Wednesday, February 18, 2026
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Ghaziabad Triple Suicide: 3 बच्चों के अंतिम शब्द – “सॉरी पापा-मम्मी ! “

Ghaziabad Triple Suicide:  'कोरियन कल्चर' के जुनून और डिजिटल लत ने उजाड़ा परिवार, तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर दी जान..

Ghaziabad Triple Suicide:  ‘कोरियन कल्चर’ के जुनून और डिजिटल लत ने उजाड़ा परिवार, तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर दी जान..

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ “कोरियन कल्चर” के प्रति गहरे आकर्षण और डिजिटल दुनिया के प्रभाव ने तीन मासूम जिंदगियों को लील लिया। ट्रांस-हिंडन इलाके की ‘भारत सिटी’ सोसाइटी में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात करीब 2:15 बजे, तीन सगी बहनों ने अपने फ्लैट की बालकनी से छलांग लगाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। इस त्रासदी ने न केवल एक परिवार को तबाह कर दिया है, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और कल्चरल इन्फ्लुएंस के खतरों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

घटना का विवरण: आधी रात को मची चीख-पुकार

पुलिस के अनुसार, टावर B-1 की नौवीं मंजिल से कूदने वाली बहनों की पहचान निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) के रूप में हुई है। शोर सुनकर जब तक सुरक्षाकर्मी और पड़ोसी मौके पर पहुंचे, तीनों लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ी थीं। उन्हें तत्काल लोनी के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सुसाइड नोट: ‘सॉरी मम्मी-पापा’ और कोरियन कनेक्शन

जांचकर्ताओं को मौके से एक संक्षिप्त लेकिन बेहद भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस हस्तलिखित नोट में बहनों ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए आखिरी शब्द लिखे— “सॉरी पापा-मम्मी”।

पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग नोट में ‘कोरियन कल्चर’ (Korean Culture) का जिक्र होना है। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि लड़कियां कोरियन संगीत (K-Pop), ड्रामा और वहां की जीवनशैली से अत्यधिक प्रभावित थीं।

पुलिस जांच: क्या किसी ‘टास्क’ का था दबाव?

डीसीपी (ट्रांस हिंडन) निमिष पाटिल के अनुसार, अब तक की जांच में किसी विशिष्ट ऑनलाइन गेम या ‘डेथ चैलेंज’ (जैसे ब्लू व्हेल आदि) के सीधे प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, पुलिस निम्नलिखित बिंदुओं पर गहनता से गौर कर रही है:

मोबाइल पर पाबंदी: पता चला है कि घटना से कुछ दिन पहले ही माता-पिता ने लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। क्या इस डिजिटल डिटॉक्स का उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा?

शिक्षा और अलगाव: बड़ी बहन पिछले दो वर्षों से स्कूल नहीं जा रही थी। पढ़ाई में पिछड़ने के कारण वह घर पर ही रहती थी, जिससे उसके सामाजिक अलगाव की संभावना बढ़ गई थी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि: लड़कियों के पिता की दो शादियां हुई थीं और बहनों की माताएं अलग-अलग थीं, पुलिस इस पारिवारिक ढांचे के मानसिक प्रभाव की भी जांच कर रही है।

योगी सरकार की प्रतिक्रिया: “अभिभावकों की जिम्मेदारी बड़ी”

इस हृदयविदारक घटना पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह ने कहा:

“ऑनलाइन गेमिंग और इंटरनेट की लत के खिलाफ सरकार लगातार चेतावनी और सलाह जारी कर रही है। बच्चों को इस दलदल से निकालना केवल सरकार का नहीं, बल्कि परिवार का भी बड़ा उत्तरदायित्व है। अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”

विशेषज्ञों की राय: डिजिटल और कल्चरल एडिक्शन के लक्षण

समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरों में किसी खास विदेशी कल्चर के प्रति ‘ऑबसेशन’ (जुनून) अक्सर उन्हें वास्तविक दुनिया से काट देता है। जब उनकी इस ‘आभासी दुनिया’ (Virtual World) में बाधा आती है, तो वे चरम कदम उठा सकते हैं।

(प्रस्तुति -न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल)

 

 

 

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