Wednesday, February 18, 2026
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UGC Act 2026: ‘काला है ये कानून’ कह कर दिया त्यागपत्र PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने

UGC Act 2026:  IIT-BHU से इंजीनियरिंग और लॉ की पढ़ाई करने वाले 2019 बैच के PCS अधिकारी ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद छोड़ा, UGC के नए नियमों और प्रशासनिक कार्रवाई पर जताई नाराज़गी

UGC Act 2026:  पहले प्रयास में 15वीं रैंक पाने वाले PCS अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने UGC एक्ट को बेनकाब किया और ‘काला कानून’ कहकर दिया इस्तीफा

उत्तर प्रदेश के 2019 बैच के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए एक्ट को ‘काला कानून’ बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। माना भी यही जा रहा है कि भेदभाव विरोध के नाम पर भेदभाव करने वाला उत्पीड़क कानून तैयार किया गया है।

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

अलंकार अग्निहोत्री का नाम प्रशासनिक सेवा में तेज़ी से उभरते अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने UPPCS परीक्षा 2019 में पहले ही प्रयास में 15वीं रैंक हासिल की थी। कानपुर के निवासी अलंकार ने IIT-BHU से बीटेक और उसके बाद LLB की पढ़ाई की। तकनीक, कानून और प्रशासन—तीनों क्षेत्रों में गहरी समझ रखने वाले अलंकार ने कई ज़िलों में बतौर डिप्टी कलेक्टर काम किया है, जिनमें उन्नाव, बलरामपुर और एटा शामिल हैं। इसके अलावा वे लखनऊ में असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर भी रह चुके हैं।

त्यागपत्र का कारण सुस्पष्ट है

सूत्रों के अनुसार, अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा जिस मुख्य कारण से दिया है, वह है—

UGC के नए इक्वेलिटी एक्ट का विरोध

इस्तीफे से पहले उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट भी साझा की थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नए नियमों और प्रशासनिक कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।

अलंकार का त्यागपत्र

अपने त्यागपत्र में पीसीएस के टॉपर अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा:

“मैं अलंकार अग्निहोत्री, 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी, वर्तमान में सिटी मजिस्ट्रेट बरेली के रूप में कार्यरत हूं। मैंने IIT-BHU से B.Tech की उपाधि प्राप्त की है और इसके लिए मैं महामना मदनमोहन मालवीय का जीवनभर आभारी रहूंगा। उनके स्वप्न और काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रेरणा लेकर ही मैं अपने विचार व्यक्त कर रहा हूं।”

UGC का नया कानून क्या कहता है?

UGC ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने की बात कह कर नये ‘नियम 2026’ लागू किए हैं जो वास्तविकता के धरातल पर भेदभाव को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। यह विरोधाभासी रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू हो चुका है।

इसके मुख्य प्रावधान 

जातिगत भेदभाव की परिभाषा में अब SC, ST, पहले से शामिल थे अब इसमें OBC को शामिल किया गया है।

विश्वविद्यालय स्तर पर समानता समिति बनाई जाएगी, जिसमें OBC, महिला, SC, ST और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि होंगे। इसमें किसी सवर्ण को शामिल नहीं किया गया है।

इसमें सीधे सीधे सवर्ण छात्रों और छात्राओं को खलनायक, शोषक, उत्पीड़क मान लिया गया है और इस ऐक्ट के माध्यम से उनको निशाने पर ले लिया है।

इस ऐक्ट का इस्तेमाल करके होने वाले लाखों झूठे मुकदमों का शिकार सवर्ण वर्ग के छात्र होंगे जिनसे उनको कॉलेज -यूनिवर्सिटीज़ से निष्कासित किया जायेगा, उनकी डिग्री छीनी जायेगी और तो और उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है -इस प्रकार उनके करियर को मटियामेट होने से कोई नहीं बचा पायेगा।

सवर्ण वर्ग के छात्रों पर होने वाले झूठे मुकदमों से बचाव के लिये अर्थात सवर्ण छात्र-छात्राओं के पक्ष में यह ऐक्ट कोई रास्ता नहीं बताता है।

यह समिति हर छह महीने में रिपोर्ट तैयार कर UGC को भेजेगी । दूसरे शब्दोंं में, छह माह छापामार इक्विटी स्क्वाड छापे मार-मार कर पकड़ेगा ‘सवर्ण आतताइयों’ की सूचि बनायेगी और इसे अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट बता कर ऊपर भेजेगी। दिन-रात चौबीस घंटे चलने वाली इस उत्साहपूर्ण सरकारी कार्यवाही में स्क्वाड के अनुसार परोक्ष या अपरोक्ष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी के साथ भेदभाव व उत्पीड़न करने में लिप्त पाये गये छात्र और छात्राओं को पकड़ा जायेंगा।

हालांकि इस कानून को लेकर देशभर में विरोध जारी है। जैसा दिखाई दे रहा है उसके आधार पर शिक्षाविद और संगठन इसे विवादास्पद बता रहे हैं। अब एक PCS अधिकारी द्वारा इसे ‘काला कानून’ कहकर पद छोड़ना इस भेदभाव और उत्पीड़न के मुद्दे को और पुष्ट कर रहा है।

अब अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। एक तेज़तर्रार अधिकारी का इस तरह विरोध दर्ज कर पद छोड़ना न केवल UGC एक्ट पर सीधे सीधे सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी नीतियों पर असहमति जताने के लिए अधिकारी अपने सरकारी अधिकारी के पद को भी त्याग सकते हैं और अपने करियर का उत्सर्ग कर सकते हैं। स्पष्ट है कि इस विरोध में दम है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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