Acharya Anil Vats presents: आमतौर पर धार्मिकजन यह प्रश्न करते हैं कि कौन थीं वो सोलह हजार रानियाँ भगवान कृष्ण की..उत्तर लीजिये आचार्य जी से..
श्री कृष्ण की 8 मुख्य रानियां (अष्टभार्याएँ) थीं, जबकि 16,000 रानियों का रहस्य यह है कि उन्होंने राक्षस नरकासुर द्वारा बंदी बनाई गई 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया, जिन्हें समाज ने नहीं अपनाया।
यही कारण है कि भगवान कृष्ण ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा देने के लिए उनसे विवाह किया, जो कि एक ईश्वरीय लीला और सामाजिक मर्यादा का प्रतीक था, जिसमें उन्होंने 16,000 रूपों में प्रकट होकर सभी को समान प्रेम दिया।
8 मुख्य रानियाँ (अष्टभार्याएँ)
ये कृष्ण की प्रमुख पत्नियाँ थीं, जिनमें रुक्मिणी सबसे पहली और प्रिय थीं। इन रानियों के नाम और अन्य विवरण शास्त्रों में मिलते हैं, जैसे सत्यभामा, जाम्बवती आदि।
16,000 रानियों का रहस्य
नरकासुर का अत्याचार: नरकासुर नामक राक्षस ने 16,000 कन्याओं (राजकुमारियों और अन्य) को बंदी बनाकर रखा था।
मुक्ति और सम्मान: श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर उन्हें मुक्त कराया, लेकिन समाज ने राक्षस के यहाँ रहने के कारण उन्हें स्वीकार नहीं किया।
ईश्वरीय लीला: इन कन्याओं की रक्षा और उन्हें सम्मान दिलाने के लिए श्रीकृष्ण ने 16,000 रूपों में प्रकट होकर उन सभी से विवाह किया।
सामाजिक संदेश: यह विवाह किसी सांसारिक मोह के कारण नहीं, बल्कि स्त्री के आत्मसम्मान और सामाजिक मर्यादा की रक्षा के लिए एक ईश्वरीय कार्य था, जिससे समाज को यह सीख मिले कि स्त्री की मर्यादा परिस्थितियों से नहीं, उसके आत्मसम्मान से तय होती है।
आध्यात्मिक व्याख्या
कुछ विद्वानों के अनुसार, ये 16,000 रानियाँ वास्तव में 16,000 वेद मंत्रों या रिचाओं का प्रतीक हैं, जो ईश्वर (श्रीकृष्ण) को पति रूप में चाहती थीं, और उपनिषदों के 108 मंत्रों के साथ मिलकर 16,108 की संख्या बनती है, जो आध्यात्मिक साधना और ईश्वर से मिलन की इच्छा को दर्शाती है।
(प्रस्तुति- आचार्य अनिल वत्स)



