BBC: ‘BBC का खेल खत्म?’: ट्रंप ने 10 अरब डॉलर का मानहानि मुकदमा दायर किया, 6 जनवरी के भाषण की कथित गलत एडिटिंग पर ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर पर गंभीर आरोप..
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जनवरी 2021 को दिए गए अपने भाषण के कथित तौर पर तोड़े-मरोड़े गए फुटेज दिखाने को लेकर ब्रिटेन के सार्वजनिक प्रसारक बीबीसी (BBC) के खिलाफ 10 अरब डॉलर, यानी लगभग ₹8300 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि बीबीसी ने जानबूझकर उनके भाषण के चुनिंदा अंश काट-छांट कर इस तरह पेश किए, जिससे यह संदेश गया कि उन्होंने कैपिटल हिल में हुई हिंसा को भड़काया था।
ट्रंप के अनुसार, बीबीसी की इस कथित हरकत से उनकी सार्वजनिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है और दुनिया भर में उनके खिलाफ गलत धारणा बनी। इसी आधार पर उन्होंने अब कानूनी लड़ाई छेड़ने का फैसला किया है।
मियामी की अदालत में दायर हुआ ₹8300 करोड़ का केस
यह मुकदमा सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को मियामी की एक संघीय अदालत में दायर किया गया। याचिका में ट्रंप ने आरोप लगाया कि बीबीसी की मशहूर ‘पैनोरमा’ डॉक्यूमेंट्री में उनके भाषण के उन हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया गया, जिनमें उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की थी। इसके बजाय, डॉक्यूमेंट्री में केवल ‘कैपिटल तक मार्च करो’ और ‘पूरी ताकत से लड़ो’ जैसे वाक्यों को जोड़कर दिखाया गया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो उन्होंने सीधे हिंसा के लिए उकसाया हो।
ट्रंप का कहना है कि यह एडिटिंग महज पत्रकारिता की चूक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कोशिश थी, जिसका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना था।
माफी तो मांगी, लेकिन जिम्मेदारी से बचा BBC: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि भले ही बीबीसी ने बाद में माफी जारी की हो, लेकिन उसने अपने कृत्य पर कोई वास्तविक पछतावा नहीं दिखाया। न तो संस्था ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी और न ही उसने किसी तरह की जवाबदेही तय की। ट्रंप के मुताबिक, सिर्फ माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उससे नुकसान की भरपाई न की जाए।
BBC ने गलती स्वीकार की, पर मुआवजे से किया इनकार
विवाद बढ़ने के बाद बीबीसी ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि डॉक्यूमेंट्री की एडिटिंग के कारण यह गलत धारणा बनी कि ट्रंप ने हिंसा का सीधा आह्वान किया था। ब्रॉडकास्टर ने इसके लिए माफी भी मांगी और यह घोषणा की कि संबंधित डॉक्यूमेंट्री को भविष्य में दोबारा प्रसारित नहीं किया जाएगा।
हालांकि, बीबीसी ने इस मुकदमे को कानूनी रूप से निराधार बताते हुए किसी भी तरह का हर्जाना देने से साफ इनकार कर दिया है। संस्था का कहना है कि माफी और प्रसारण रोकना ही पर्याप्त कदम हैं।
विवाद के बीच BBC के दो शीर्ष अधिकारियों ने छोड़ा पद
यह मामला बीबीसी के लिए उस समय और भी गंभीर हो गया, जब इसी विवाद के चलते संगठन के दो सबसे वरिष्ठ अधिकारियों को अपने पद छोड़ने पड़े। डायरेक्टर जनरल टिम डेवी और न्यूज सीईओ डेबोरा टर्नेस ने इस्तीफा दे दिया, जिससे प्रसारक की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बीबीसी पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि संस्था के “बेईमान लोगों” ने न सिर्फ उनकी छवि खराब की, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश की। यह पूरा विवाद वर्ष 2024 में प्रसारित डॉक्यूमेंट्री ‘Trump: A Second Chance?’ से शुरू हुआ था, जिसने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
(प्रस्तुति – त्रिपाठी पारिजात)



