Friday, August 29, 2025
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Acharya Anil Vats presents: कीजिये श्रीजी की 8 सखियों के भाव दर्शन

Acharya Anil Vats presents: प्रायः धार्मिक आख्यानों में राधा रानी के साथ उनकी आठ सखियों का भी उल्लेख मिलता है..आइये जानते हैं कौन हैं वे अष्ट सखियाँ श्री कृष्ण प्रिया की..

Acharya Anil Vats presents: प्रायः धार्मिक आख्यानों में राधा रानी के साथ उनकी आठ सखियों का भी उल्लेख मिलता है..आइये जानते हैं कौन हैं वे अष्ट सखियाँ श्री कृष्ण प्रिया की..

राधा रानी की अष्ट सखियां इस प्रकार हैं –

1. ललिता सखी 

ये सखी सबसे चतुर और प्रिय सखी है। राधा रानी को तरह-तरह के खेल खिलाती है। कभी-कभी नौका-विहार, वन-विहार कराती है। ये सखी ठाकुर जी को हर समय बीड़ा (पान) देती रहती है। ये ऊँचे गांव मे रहती है।

2. विशाखा सखी 

ये गौरांगी रंग की है। ठाकुर जी को सुदंर-सुदंर चुटकुले सुनाकर हँसाती है। ये सखी सुगन्धित द्रव्यों से बने चन्दन का लेप करती है। इनका गाँव कमईं है।

3. चम्पकलता सखी 

ये सखी ठाकुर जी को अत्यन्त प्रेम करती है। ये करहला गांव मे रहती है। इनका अंगवर्ण पुष्प-छटा की तरह है। ये ठाकुर जी की रसोई सेवा करती है।

4. चित्रा सखी 

ये सखी राधा रानी की अति मनभावती सखी है। ये बरसाने मे चिकसौली गांव मे रहती है। जब ठाकुर जी 4 बजे सोकर उठते हैं तब यह सखी फल, शरबत, मेवा लेकर खड़ी रहती है।

5. तुगंविधा सखी 

ये सखी चदंन की लकड़ी के साथ कपूर हो ऐसे महकती है। ये युगलवर के दरबार मे नृत्य, गायन करती है। ये वीणा बजाने मे चतुर है। ये गौरां माँ पार्वती का अवतार है। इनका गाँव ढभाला है।

6. इन्दुलेखा सखी 

ये सखी अत्यन्त सूझ-बूझ वाली है। ये सुनहरा गांव मे रहती है। ये किसी की भी हस्तरेखा को देखकर बता सकती है कि उसका क्या भविष्य है। ये प्रेम कहानियाँ सुनाती है। इनकी गाँव आँजनौक( अंजनवन) है।

7. रगंदेवी सखी 

ये बड़ी कोमल व सुदंर है। ये राधारानी के नैनों में काजल लगाती है और शिंगार करती है। इनका गाँव रॉकौंली है।

8. सुदेवी सखी 

ये सबसे छोटी सखी है। बड़ी चतुर और प्रिय सखी है। ये सुनहरा गांव मे रहती है। ये ठाकुर जी को पानी पिलाने की सेवा करती है। ये सखी सुनहरा में रहती है।

इस प्रकार लाड़ली लाल के बरसाना धाम के चारों ओर गोलाकार मण्डल में इन सखियों के गाँव विराजमान हैं और बिल्कुल मध्य में बरसाना लाड़ली महल है। जब भी किसी सखी की आवश्यकता पड़ती है उसे शिखर से आवाज लगाकर बुला लिया जाता है।

बरसाना तो साक्षात प्रेम व आनंद का सागर है!

(प्रस्तुति -आचार्य अनिल वत्स)

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