Wednesday, February 4, 2026
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AI खामोश कर रहा है दफ्तरों को – कार्यस्थल अब अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं

AI के कारण ऑफिसों में बढ़ती खामोशी - जानिये कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यस्थलों को धीरे-धीरे और अधिक एकाकी बना रहा है..

AI के कारण ऑफिसों में बढ़ती खामोशी – जानिये कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यस्थलों को धीरे-धीरे और अधिक एकाकी बना रहा है..

आज के आधुनिक दफ्तरों में एक नया सवाल उभर रहा है—जब हर सलाह, मार्गदर्शन, विचार-मंथन और हल्की-फुल्की बातचीत के लिए चैटबॉट मौजूद हैं, तो फिर इंसानी सहकर्मियों की ज़रूरत कितनी रह गई है? तेजी से यह देखा जा रहा है कि पेशेवर अब मेंटरशिप, सुझाव, ब्रेनस्टॉर्मिंग और यहां तक कि अनौपचारिक बातचीत के लिए भी इंसानों की जगह एआई टूल्स का सहारा लेने लगे हैं।

यह बदलाव क्यों अहम है

रिमोट वर्क के दौर ने पहले ही ऑफिस के सामाजिक ढांचे को काफी हद तक बदल दिया था। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इस बदलाव को और गहरा कर दिया है। भले ही एआई उत्पादकता बढ़ा रहा हो, लेकिन इसके साथ-साथ यह कार्यस्थलों में मानवीय जुड़ाव को कमजोर भी कर रहा है।

इसका नतीजा यह है कि

कर्मचारियों में अकेलेपन की भावना बढ़ रही है। उनके आपसी रिश्ते और संवाद घट रहे हैं, जिनसे अक्सर बेहतर विचार और गुणवत्ता वाला काम निकलता है। और हां, एआई से आपको ऑफिस की गर्मागर्म गॉसिप तो मिलने वाली नहीं है

खुद एआई कंपनियों के भीतर भी दिख रहा असर

एआई कंपनी Anthropic, जो Claude चैटबॉट बनाती है, की एक हालिया रिपोर्ट में उसके ही एक कर्मचारी ने माना, – “मुझे लोगों के साथ काम करना पसंद है, लेकिन यह दुखद है कि अब मुझे उनकी पहले जैसी जरूरत नहीं महसूस होती।”

कंपनी के मुताबिक, उसके कई इंजीनियर अब उन सवालों के लिए भी Claude का उपयोग कर रहे हैं, जो पहले सहकर्मियों से पूछे जाते थे। इससे मेंटरशिप और सहयोग के अवसरों में कमी आ रही है।

सिर्फ AI कंपनियों तक सीमित नहीं है यह चलन

यह प्रवृत्ति अब लगभग हर व्हाइट-कॉलर वर्कप्लेस में दिख रही है। फ्रीलांस प्लेटफॉर्म Upwork के एक सर्वे के अनुसार –

64% कर्मचारियों ने माना कि एआई ने उनकी उत्पादकता बढ़ाई है। परंतु दूसरी तरफ, इन्हीं में से बड़ी संख्या ने यह भी स्वीकार किया कि उनका रिश्ता अब एआई से अपने सहकर्मियों की तुलना में बेहतर हो गया है

काम करने का नया तरीका

अब स्थिति यह है कि किसी सहकर्मी या बॉस से सवाल पूछने से पहले लोग चैटबॉट से पूछते हैं

अर्थशास्त्री थॉमस वेनैंडी के शब्दों में, – “एआई अब नए गूगल जैसा हो गया है। अगर कोई मुझसे ऐसा सवाल पूछे जिसका जवाब एक त्वरित सर्च से मिल सकता है, तो मुझे झुंझलाहट होती है।”

वहीं कम्युनिकेशन एग्जीक्यूटिव नील रिप्ले कहते हैं, – “Gemini इसलिए काम करता है क्योंकि यह ऐसा सहकर्मी है जिसमें कोई ड्रामा नहीं है। न टाइम ज़ोन की समस्या, न भावनात्मक बोझ, न जजमेंट, न चुगली।”

खतरे की घंटी: जब कोई आपको चुनौती ही न दे

लेकिन यहीं पर सबसे बड़ा जोखिम छिपा है। चैटबॉट अक्सर वही जवाब देते हैं, जो आप सुनना चाहते हैं।

वर्कप्लेस कंसल्टेंट केली मोनाहन के अनुसार, – “दफ्तर में ऐसा फीडबैक खतरनाक हो सकता है। इंसानी सहकर्मी हमें चुनौती देते हैं, हमारी सोच को धार देते हैं।”

उनका मानना है कि आज हम अधिक कुशल दिख रहे हैं लेकिन अगले कुछ वर्षों में संगठन अंदर से बिखर सकते हैं

बड़ी तस्वीर: बढ़ता अकेलापन

यह समस्या सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं है। अमेरिका में लोग पहले से ही अधिक अकेले, बंटे हुए और भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। Gallup के कर्मचारी जुड़ाव (Employee Engagement) डेटा के अनुसार, 2020 के बाद से कर्मचारी अपने कार्यस्थल से भावनात्मक रूप से कटते जा रहे हैं।

हकीकत यह है कि चैटबॉट इंसानी जुड़ाव की जगह नहीं ले सकते। वहीं दूसरा पक्ष भी है और वो ये कि KPMG की वर्कफोर्स इनोवेशन हेड एडविज सैको मानती हैं कि एआई का उपयोग इंसानी बातचीत के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके पूरक के तौर पर होना चाहिए।

केएमपीजी का कहना है कि

लोग एआई का इस्तेमाल भविष्य की मानवीय बातचीत की तैयारी के लिए करते हैं और यह अपने विचारों को साफ करने का एक आईना हो सकता है

KPMG फिलहाल ऐसे कोचिंग सॉफ्टवेयर का परीक्षण कर रही है, जो कर्मचारियों को परफॉर्मेंस रिव्यू जैसी अहम बातचीत की तैयारी में मदद करेगा।

आगे क्या देखने लायक है

एआई समर्थकों का कहना है कि अगला बड़ा बदलाव तब आएगा, जब कर्मचारी एआई को टीम के रूप में इस्तेमाल करना सीखेंगे, न कि अकेलेपन के साधन के रूप में।

अंततोगत्वा कहा जा सकता है कि

यह चिंता लगातार गहराती जा रही है कि जो तकनीक मानवता की सामूहिक बुद्धिमत्ता का सबसे अच्छा उपयोग कर सकती है, वही तकनीक कहीं न कहीं इंसानों को एक-दूसरे से दूर भी कर रही है। अगर संतुलन नहीं बना, तो “स्मार्ट वर्कप्लेस” के बीच “खामोश दफ्तर” आम दृश्य बन सकते हैं।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)

 

 

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