतत स्वराष्ट्रम’ है।
दिल्ली का लॉ एंड ऑर्डर गृहमंत्री के पास है और बाकी भाजपा सरकार केंद्र की नीतियों से चलती है। Mind it..
(अधिवक्ता राघवेंद्र वर्मा)