Epstein Files: न न, ये मत सोचना कि लोग कितना गिर गये हैं.. लोग कितना गिर सकते हैं, हम और आप सोच भी नहीं सकते – एप्सटीन फाइल्स तो एक झांकी है – न जाने कितनी पिक्चरें अभी बाकी हैं..
अचानक जो सामने आई वो थी एप्सटीन फाइल और जो वो खुल्लेआम सामने लाई उस लिस्ट में थे बिज़नेसमैन बिल गेट्स से लेकर स्वयंभू धर्मगुरु दीपक चौपड़ा. इसमें लेखन की दुनिया के बड़े नाम नोआम चोम्सकी भी थे और महान नोबल पुरस्कार प्राप्त विकलांग वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग भी थे. इसमें मोनिका लेवेन्स्की वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिन्टन और आज के राष्ट्रपति डोनाल्ड जी ट्रम्प भी हैं.
सोेचिये जरा, क्या कभी सोचा था किसीने कि ऐसा भी एक रहस्योद्घाटन होगा ? वो चेहरे जो आम नहीं बहुत खास हैं वो चेहरे बदनाम नहीं महाबदनामी के कीचड़ से सने होंगे? मगर सच ये है कि ये सभी वही लोग हैं जो अपनी-अपने क्षेत्र में सबसे टॉपर रहे हैं. तकरबीन इन सभी सेलेब्रिटीज़ पर यौन अपराध का आरोप लगा है अथवा एप्सटीन से जुड़े होने का इल्ज़ाम हैं. ऐप्सटीन का मतलब एक ऐसी छिपी हुई शैतानी दुनिया जिसमें बारह वर्ष की बच्चियों के साथ सेक्स करना, मानव मांस खाना सम्मिलित है.
सामने आईं कुछ रिपोर्ट्स यहां तक बताती हैं कि एप्सटीन क्लब में शामिल कुछ लोग तो छोटे बच्चों को टॉर्चर भी करते थे. कारण ये था कि विज्ञान के अनुसार अत्यंत तनाव की स्थिति में बच्चों की देह में एड्रीनोक्रोम नामक एक रसायन बनता है, जिसे पीकर शायद युवा बने रहा जा सकता है. ऐसी एक आसुरी धारणा ऐसा आसुरी कृत्य करवाती थी इन असुरों से.
देखने वाली बात ये भी है कि दुनिया की किसी अदालत ने इन यौन अपराधियों + अमानुषिकता के अपराधियों का संज्ञान नहीं लिया. दुनिया के किसी नेता या सेलेब्रिटी ने इन लोगों और इनके कुकृत्यों को लेकर टिप्पणी नहीं की..और तो और इस काली दुनिया में सूची बद्ध महान लोगों ने भी अपनी सफाई में कुछ नहीं कहा. स्पष्ट है, मौन का मतलब हां होता है ज्यादातर मामलों में.
अभी किसे के लिये भी ये कह पाना मुमकिन नहीं है कि सूचिबद्ध महानुभावों में से कितने इन सभी अपराधों के बारे में जानते थे या उसमें शामिल थे अथवा उसके किसी भी तरह के हिस्सेदार थे. परन्तु यह तो पक्की तौर पर कहा ही जा सकता है कि लगभग ये सभी लोग अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिए एप्सटीन के टापू पर पधारते थे. वैसे भी कीचड़ में आप न हलुआ बनाने जाते हैं न खाने. कीचड़ में तो आदमी बस नहाने ही जा सकता है.
इस तरह की बातें हर बार हमारे मस्तिष्क से दो प्रश्न पूछती हैं – क्या सच में कोई इतना गिर सकता है? इतना पतन कैसे किसी व्यक्ति के लिये कैसे संभव हो सकता है?
आपका मस्तिष्क उत्तर में आपसे कहेगा कि मानवीय घटियापन की कोई सीमा नहीं हो सकती. बिलकुल, कोई संदेह नहीं. पर यह तथ्य अचंभे में इस तरह भी डालता है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमाग नैतिकता के कितने बड़े दिखावेबाज और अपराध के कितने शातिर हो सकते हैं.
सत्य तो ये है कि यह इच्छाओं के अतिरेक से होते हुए अपराध के अतिरेक तक जाने वाली सरल-सहज घृणित यात्रा है जिसमें कुंठित मनोवृत्ति अपने छोटेपन के साथ बड़ी हो जाती है और दिखावों के मुखौटे को हटा कर नंगे हो जाने की घटिया पशुवृत्ति खुल कर सामने आ जाती है. मगर तभी तक जब तक ये एप्सटीन क्लब में हों और किसी को पता न चले.
यहाँ पर कुछ लोग यौन इच्छा को स्वाभाविक प्राकृतिक मानवीय इच्छा कह कर इन लोगों का प्रकारांतर से समर्थन करते हुए दिखाई देंगे. फिर यही लोग कहेंगे कि ये तो इनका निजी जीवन है, इसमें झांकने का अधिकार किसी को नहीं है, इनको अनैतिक कहना नैतिकता नहीं है, इत्यादि.
यौन इच्छाओं से याद आया कुछ वर्ष पूर्व एक सेक्स स्कैंडल का भंडाफोड़ हुआ था जिसमें टाइगर वुड्स का नाम सामने आया था. लोगों को आश्चर्य हुआ जान कर कि उसने हाई-प्रोफाइल कॉल गर्ल्स के साथ संबंध बनाने के लिए एक नेटवर्क बनाया हुआ था और उसकी एक पूरी टीम इस काम को सम्हालती थी.
जब टाइगर वुड्स के इस शौक के बारे में दुनिया को पता चला उस समय उस समय वो अपने खेल में शीर्ष पर था. इस रहस्योद्घाटन को लेकर जब उससे उसकी सफाई मांगी गई तो उसका उत्तर एक ऐतिहासिक उत्तर के रूप में सफेदपोश नकाबपोशों की याद के तौर पर दर्ज होगया. इससे ये भी पता चला कि एक व्यक्ति इस तरह भी सोच सकता है.
वुड्स ने बहुत सीधेसपाट तरीके से अपना स्पष्टीकरण सामने रखा – “मैंने यहां तक पहुंचने में बहुत परिश्रम किया है. और इस तरह मैंने बहुत पैसा और नाम कमाया है. और जब मैंने ये सब उपलब्धियां हासिल कर लीं तो मुझे लगा कि मुझे पूरा अधिकार है कि मैं अपनी तृष्णाओं को पूरा करुं. यदि मेरी इच्छा है कि मैं प्रतिदिन मैं एक लड़की से संबंध बनाऊं और यदि मैं इसके लिए पैसे खर्च कर सकता हूं, तो मैं क्यों न ऐसा करूं?”
(त्रिपाठी पारिजात)



